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Vasant Panchami/ Saraswati Puja 2020 Date: बसंत पंचमी या सरस्वती पूजा की मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र की जानकारी विस्तार से जानें

Vasant Panchami/ Saraswati Puja 2020 Date, Timings, Samagri, Vrat Katha, Aarti, Puja Vidhi, Mantra: 29 जनवरी को मनाया जाएगा बसंत पंचमी। बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। जानिए इससे जुड़ी अन्य जानकारी-

Vasant Panchami/ Saraswati Puja 2020 Date: बसंत पंचमी या सरस्वती पूजा की मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र की जानकारी विस्तार से जानें
Basant Panchmi/ Saraswati Puja 2020 Date, Puja Vidhi: जानिए कब है बसंत पंचमी

Vasant Panchami/ Saraswati Puja 2020 Date, Time, Vidhi, Vrat, Katha, Aarti: इस साल बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) का त्योहार 29 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि बिहार समेत कई और जगहों पर लोग बसंत पंचमी की पूजा 30 जनवरी को भी कर रहे हैं। बसंत पंचमी(Basant Panchmi), जिसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है, माघ महीने के पांचवें दिन मनाया जाता है। यह त्योहार वसंत के मौसम की शुरुआत और देवी सरस्वती के जन्मदिन के लिए मनाया जाता है, जो ज्ञान और शिक्षा की देवी हैं। यह होली के रंगीन त्योहार के आगमन की भी घोषणा करता है। वसंत पंचमी को उत्तर और दक्षिण भारत के हिंदुओं द्वारा अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। जबकि यह पंजाब में एक पतंग उत्सव है, यह बिहार में एक फसल उत्सव है। जबकि यह उत्तर में शैक्षणिक संस्थानों में सरस्वती पूजा के रूप में मनाया जाता है, यह ज्यादातर दक्षिण भारत में एक मंदिर त्योहार है। शादी और गृहप्रवेश के लिए भी वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा का दिन सर्वोत्तम माना गया है।

ज्योतिषों के अनुसार वसंत पंचमी का दिन नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है क्योंकि यह अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है।  वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।

मां सरस्वती की पूजा कैसे करें: घरों के साथ-साथ स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।

Live Blog

19:03 (IST)27 Jan 2020
बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी-

बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं।

18:30 (IST)27 Jan 2020
आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा:

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी।

18:02 (IST)27 Jan 2020
बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा? 

पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. 
 बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. 
 इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. 
 इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. 
 इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. 

17:34 (IST)27 Jan 2020
वंसत पंचमी की पूजा विधि

स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें। 

17:05 (IST)27 Jan 2020
इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन

शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें।

16:45 (IST)27 Jan 2020
वसंत पंचमी: 

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है।

16:13 (IST)27 Jan 2020
बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं|

15:45 (IST)27 Jan 2020
प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी

हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है।

15:24 (IST)27 Jan 2020
कामदेव की पूजा

बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है।

15:01 (IST)27 Jan 2020
कैसे करें मां सरस्वती की पूजा

स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें। 

14:52 (IST)27 Jan 2020
जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी

हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया।

14:38 (IST)27 Jan 2020
बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त

बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020
पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से
पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक

13:45 (IST)27 Jan 2020
बसंत पंचमी कथा –

सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है।

13:33 (IST)27 Jan 2020
मां सरस्‍वती का मंत्र

मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च 

13:09 (IST)27 Jan 2020
बसंत पंचमी कब है?

हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है।

12:47 (IST)27 Jan 2020
वसंत पंचमी है शुभ दिन

ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है। 

12:27 (IST)27 Jan 2020
वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां

– वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए।
– इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें।
– वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए।
– वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें।
– इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए।
– वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें।

12:01 (IST)27 Jan 2020
सरस्वती पूजा मंत्र –

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

12:00 (IST)27 Jan 2020
सरस्वती पूजा मंत्र-

सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा।

12:00 (IST)27 Jan 2020
बसंत पचंमी तिथि –

बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020
बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020

12:00 (IST)27 Jan 2020
जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी

हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।

11:59 (IST)27 Jan 2020
वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त

29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक
मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

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First published on: 27-01-2020 at 11:59 IST

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पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

विवाहित युगल आज अत्यधिक सामीप्य का अनुभव करेंगे और प्रेम और सद्भावनापूर्ण संबंधों का आनंद लेंगे खोजकर्ताओं का एक समूह आपको उनकी यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर सकता है। यह आपके लिए किसी सपने के पुरे होने जैसा होगा। आप हमेशा से ही पर्यटन के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने के इच्छुक… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

अविवाहित व्यक्तियों को चाहिए कि अपने मित्रों को पार्टियों और समारोहों में हिस्सा लें, जिससे संभावित प्रेमी से भेंट हो सके। अगर परिवार के साथ बाहर सैर सपाटे पर जाने की योजना बना रहे हैं तो आज दिन अच्छा है। स्वास्थ्य सेवाकर्मी और डॉक्टर आज अपने व्यवसाय के चरम शिखर पर होंगे। राजनेताओं को आज… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

आज कामकाज के संबंध में किसी से भेट हो सकती है जिससे मिलकर आप उसकी ओर आकर्षित हो सकते हैं। परिवार के वयस्क आज बहुत ऊर्जावान महसूस करेंगे। वे दूसरे सदस्यों के साथ भी मिलजुल कर आनंद मग्न रहेंगे। घर में छोटी-मोटी समस्याएं हो सकती हैं जिसके कारण आपको पहले से तय कोई सैर या… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

वयस्कों के अनुभव और मार्गदर्शन से घर के सभी सदस्यों को लाभ होगा। बच्चों को अपने बुजुर्गों से व्यवहार करते समय मर्यादा में रहना चाहिए। उनका बचपना वयस्कों को दुखी कर सकता है। विद्यार्थियों के लिए अच्छा दिन है। वे बौद्धिक विषयों पर दोस्तों के साथ पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे। जो लोग एक… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

अविवाहितों के पालक उनके लिए योग्य सम्बंध के लिए प्रयत्न करेंगे। कोई अप्रत्याशित व्यावसायिक यात्रा आपके कार्यक्रम को उथल पुथल कर सकती है। लेकिन इस यात्रा के परिणाम आपके लिए फायदेमंद होंगे। अपने मकान निर्माण की योजना बना रहे लोगों के लिए आज शुभ दिन होगा। शेयर बाजार के मधास्था और प्रतिस्पर्धियों को आज अत्यधिक… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

आज किसी प्रियजन के बारे में दुखद समाचार सुनने मिल सकता हैं, आपकी उपस्थिति और सहायता से उन्हें बहुत सांत्वना मिलेगी यदि आप अविवाहित है तो आज किसी भी नए व्यक्ति से मिलते समय सावधान रहें। धन रखें की हर चमकती सोना नहीं होती। आज आप अपनी यात्रा के दौरान किसी अविस्मरणीय व्यक्ति से मिल… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

एकाकी जन आज किसी से मिलेंगे जो उनके जीवन में नए सकारात्मक बदलाव लाएगा। छात्रों के लिए आज अनुकूल दिन नहीं हैं। वे अपने दोस्तों के साथ बहस कर समय बर्बाद कर सकते हैं। आज खिलाड़ियों को अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए पुरस्कार मिलने की संभावना बताई जाती है। उन्हें आज जीवनगौरव पुरस्कार भी… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

आज आप अपने पुराने रिश्ते को सुधारने की दिशा में क़दम उठाएंगे। ठंडी हवा और शीत पेय आदि से प्रभावित होने वाले बच्चों को इन चीजों से दूर रखें। मौसम के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। जो लोग काम की तलाश में हैं उन्हें संकोच और शर्म छोड़ कर निशंक होकर दूसरों से मदत… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

