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वामन द्वादशी व्रत कथा: जानिए कैसे भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पैर जमीन मांग जीता था स्वर्ग

Vaman Dvashashi vart katha : वामन रुप में श्री विष्णु ने भिक्षा में बली से तीन पग भूमि मांगते हैं। राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे देते हैं।

श्रीमद्भागवत पुराण में वामन अवतार के बारे में हमें उल्लेख मिलता है।

Vaman Dvashashi vart katha:  बुधवार, 28 मार्च को वामन द्वादशी मनाई जा रही है। माना जाता है इस दिन भगवान विष्णु के वामन के रूप में पांचवां अवतार लिया था। माना जाता है मानव के रूप में भगवान विष्णु का यह पहला अवतार है। इस दिन भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए व्रत किया जाता है। आइए जानते हैं व्रत कथा

वामन द्वादशी कथा – श्रीमद्भागवत पुराण में वामन अवतार के बारे में हमें उल्लेख मिलता है। वामन अवतार कथा अनुसार एक बार देवों और दैत्यों में युद्ध हो गया। इस युद्ध में देवता, दैत्य बली से युद्ध हार गए। इसके बाद देवों के राजा इन्द्र भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। जिसके बाद भगवान विष्णु देवों की रक्षा करने का आश्वासन देते हैं और भगवान विष्णु वामन रुप में माता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने का वचन देते हैं। तब भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अदिति के गर्भ से विष्णु प्रकट हो अवतार लेते हैं तथा ब्राह्मण-ब्रह्मचारी का रूप धारण करते हैं।

महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं। वामन को महर्षि पुलह ने यज्ञोपवीत, अगस्त्य ने मृगचर्म, मरीचि ने पलाश दण्ड, आंगिरस ने वस्त्र, सूर्य ने छत्र, भृगु ने खड़ाऊं, गुरु देव जनेऊ तथा कमण्डल, अदिति ने कोपीन, सरस्वती ने रुद्राक्ष माला तथा कुबेर ने भिक्षा पात्र प्रदान किए जाने के बाद भगवान वामन पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं। राजा बली नर्मदा के उत्तर-तट पर अन्तिम अश्वमेध यज्ञ कर रहे होते हैं। इसके बाद वामन ने अपना भेष बदलकर राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंते हैं।

वामन रुप में श्री विष्णु ने भिक्षा में बली से तीन पग भूमि मांगते हैं। राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे देते हैं। वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग ओर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और अभी तीसरा पैर रखना शेष था। ऐसे मे राजा बलि अपना वचन निभाते हुए अपना सिर भगवान के आगे रख देते हैं और वामन भगवान के पैर रखते ही, राजा बलि परलोक पहुंच जाते हैं। बलि द्वारा वचन पालने करने से भगवान विष्णु प्रसन्न हो जाते हैं और बली को पाताल लोक का स्वामी बना देते हैं। इसके बाद वामन देवों को पुन: स्वर्ग सौंप देते हैं।

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