हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है, यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन दान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन गौतम बुद्ध की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए दान का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में वैशाख पूर्णिमा पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान के साथ-साथ, अन्न, जल समेत कुछ चीजों का दान अवश्य करना चाहिए। इस साल वैशाख पूर्णिमा का पर्व 1 मई को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं वैशाख पूर्णिमा पर किन चीजों का दान करना चाहिए…

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जल से भरा घड़ा

 वैशाख पूर्णिमा पर जल का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में जल के दान करना और प्यासे को जल पिलाना पुण्यकारी बताया गया है। ऐसा करने से जातकों को अनजाने में किए पापों से मुक्ति मिल सकती है। जल दान को सभी दानों में श्रेष्ठ इसलिए माना गया है क्योंकि यह तुरंत राहत और पुण्य दोनों प्रदान करता है।

अन्न का दान

अन्न को “अन्न ब्रह्म” कहा गया है, इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना केवल दान नहीं बल्कि एक यज्ञ के समान माना जाता है। इससे व्यक्ति के घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और समृद्धि बनी रहने की मान्यता है।

वस्त्र का दान

वस्त्र दान का संबंध मानव की गरिमा और सम्मान से जुड़ा है। वैशाख की गर्मी में हल्के और सूती वस्त्र दान करने से व्यक्ति को मानसिक संतोष और सुख- समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।

गुड़ और चावल का दान

इस दिन गुड़ और चावल का दान करना शुभ माना जाता है। क्योंकि इन दोनों का दान ग्रह दोषों को शांत करने और जीवन में मधुरता लाने के लिए किया जाता है। यह दान विशेष रूप से पारिवारिक सुख और मानसिक शांति के लिए शुभ माना जाता है।

पंखा और छाता

वैशाख मास में तेज गर्मी से राहत देना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को छाता दान कर सकते हैं। छाता की छाया से भीषण गर्मी से राहत मिलती है। वहीं, आप अपने सामर्थ्य अनुसार पंखें का दान भी कर सकते हैं जो इस गर्मी में राहत देने का काम करता है।

पिंडदान और तर्पण करें

पद्म पुराण में वैशाख पूर्णिमा पर पिंडदान करने का खास महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा परिवार के सदस्यों पर बनी रहती है। साथ ही इस दिन पितरों के नाम गरीब लोगों को भोजन कराने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।

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