उत्सव के माहौल के रूप में परिवारों के लिए एक अच्छा दिन आता है और बहुत खुशीयां लाता है। शिक्षक और विद्यार्थी जो शैक्षणिक यात्रा पर जा रहे हों, उन्हें बहुत सजग रहने की आवश्यकता है। छोटी मोटी दुर्घटनाओं की संभावना है। जंगल, नदी, पहाड़ों से गुजरते समय सावधान रहें। आपकी व्यावसायिक नीतियाँ, कुशलता और… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

अविवाहितों को किसी अनापेक्षित मार्ग से आज विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं। बाहर मनोरंजन हेतु जाने का कार्यक्रम किसी अनापेक्षित कारण से स्थगित करना पड़ेगा, जिससे सभी को निराशा होगी। शिक्षकों के लिए आज शिक्षा के सन्दर्भ में चुनौती भरा दिन होगा। विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान से उनके अध्यापन कौशल्य की परीक्षा होगी।… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

अविवाहित जन आज किसी आकर्षक व्यक्ति से मिल सकते हैं, पर उन्हें सलाह है कि कोई भी प्रतिबद्धता या समर्पण व्यक्त करने से पहले अच्छी तरह सोच समझ लें। आज बाजार का उतार चढ़ाव निवेशकों को अनापेक्षित मुनाफा दिलाएगा। वे वास्तव में बहुत बड़ा लाभ पा सकते हैं यदि सोच समझ कर निवेश करें। व्यवहार-कुशल… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

आप आज महमानों को अपने घर आमंत्रित करेंगे और आदर्श मेजबान होंगे। आप सभी आमंत्रित लोगों से मेलजोल बढ़ाएंगे, अपने बारे में बताएँगे, साथ ही उन्हें भी अपने परिवार के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।कलाकार किसी नए रचनात्मक कलाकृति को शुरू करने के लिए अपनी कलात्मकता और प्रवृत्ति का उपयोग करेंगे।सरकारी परियोजनाओं… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

आपके प्रणय को अंततः आज आपके माता-पिता की औपचारिक मंजूरी मिल जाएगी।उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने की इच्छा रखने वाले बच्चे आपकी सलाह के लिए आपसे संपर्क करेंगे जिससे आपको बहुत खुशी और गर्व होगा।छात्र आज अपनी जरूरी परियोजनाओं को करने में निष्क्रिय हो सकते हैं। जो लोग तकनीकी जाँच में हैं, वे भी… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ 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कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

मामूली बीमारी से ग्रस्त बच्चों को आज बिस्तर पर पड़े रहना होगा, जिससे खेलकूद ना कर सकने के कारण निराशा होगी।अपने हिस्सेदार पर अंधा विश्वास अनावश्यक आर्थिक नुकसान का कारण हो सकता है। उस पर विश्वास रखें पर सारी बातें उस पर ना छोड़ें। उनकी गतिविधियों पर ध्यान दें।आज वयस्क स्वजनों को स्वास्थ्य जाँच के… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन 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व्यापारी के लिए आज का दिन अच्छा है। आज आप ग्राहकों, सहयोगियों और अधिकारियों से भेंट और वार्तालाप कर सकते है।अपने आर्थिक मामलों में सावधान रहें और भविष्य में सारे आर्थिक काम और अर्थ संकल्प बनाकर उसका पालन करें।जो लोग अचल संपत्ति के व्यवसाय में हैं, उनके नए सौदों में अनावश्यक देरी होने की संभावना… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

लेखपालों के लिए आज अच्छा दिन है। वे आज ख्याति प्राप्त कर सकते हैं।संभवता छात्र आज आयोजित शैक्षणिक दौरे में भाग नहीं ले पाएंगे। विद्यार्थी आज शिक्षकों के पास आत्मीयता की अपेक्षा लेकर आयेंगे। उन्हें शिक्षकों की ओर से प्रशंसा और अपनापन मिलेगा।अपने नये रिश्ते को बढ़ने और परिपक्व होने के लिए थोडा और समय… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

बच्चे आज खुद को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। उनको मामूली खरोंच या चोट हुई, तब भी पूरा परिवार परेशान हो जायेगा।तकनीकी विषयों का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए एक कठिन दिन हैं। उन्हें अध्ययन करने में समर्थ होने के लिए शांतिपूर्ण वातावरण की आवश्यकता है।कलाकार आज स्वयं को शारीरिक रूप से अस्वस्थ अनुभव करेंगे… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

