सनातन धर्म में कालाष्टमी व्रत का खास महत्व है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, भगवान काल भैरव को समर्पित है। हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखकर भगवान भैरव की आराधना करते हैं, जिससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। आइए जानते हैं कब वैशाख कालाष्टमी व्रत और पूजा का सुभ मुहूर्त…
कालाष्टमी 2026 की सही तिथि (Vaishakh Kalashtami Vrat)
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल 2026 को रात 09 बजकर 18 मिनट पर आरंभ हो रही है और 10 अप्रैल 2026 को रात 11 बजकर 14 मिनट पर खत्म होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार कालाष्टमी की पूजा निशा काल में की जाती है। इसलिए इस बार कालाष्टमी का व्रत 9 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
कालाष्टमी व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार कालाष्टमी की पूजा निशा काल में की जाती है, इसलिए 9 अप्रैल की रात पूजा करना सर्वोत्तम रहेगा।
कालाष्टमी व्रत की पूजा- विधि
कालाष्टमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और भगवान काल भैरव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके वहां काल भैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के दौरान सरसों का तेल, काले तिल, उड़द दाल, नीले या काले फूल, नारियल और मिठाई अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान भैरव को तेल चढ़ाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके बाद “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें और विधिपूर्वक आरती करें। पूजा के अंत में भगवान को भोग लगाकर प्रसाद बांटें और विशेष रूप से काले कुत्ते को रोटी या भोजन अवश्य खिलाएं, क्योंकि इसे भैरव बाबा का वाहन माना जाता है।
कालाष्टमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान काल भैरव को भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है, जो समय और मृत्यु के देवता हैं। कालाष्टमी के दिन उनकी पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से जो लोग शनि, राहु या केतु के दुष्प्रभाव से परेशान होते हैं, उनके लिए यह व्रत बेहद लाभकारी माना गया है। इस दिन कुत्तों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि उन्हें काल भैरव का वाहन माना जाता है।
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