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Vasant Panchami Puja 2019: ये है पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Vasant Panchami Puja Shubh Muhurat, Mantra, Procedure and Timings: बसंत पंचमी का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी को पड़ता है। इस बार बसंत पंचमी 10 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी।

Author February 10, 2019 9:39 AM
देवी सरस्वती।

Vasant Panchami Puja Shubh Muhurat, Mantra, Procedure and Timings: बसंत पंचमी का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी को पड़ता है। इस बार बसंत पंचमी 10 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी विधा, बुद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती है। यह दिन सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। परंपराओं के अनुसार इस दिन पीले वस्त्र पहनकर विध-विधान से मां सरस्वती की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार जानते हैं कि बसंत पंचमी 2019 की पूजा विधि क्या है? साथ ही इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

विधि: बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा या तस्वीर को सामने रखना चाहिए। इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी और नवग्रह की विधिवत् पूजा करनी चाहिए। इसके बाद माता सरस्वती की पूजा करें। सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं। सरस्वती माता को सिन्दूर और अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है। चूंकि देवी सरस्वती सफेद वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए उन्हें सफेद वस्त्र अर्पित करें। सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं। प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदियां अर्पित करनी चाहिए। इस दिन सरस्वती माता को मालपुए और खीर का भी भोग लगाया जाता है।

मंत्र:- 

1. ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः इस मंत्र को बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली बताया गया है।

2. ध्यान मंत्र: या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभि र्देवैः सदा वन्दिता।। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥ यानि जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणादण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूरण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें।

3. शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्। यानि जो देवी (शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार और चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान् बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूं।

शुभ मुहूर्त: –

बसंत पंचमी पूजा मुहूर्त: 12:26 से 12:35
अवधि 0घंटे 09 मिनट
पंचमी तिथि आरंभ 09 फरवरी 2019 को 12:25 बजे
पंचमी तिथि समाप्त- 10 फरवरी 2019 को 14:08 बजे

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