पक्ष के वरिष्ठ नेता उन राजनीतिज्ञों के प्रति उदासीन रहेंगे जो सफलता के लिये जी जान से प्रयत्न कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के लिए सारा दिन कुछ समस्याएं सामने आ सकती हैं। ये उनके लिए थका देने वाला दिन होगा। तथापि वे इन समस्याओं से छुटकारा पा लेंगे।वरिष्ठ वकील आज अपने उच्चाधिकारियों द्वारा… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

तकनीकी दृष्टि से योग्य पेशेवर आज अपने कार्यक्षेत्र में ऊँचे आयाम हासिल करेंगे। कार्यक्षेत्र के नए क्षितिज का विस्तार करने के योग है।बच्चे आज घर के छोटे मोटे कामों में मदत करके बहुत सहायक साबित होंगे। आज शाम के लिए यदि आयोजित कार्यक्रम हो तो उत्सव मस्ती और आनंद से भरा हुआ होगा। आज का… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

वयस्कों से अपनी किसी भी समस्या के लिए सलाह लीजिये। इससे आपको उनके अनुभव से लाभ होगा और उन्हें भी प्रसन्नता होगी।आप खुद को अस्वस्थ महसूस कर सकते है। इस दशा में आप किसी से भी सम्पर्क ना करके अकेले ही रहना पसंद करेंगे।लेखापालों को चाहिये कि किसी विशेष प्रकल्प के सिलसिले में किसी विशेषज्ञ… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

आज अपने खान पान का विशेष ध्यान रखें। किसी विषैली वस्तु के सेवन या पेटदर्द की संभावना है। भोजन प्रमाणबद्ध और पौष्टिक हो, इसका ध्यान रखें।जो लोग अचल संपत्ति के व्यवसाय में हैं उनका आज का दिन बहुत व्यस्त रहने की संभावना है। अनेक फोन, ग्राहकों से संपर्क होंगे और उनके सौदा तथा व्यवहार पूर्ण… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

लंबी बीमारी से पीड़ित शय्या ग्रस्त मरीज उचित दवा और देखभाल से जल्द ही ठीक हो जाएंगे। अपने प्रिय के साथ झगड़े से आज आप बहुत उदास रहेंगे। समझ बूझ कर समझौता कर लेना चाहिए।दोस्तों या सहपाठियों के साथ बात करते समय छात्रों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गलतफहमी होने की संभावना… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

जमीन-जायदाद के जुड़े कारोबारियों के लिए आज दिन अनुकूल रहेगा। आज काम की बहुत व्यस्तता रहेगी।बच्चों की शिक्षा आज परिवार के लिए विचार का विषय होगी।वकील गण आज अपने विवेक से निर्णय लेंगे और ये सफल निर्णय उन्हें सह-कर्मियों और वरिष्ठों से प्रशंसा दिलाएंगे।नई नौकरी के परिणाम के लिए प्रतीक्षा कर रहे खिलाड़ियों को आज… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

इस महीने मेष राशि के सीमा दलों से जुड़ें जातकों को चाहिए कि वह स्वयं को संयमित रखकर अपनी ओर से किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहें। यह मास बुद्धिजीवियों वकीलों लेखकों और न्याय क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बहुत सफल और सार्थक सिद्ध हो सकता है। जातक अपने अपने… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

वृषभ राशि के जातकों के लिए जनवरी 2023 यह माह मिश्र फल देने वाला रहेगा, फिर भी शुभशुभ फल अधिक मिलेंगे। राजनीतिक पदों पर आसीन उच्चाधिकारी और सेना के मंत्रीगण और अन्य अधिकारी इस माह बहुत अधिक प्रवास और यात्राएं करने से थकान का अनुभव कर सकते हैं। उन्हें प्रशासन और अन्य कामो के सिलसिले… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

