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Vasant Panchami 2019: बसंत पंचमी पर क्यों होती है मां सरस्वती की पूजा? ये है महत्व

Vasant Panchami 2019: बसंत पंचमी पर सभी को शुभकामनाएं। हिंदू पंचाग के अनुसार हर साल माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की आराधना की जाती है। लेकिन क्या आप इसका महत्व जानते हैं?

सरस्वती पूजन यानी ईश्वर से कामना करो कि हमे सद्बुद्धि प्रदान करें।

Vasant Panchami 2019: बसंत पंचमी पर सभी को शुभकामनाएं। हिंदू पंचाग के अनुसार हर साल माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की आराधना की जाती है। लेकिन क्या आप इसका महत्व जानते हैं? क्या आप जानते हैं क्यों माता सरस्वती की आराधना होती है? तो चलिए आज जानते हैं यही। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि यदि किसी की कुंडली में विद्या बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा में बाधा आ रही है तो इस दिन मां शारदा की आराधना अवश्य करनी चाहिए। सरस्वती पूजन के बाद सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा और बाद में रति और कामदेव की पूजा करना भी लाभदायक माना जाता है।

सरस्वती पूजन यानी ईश्वर से कामना करो कि हमे सद्बुद्धि प्रदान करें। बुद्धि केवल मनुष्य के पास ही नहीं बल्कि पशुओं के पास भी होती है परन्तु सदबुद्धि का अधिकारी मनुष्य मात्र ही है। दुख का विषय यह है कि मनुष्य चालाक, विद्वान, गुणी बनने के प्रयास तो करता हैं परन्तु सद्बुद्धि के बिना सब योग्यताएं व्यर्थ ही नहीं बल्कि हानिकारक सिद्ध होती है जबकि जिस व्यक्ति के पास सद्बुद्धि हैं उसके पास कोई कमी नहीं होती। बता दें इस दिन संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी लिया जा सकता है।

बसंत पंचमी न सिर्फ भारत में हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है बल्कि नेपाल और अन्य देशों में भी मनाया जाता है। कई जगह बसंत पंचमी को वसंत पंचमी भी कहा जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी पर पीले रंग को काफी महत्व दिया जाता है। पूजा के समय या त्योहार मनाते किसी भी वक्त लड़के-लड़कियां पीले रंग के कपड़े पहनते हैं। माता सरस्वती की पूजा करने का कोई निर्धारित समय नहीं है लेकिन पंचमी तिथि पर पुर्वाहन कला पर पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। यानी कि सूर्योदय और आधे दिन के समय। भारत में यह त्योहार कई तरह से मनाया जाता है। राजस्थान में पतंग उड़ाने का रिवाज है।

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