वैशाख मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन भक्त उपवास और रात्रि जागरण करते है। साथ ही शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित कर उनकी पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत कथा का श्रवण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस साल वैशाख मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल आज है। वहीं इस दिन ब्रह्रा और इन्द्र योग भी बन रहा है। साथ ही कई अन्य योग भी बन रहे हैं। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि व्रत कथा…

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वैशाख मासिक शिवरात्रि तिथि

फ्यूचर पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। वहीं चतुर्दशी तिथि का समापन 16 अप्रैल को रात 8 बजकर 12 मिनट पर होगा। निशिता काल के अनुसार, वैशाख माह में मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।

मासिक शिवरात्रि व्रत कथा

शिव पुराण के अनुसार, बहुत समय पहले एक चित्रभानु नाम का शिकारी था। वह जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का पेट पालता था। एक दिन वह एक साहूकार के कर्ज में फंस गया। साहूकार ने गुस्से में उसे बंदी बना लिया। उस दिन शिवरात्रि थी और साहूकार के घर भगवान शिव की पूजा हो रही थी। शिकारी ने पूजा की बातें और व्रत कथा ध्यान से सुनी।

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शाम को साहूकार ने शिकारी को बुलाया और कर्ज चुकाने की बात की। शिकारी ने अगले दिन कर्ज चुकाने का वादा किया और आजाद हो गया। वह भूखा-प्यासा जंगल में शिकार करने निकला। जब उसे कोई शिकार नहीं मिला, तो वह रात में एक बेल के पेड़ पर चढ़कर सोने की तैयारी करने लगा। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था, लेकिन शिकारी को इसका पता नहीं था।

रात के पहले पहर में एक गर्भवती हिरणी पानी पीने आई। शिकारी ने उसे मारने के लिए धनुष उठाया, लेकिन हिरणी ने कहा, “मैं गर्भवती हूं। मुझे बच्चे को जन्म देने दो, फिर मैं लौटकर आऊंगी।” शिकारी ने उसे छोड़ दिया। इस दौरान उसके धनुष से कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए। इस तरह अनजाने में उसने भगवान शिव का पहला पहर का पूजन कर लिया।

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