जनवरी महिना मिथुन जातकों के लिए ग्रहों के अच्छे फलों के कारण अत्यंत शुभ फलदाई और संतोषजनक सिद्ध होगा. जातकों को चाहिए कि वे संबंधी शारीरिक विकारों से सतर्क रहें और आहार-विहार पर विशेष रुप से ध्यान देकर अनावश्यक व्याधियों से बचने का प्रयत्न करें. शिक्षाविदों को और विद्यार्थी युवको को इस माह शिष्यवृत्ती और… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

वर्ष 2023 का आरंभ कर्क जातकों के लिए अत्यंत सुखद और शुभ फल प्रद सिद्ध होने वाला है. ग्रहों के स्वामी सूर्य की कृपा दृष्टि से कर्क जातकों को हर ओर से विजय, समृद्धि और हर दिशा में सफलता प्राप्त होने के शुभ योग दिखाई देते हैं. जनवरी का पूर्वार्ध अत्यंत व्यस्तता से भरा और… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

सिंह जातकों के लिए यह माह अत्यंत फलदायी सिद्ध होगा। प्रजा, राज्य तथा उच्चाधिकारियों, शासन प्रशासन की ओर से कई प्रकार की सुविधाएं प्राप्त कर सकती हैं। यह मास विशेष रुप से सर्वोच्च श्रेणी के नेतागण, राज निक और उच्चाधिकारियों के लिए बहुत अधिक सुख और आनंद प्रदान करने वाला सिद्ध होगा। विवाह इच्छुक युवा… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है. इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है। 15:01 (IST)27 Jan 2020 कैसे करें मां सरस्वती की पूजा स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  14:52 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। 14:38 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी 2020 की तारीख और शुभ मुहूर्त बसंत पंचमी कब है: 29 जनवरी 2020पंचमी तिथि की शुरुआत: 29 जनवरी 2020 को सुबह 10.45 बजे से पंचमी तिथि की समाप्ति: 30 जनवरी 2020 को दोपहर 1.19 बजे तक 13:45 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कथा – सृष्टि रचना के दौरान भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की|  ब्रह्माजी अपने सृजन से संतुष्ट नहीं थे।  उन्हें लगा कि कुछ कमी है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल का छिड़काव किया, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही कंपन होने लगा| इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई| यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री थी| जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरे हाथ में वर मुद्रा था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी| ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हुई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हुआ। पवन चलने से सरसराहट होने लगी।  तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। 13:33 (IST)27 Jan 2020 मां सरस्‍वती का मंत्र मां सरस्वती की आराधना करते वक्‍त इस श्‍लोक का उच्‍चारण करना चाहिए:ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च  13:09 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्‍योहार हर साल माघ मास शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक बसंत पंचमी हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार बसंत पंचमी 29 जनवरी 2020 को है। 12:47 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी है शुभ दिन ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।  12:27 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये सात गलतियां – वसंत पंचमी के दिन बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए। – इस दिन रंग-बिरंगे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पीले वस्त्रों को ही तरजीह दें। – वसंत पंचमी के दिन पेड़-पौधे नहीं काटने चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन किसी को अपशब्द बोलने से बचें। – इस दिन गाली-गलौज व झगड़े से भी बचना चाहिए। – वसंत पंचमी के दिन मांस-मदिरा के सेवन से दूर रहें। 12:01 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र – या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥ शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥ 12:00 (IST)27 Jan 2020 सरस्वती पूजा मंत्र- सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी, विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा। 12:00 (IST)27 Jan 2020 बसंत पचंमी तिथि – बसंत पचंमी प्रारंभ – 10:45 AM on Jan 29, 2020बसंत पचंमी समाप्त – 01:19 PM on Jan 30, 2020 12:00 (IST)27 Jan 2020 जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी। 11:59 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त 29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट

