Varuthini Ekadashi Vrat Katha In Hindi: वरुथिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है और यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है। इस व्रत की कथा प्राचीन काल के महान और धर्मपरायण राजा मांधाता से जुड़ी हुई है। वहीं इस साल वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल यानी आज है। आइए जानते हैं व्रत कथा के बारे में…

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वरुथिनी एकादशी व्रत कथा 2026 (Varuthini Ekadashin Vrat Katha 2026 In Hindi)

कहा जाता है कि राजा मांधाता एक न्यायप्रिय और सत्यवादी शासक थे, जिनके राज्य में चारों ओर सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण था। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपनी प्रजा का पालन करते थे। एक समय की बात है, राजा मांधाता वन में जाकर कठोर तपस्या कर रहे थे। वे गहन ध्यान में लीन थे, तभी अचानक एक जंगली भालू (कुछ कथाओं में सिंह) ने उन पर हमला कर दिया। उस हिंसक पशु ने राजा को गंभीर रूप से घायल कर दिया और उनका एक पैर तक चबा डाला। अत्यधिक पीड़ा में होने के बावजूद भी राजा का मन भगवान विष्णु की भक्ति से विचलित नहीं हुआ और वे निरंतर उनका स्मरण करते रहे।

राजा की अटूट भक्ति और श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने राजा को उस संकट से बचाया। भगवान ने राजा से कहा कि यह कष्ट उनके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है, लेकिन यदि वे विधिपूर्वक वरुथिनी एकादशी का व्रत करें, तो उन्हें इस पाप से मुक्ति मिल सकती है। भगवान के आदेश का पालन करते हुए राजा मांधाता ने पूर्ण श्रद्धा, नियम और विधि के साथ वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा।

इस व्रत के प्रभाव से राजा मांधाता का शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया और उनका खोया हुआ पैर भी वापस प्राप्त हो गया। साथ ही उनके सभी पाप नष्ट हो गए और उन्हें पुनः सुख, वैभव और यश की प्राप्ति हुई। इस प्रकार वरुथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी माना गया है।

यह कथा हमें यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति, श्रद्धा और व्रत के पालन से मनुष्य अपने जीवन के कष्टों और पापों से मुक्ति पा सकता है। वरुथिनी एकादशी का व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य भी प्रदान करता है। इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को महान पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

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