अधिक मास में पड़ने वाली वरद विनायक चतुर्थी भगवान श्री गणेश को समर्पित बेहद शुभ तिथि मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। “वरद” का अर्थ है वरदान देने वाले, इसलिए इस चतुर्थी पर गणेश जी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। खासतौर पर संतान सुख, बुद्धि, धन और सफलता की कामना करने वाले भक्त इस दिन व्रत रखते हैं। वहीं इस दिन रवि योग बन रहा है। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…
वरद विनायक चतुर्थी पर करें इस कथा का पाठ, भगवान गणेश की रहेगी विशेष कृपा
वरदा चतुर्थी 2026 तिथि (kab hai varda vinayaka chaturthi)
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ अधिक मास की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 मई को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, यह व्रत 20 मई को रखा जाएगा।
वरदा चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त
वरदा चतुर्थी पर रवि योग बन रहा है। यह योग 05:28 ए एम से 06:11 ए एम तक रहेगा। इस बीच में आप पूजा- अर्चना कर सकते हैं।
वरद विनायक पूजा- विधि
वरद विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को शुद्ध करके भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। गणपति बप्पा को लाल फूल, दूर्वा, सिंदूर, मोदक और फल अर्पित करें। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके बाद गणेश चालीसा और व्रत कथा का पाठ करें। कई भक्त इस दिन दिनभर व्रत रखकर शाम के समय दोबारा भगवान गणेश की आरती करते हैं। बाद में गणपति बप्पा से सुख, समृद्धि और सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
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वरद चतुर्थी का धार्मिक महत्व
अधिक मास में पड़ने वाली वरद विनायक चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। “वरद” का अर्थ है वरदान देने वाले, इसलिए इस चतुर्थी को विशेष रूप से इच्छापूर्ति और बाधाओं को दूर करने वाली तिथि माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का कई गुना फल मिलता है। ऐसे में अधिक मास में आने वाली वरद विनायक चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन गणपति बप्पा की पूजा करने से कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं, करियर और व्यापार में सफलता मिलने की मान्यता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