कन्या जातक राजनेता, उच्च पदाधिकारी, लोकनायक, शासक वर्ग माह के पूर्वार्द्ध में अच्छे निर्णय और जनहित की नीतियों और उनके उचित व्यवस्था के कारण अपनी छवि सुधारने में सफल होंगे और विरोधियों और जन-सामान्य के विरोध पर विजय प्राप्त करेंगे। कृषि, पशुपालन, दुग्ध-व्यवसाय विशेष रूप से पशु, कुक्कुटखाद्य के उद्योग और व्यवसाय कठिन समय से… Live Blog Highlights 19:03 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी से जुड़ी जानकारी- बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे। बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं। इस त्योहार के मौके पर लोग पूजा करते हैं। इसके अलावा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज और कोट्स भेजकर ढेर सारी शुभकामनाएं भी देते हैं। 18:30 (IST)27 Jan 2020 आज के दिन ही प्रकट हुईं थी मां सरस्वती- बसंत पचंमी कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी। 18:02 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी के दिन कैसे की जाती है देवी सरस्‍वती की पूजा?  पश्‍चिम बंगाल और बिहार में बसंत पंचमी के दिन सरस्‍वती पूजा का व‍िशेष महत्‍व है. न सिर्फ घरों में बल्‍कि श‍िक्षण संस्‍थाओं में भी इस दिन सरस्‍वती पूजा का आयोजन किया जाता है. – बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं. – इस दिन वाद्य यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है. – इस दिन छोटे बच्‍चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है. उन्‍हें किताबें भी भेंट की जाती हैं. – इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.  17:34 (IST)27 Jan 2020 वंसत पंचमी की पूजा विधि स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ-साथ घरों में भी यह पूजा की जाती है। अगर आप घर में मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें। सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं। बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।  17:05 (IST)27 Jan 2020 इसलिए बसंत पंचमी तिथि को लेकर है उलझन शास्त्रों में इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में बताया गया है यानी कि इस दिन कोई भी शुभ काम बिना किसी पंचांग को देखे किया जा सकता है। लेकिन पंचांग की गणना ने ही इस साल बसंत पचंमी की तिथि को लेकर लोगों को उलझा दिया है। कई ज्योतिषी 29 जनवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा बता रहे हैं तो कई 30 जनवरी को। ऐसे में आपके लिए किस दिन सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का उत्सव मनाना उचित होगा और इस तरह की स्थिति क्यों बनी है आइए जानें। 16:45 (IST)27 Jan 2020 वसंत पंचमी:  माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन खासतौर पर स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है। इस दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। इस दिन कामदेव, रति और भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। वसंत पंचमी के दिन सुबह में ही मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है। 16:13 (IST)27 Jan 2020 बसंत पंचमी व सरस्वती पूजा बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा भी की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान की देवी मानी जाती है। गुरु शिष्य परंपरा के तहत माता-पिता इसी दिन अपने बच्चे को गुरुकुल में गुरु को सौंपते थे। यानि बच्चों की औपचारिक शिक्षा के लिये यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। विद्या व कला की देवी सरस्वती इस दिन मेहरबान होती हैं इसलिये उनकी पूजा भी की जाती है। इसलिये कलाजगत से जुड़े लोग भी इस दिन को अपने लिये बहुत खास मानते हैं। जिस तरह  सैनिकों के लिए उनके शस्त्र और विजयादशमी का पर्व, उसी तरह और उतना ही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है| चाहे वह कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब इस दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं| 15:45 (IST)27 Jan 2020 प्राकृतिक आधार पर भी विशेष है बसंत पंचमी हिंदू पंचांग में 6 ऋतुएं होती हैं, इनमें बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना गया है।इसके अलावा प्राकृतिक दृष्टि से बसंत पंचमी को फूलों के खिलने और नई फसल के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरद ऋतु की कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति की खूबसूरती अपने चरम पर होती है। इस मौसम में खेतों में सरसों की फसल पीले फूलों के साथ, आम के पेड़ पर आए फूल, चारों तरफ हरियाली और गुलाबी ठंड मौसम को और भी खुशनुमा बना देती है। 15:24 (IST)27 Jan 2020 कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते हैं. पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुंचकर कामदेव की पूजा करते थे. बसंत ऋतु में मौसम सुहाना हो जाता है और मान्‍यता है कि कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते हैं. दरअसल, पौराण‍िक मान्‍यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र हैं, इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है. जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है. इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्