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शाह विलायत की दरगाह पर हैं सैकड़ों जहरीले बिच्छू, लेकिन किसी को नहीं मारते डंक

अमरोहा में शाह विलायत आने वाले लोग दादा शाह विलायत को याद करते हैं तो वो उनकी बहन को याद करना नहीं भूलते हैं।

यहां पाए जाते हैं हजारो बिच्छु, माना जाता है दरगाह का रखवाला।

भारत में अनेकों संत, सूफी और देवीय पुरुषों हुए और आज उन्हें हजारों लोग पूजते हैं और उनके जन्मदिन लाखों लोग मनाते हैं। इन लोगों ने इस देश की धरती पर अनेकों चमत्कार किए। इसी तरह उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में हजरत शाह विलायत की दरगाह है जिसे दादा शाह विलायत के नाम से भी जाना जाता है। शाह विलायत को दादा शाह विलायत के नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि अमरोहा के लोग मानते हैं कि वो शाह विलायत की पीढ़ी हैं। हजरत शाह विलायत की दरगाह वहां मौजूद काले जहरीले बिच्छूओं के कारण प्रसिद्ध मानी जाती है।

शाह विलायत में मौजूद बिच्छूओं के लिए माना जाता है कि ये किसी को भी नहीं काटते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन्हें दरगाह के रखवाले माना जाता है। ये बिच्छू इतने जहरीले होते हैं कि उनके एक डंक से किसी की भी मृत्यु हो सकती है। इन बिच्छूओं के इस तरह रहने के पीछे शाह विलायत का चमत्कार माना जाता है। यहां आने वाला कोई भी भक्त इन बिच्छूओं को संभाल सकता है और यदि वो चाहे तो दादा शाह विलायत से आज्ञा लेकर उन्हें अपने साथ ले जा भी सकते हैं लेकिन इन बिच्छूओं को एक तय तिथि के दिन वापस लाकर यहां छोड़ना होता है। मान्यता है कि बिच्छू को तय तिथि के दिन यहां नहीं लाया जाए तो वो काट सकते हैं।

यहां आने के बाद जो लोग दादा शाह विलायत को याद करते हैं तो वो उनकी बहन को याद करना नहीं भूलते हैं। दादी बखोई की शादी एक राजकुमार के साथ हुई थी और माना जाता है कि उनका परिवार राजकुमार के परिवार जैसा नहीं था तो उन्होनें खुदा का नाम लिया और धरती में समा गईं लेकिन उनके बालों की चोटी धरती पर रह गई। यहां एक पेड़ भी मौजूद है जिसके लिए माना जाता है कि इस पेड़ की टहनियों पर अपराधियों को टांग दिया जाता है।

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