Vastu Tips For Kitchen: किचन घर का सबसे महत्वपूर्ण जगह मानी जाती है, क्योंकि इसी जगह पर परिवार के लोगों के लिए भोजन बनाया जाता है। भोजन केवल पेट भरने के लिए ही नहीं होता है बल्कि  शुद्ध एव सात्विक का ध्यान भी रखा जाता है। कहा जाता है कि ऐसा भोजन तन तथा मन दोनों को पवित्र बनाता है। वहां पर मौजूद सकारात्मक या फिर नकारात्मक ऊर्जा का असर भोजन में भी देखने को मिलता है।

‘वास्तु चिंतामणि’ ग्रंथ के अनुसार, पहले समय में किचन को चौका कहा जाता था जिसका अर्थ है चार। चार प्रकार की शुद्धि पूर्वक जो आहार बनाया जाए, जो श्रृषि,  मुनि, अतिथियों के लिए भी खाने योग्य होता है। ऐसे चौके में बना आहार मुनि, आर्थिक, शुल्लक, क्षुल्लिका, प्रतिमाधारी श्रावक, ब्रह्मचारी गण आदि के लिए भक्ति पूर्वक दिया जाए तो उसे आहार दान कहा जाता हे। आहार दान श्रावक के दैनिक कर्तव्यों में से एक हे। इसलिए घर का किचन का अनुकूल दिशाओं में होना भी बेहद जरूरी माना जाता है। आइए वास्तु के अनुसार जानिए कि घर में किचन बनाते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान….

किचन बनाने के लिए सबसे अच्छी दिशा

वास्तु चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार,  रसोई घर के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशा आग्नेय कोण माना जाता है।  पूर्व और दक्षिण दिशा के बीच का कोना यानी दक्षिण-पूर्व को आग्नेय कोण कहा जाता है। इसके स्वामी ग्रह शुक्र और देवता अग्नि हैं। अशुभ घटनाओं का अग्नि निवारण करती है। अग्नि का कार्य है जलाना या भस्म करना। ऐसे में इस दिशा में किचन बनवाने से  घर की सभी आपत्तियां भस्म होती हैं। इसलिए इस दिशा में गैस चूल्हा, इंडक्शन, स्टोव आदि रखना लाभकारी माना जाता है।

किचन बनवाते समय ध्यान रखें ये बातें

  • किचन बनाते समय इस तरह चूल्हा रखें कि खाना बनाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा होने से आरोग्य वर्धक मिलता है।
  • किचन में चूल्हा इस तरह से रखा होना चाहिए कि द्वार से न दिख रहा हो। वास्तु के अनुसार, द्वार से चूल्हा दिखने से परिवार को पूर्ण हानि होने की संभावना हे।
  • रसोई घर में अनावश्यक चीजें न रखें। बल्कि किचन से संबंधित सामग्री यानी ग्राइंडर, मिक्सर, खल बट्टा, ओखली आदि वहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से सुख समाधान दायक होता है।
  • किचन में खाना बनाते समय किसी भी प्रकार की बेकार की बातें, लड़ाई-झगड़े आदि नहीं करना चाहिए। इससे वहां का वातावरण दूषित होता है।
  • घर में किचन बनवाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अगर उत्तर या पूर्व दिशा में सड़क हैं, तो कभी भी ईशान कोण की ओर किचन नहीं बनाना चाहिए। इससे पारिवारिक कलह तथा धन हानि का संताप भोगना पडता है।
  • यदि पूर्व एवं दक्षिण में सड़क है और आग्नेय कोण में रसोईघर है तो सबसे अच्छा माना जाता है।
  • यदि घर के उत्तर में सड़क हो तथा मकान में उत्तर में रसोई घर बनाया जाए तो यह अशुभ तथा विपरीत फलदायक होता है।
  • यदि भूखण्ड के दक्षिण एवं पश्चिम में सड़क हो तथा किसी कारण आग्नेय में रसोई घर बनाना संभव न हो तो इसका निर्माण नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम ) अथवा वायव्य कमरे ( उत्तर-पश्चिम) के आग्नेय भाग में किया जा सकता है।
  • यदि भूखंड के दक्षिणी भाग में सड़क हो तो वायव्य में रसोई घर बनाए तथा कमरे के आग्नेय भाग में रसोई का प्लेटफार्म बनाएं।
  • यदि भूखण्ड के उत्तरी एवं पश्चिमी भाग में सड़क हो तथा वायव्य भाग में रसोई घर बनाया जाए तो इसके विलक्षण परिणाम होंगे! अतिथियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से घर में रौनक तो रहेगी किन्तु खर्च अधिक होने से गृहिणी के चेहरे की रौनक फीकी बनी रहती है।

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डिस्क्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र की मान्यताओं, पारंपरिक विचारों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी एवं जागरूकता प्रदान करना है। वास्तु संबंधी मान्यताओं के परिणाम व्यक्ति-विशेष की आस्था और विश्वास पर निर्भर करते हैं। किसी भी निर्माण या वास्तु परिवर्तन से पहले योग्य वास्तु विशेषज्ञ, वास्तु शास्त्री या संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।