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Varah Jayanti 2018: क्यों मनाई जाती है वराह जयंती, जानिए क्या है इसका महत्व

Varah Jayanti 2018: कहते हैं कि भगवान विष्णु अब तक कुल दस अवतार ले चुके हैं। विष्णु जी के इन दस अवतारों में वराह अवतार बड़ा ही खास माना जाता है।

Varah Jayanti 2018: इस साल(2018) आज यानी 12 सितंबर(बुधवार) को वराह जयंती मनाई जा रही है। वराह जयंती भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। कहते हैं कि भगवान विष्णु ने इसी दिन वराह का रूप धारण किया था। वराह को विष्णु जी का तीसरा अवतार बताया जाता है। कहते हैं कि भगवान विष्णु अब तक कुल दस अवतार ले चुके हैं। विष्णु जी के इन दस अवतारों में वराह अवतार बड़ा ही खास माना जाता है। भगवान विष्णु ने हरिण्याक्ष का वध करने के उद्देश्य से वराह अवतार लिया। चलिए आपको इसी पूरी कथा के बारे में बताते हैं।

ऐसा बताया जाता है कि दैत्य हिरण्याक्ष ने एक बार पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया था। इस घटनाक्रम से पूरे ब्रम्हाण्ड में हडकंप मच गया था। पृथ्वी का पता लगाने के लिए भगवान ब्रह्मा की नाक से विष्णु जी वराह रूप में प्रकट हुए। कहते हैं कि वराह जी ने पृथ्वी की खोज के लिए काफी मेहनत की और अंत में उसका पता लगा लिया। बताते हैं कि वराह जी समुद्र के अंदर जाकर अपने दांतों पर पृथ्वी को रखकर वह बाहर लेकर आए थे। इस बात की जानकारी जब हिरण्याक्ष को हुई तो वह काफी क्रोधित हुआ।

कहते हैं कि पृथ्वी के लिए हिरण्याक्ष और वराह के बीच भीषण युद्ध हुआ। इस युद्ध के अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष को हराकर उसका वध कर दिया। इसके बाद भगवान वराह ने अपने खुरों से जल को स्तंभित कर उस पर पृथ्वी को स्थापित किया। भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह को बहुत ही कल्याणकारी बताया जाता है। माना जाता है कि जो लोग वराह जयंती पर व्रत रखते हैं उनका सोया हुआ भाग्य जग जाता है। इस दिन संकल्प करके एक कलश में भगवान वराह की सोने की प्रतिमा स्थापित करने का भी विधान है। इससे भगवान वराह की सदा कृपा बरसने की मान्यता है।

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