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हर संकट से मुक्ति का माह वैशाख

वैशाख माह पुण्यकारी है जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।

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वैशाख माह हिंदू पंचांग के संवत्सर का दूसरा माह है। विशाखा नक्षत्र के समय होने वाली पूर्णिमा के कारण इस माह का नाम वैशाख पड़ा है। वैशाख माह पुण्यकारी है जो भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। वैशाख माह का एक नाम माधव माह भी है। इस माह के देवता मधुसूदन यानी भगवान विष्णु हैं।

भगवान विष्णु को मधु दैत्य का वध करने के कारण मधुसूदन भी कहते हैं। विष्णु सहस्रनाम के अनुसार वैशाख मास में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से और उनके मधुसूदन नाम का स्मरण करने से हर संकट से मुक्ति मिलती है यानी दु:स्वप्ने स्मर गोविन्दं संकटे मधुसूदनम। वैशाख माह 17अप्रैल से शुरू हो गया है, जो 16 मई तक चलेगा। प्राचीन हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार वैशाख माह का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे पुण्य का माह भी माना जाता है।

इस माह में अन्न और जल दान करने को विशेष पुण्यदायी माना गया है। इस माह में जरुरतमंद लोगों को दान पुण्य करने से कई गुना शुभ फल मिलता है और दुखों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषाचार्य डा प्रदीप जोशी के अनुसार विशाखा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति और देवता इंद्र है। इस वजह से वैशाख माह के महीने में स्नान-दान, व्रत और पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति कई गुना मिलती है और ऐसा करने वाले का पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। इसलिए वैशाख माह को अत्यंत विशिष्ट माह माना गया है। इसलिए भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि सभी माहों में वैशाख माह सर्वोत्तम है। वैशाख माह में गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है।

स्कंद पुराण, पद्म पुराण और विष्णु पुराण में वैशाख को भगवान विष्णु का प्रिय महीना कहा गया है। पुराणों में कहा गया है कि वैशाख माह में भगवान विष्णु, भगवान शिव और भगवान सूर्य का जलाभिषेक करने मात्र से ही कई यज्ञ करने के बराबर शुभ पुण्य फल प्राप्त होता है और जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। हिंदू धर्म ग्रंथों में वैशाख माह में तुलसी और पीपल पूजा करने का भी अत्यंत महत्व बताया गया है। वैशाख माह में सूर्योदय से पूर्व हर दिन गंगा स्नान या अन्य नदियों में करने की परंपरा है और इस माह में तीर्थस्थान पर स्नान करने का भी विशेष महत्व है। जो तीर्थ में जाकर स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर स्नान करते समय भगवान विष्णु का स्मरण कर सकते हैं।

ऐसा करने वाले जातक को तीर्थ स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है और माह में पूजा के समय भगवान विष्णु को तुलसी जल चढ़ाने का विशेष महत्व है। साथ ही शिवलिंग और पीपल के पेड़ पर भी जल चढ़ा कर भगवान विष्णु का स्मरण करने से मोक्ष प्राप्त होने पर विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। वैशाख माह में जो कोई भी व्यक्ति प्यासे को पानी पिलाता है, उसे बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है। इस महीने में पंखों का दान करने का विशेष महत्व है। सत्तू दान करने को भी विशेष पुण्यदायी बताया गया है।

स्कन्दपुराण के अनुसार वैशाख माह के समान कोई माह नहीं है। सतयुग के समान कोई युग नहीं है। वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा नदी के समान कोई तीर्थ नहीं है। जबकि पाताल खंड में कहा गया है कि सम्पूर्ण स्त्रियों में पार्वती, तपने वालों में सूर्य, लाभों में आरोग्यलाभ, मनुष्यों में ब्राह्मण, पुण्यों में परोपकार, विद्याओं में वेद, मन्त्रों में प्रणव, ध्यानों में आत्मचिंतन, तपस्याओं में सत्य और स्वधर्म-पालन, शुद्धियों में आत्मशुद्धि, दानों में अभयदान तथा गुणों में लोभ का त्याग ही सबसे सर्वोत्तम माना गया है। उसी तरह सभी माहों में वैशाख माह अत्यंत श्रेष्ठ है।

महाभारत अनुशासन पर्व के अनुसार स्त्री या पुरुष इन्द्रिय संयम पूर्वक एक समय भोजन करके वैशाख माह में जीवन व्यतीत करते हैं तो वे जीवन में श्रेष्ठता को प्राप्त करते हैं। पद्म पुराण और पातालखंड के मुताबिक माधवमास यानी वैशाख माह में जो श्रद्धालु भक्तिपूर्वक दान, जप, हवन और स्नान शुभ कार्य करता है, उसका पुण्य कार्य अक्षय यानी कई सौ करोड़ गुना अधिक बढ़ जाता है। स्कन्दपुराण में कहा गया है कि वैशाख माह में तेल लगाना, दिन में सोना, कांस्यपात्र में भोजन करना, खाट पर सोना, निषिद्ध पदार्थ खाना, दो समय भोजन करना – इन सभी बातों का त्याग करना चाहिए।

शिव पुराण में कहा गया कि वैशाख माह में भूमि का दान करने का अत्यधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वैशाख माह में गृह प्रवेश करने से धन, वैभव, संतान एवं आरोग्य की प्राप्ति होती हैं। साथ ही देव प्रतिष्ठा के लिए माह अत्यंत शुभ माना गया है। जो जातक इस माह में पादुका दान करता है वह मृत्यु के भय से मुक्ति प्रदान करते हुए विष्णु लोक प्राप्त करता है। इस तरह पवित्र वैशाख माह दान पुण्य के अलावा त्याग और तपस्या का प्रतीक है।

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