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Utpanna Ekadashi: उत्पन्ना एकादशी व्रत की विधि, नियम, मंत्र, कथा और आरती जानिए यहां

Utpanna Ekadashi 2019 Vrat Vidhi, Muhurat, Katha: सतयुग में मुर नाम का दैत्य उत्पन्न हुआ। वह बड़ा बलवान और भयानक था। उस प्रचंड दैत्य ने इंद्र, आदित्य, वसु, वायु, अग्नि आदि सभी देवताओं को पराजित करके भगा दिया। उत्पन्ना एकादशी के दिन श्री विष्णु ने इसी राक्षस का वध किया था।

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Ekadashi Vrat Vidhi, Katha, Aarti, Story: एकादशी व्रत की काफी महिमा बताई जाती है। हर महीने में 2 बार एकादशी पड़ती हैं। लेकिन मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का काफी महत्व माना जाता है। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु से एकादशी माता की उत्पत्ति हुई थी। एकादशी व्रतों का प्रारंभ भी इसी एकादशी से किया जाता है। माना ये भी जाता है कि भगवान विष्णु ने मुर नामक राक्षस का वध भी इसी दिन किया था। इस दिन व्रत रख लोग भगवान विष्णु और माता एकादशी की पूजा अर्चना करते हैं। यहां जानिए उत्पन्ना एकादशी की पूजा विधि, मुहूर्त और कथा…

उत्पन्ना एकादशी व्रत पूजा विधि (Ekadashi Vrat Vidhi):

– ये व्रत दो प्रकार से रखा जाता है एक तो निर्जला दूसरा फल ग्रहण करके।
– व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को अक्षत, दीपक, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से विधि विधान पूजा करें।
– एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें, उसकी जड़ में कच्चा दूध चढ़ाएं और घी का दीपक भी जलाएं।
– तुलसी का पूजन भी करें।
– पूजा के दौरान ॐ नमो भगवत वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहें।
– इस दिन भगवान विष्णु को फलों का और तुलसी के पत्ते मिलाकर खीर का भोग लगाएं।
– इस दिन ब्राह्मणों को भोजन भी कराना चाहिए।

उत्पन्ना एकादशी की कथा (Utpanna Ekadashi Ki Katha, Ekadashi Katha) :

सतयुग में मुर नाम का दैत्य उत्पन्न हुआ। वह बड़ा बलवान और भयानक था। उस प्रचंड दैत्य ने इंद्र, आदित्य, वसु, वायु, अग्नि आदि सभी देवताओं को पराजित करके भगा दिया। तब इंद्र सहित सभी देवताओं ने भयभीत होकर भगवान शिव से सारा वृत्तांत कहा और बोले हे कैलाशपति! मुर दैत्य से भयभीत होकर सब देवता मृत्यु लोक में फिर रहे हैं। तब भगवान शिव ने कहा, हे देवताओं! तीनों लोकों के स्वामी, भक्तों के दु:खों का नाश करने वाले भगवान विष्णु की शरण में जाओ।

वे ही तुम्हारे दु:खों को दूर कर सकते हैं। शिवजी के ऐसे वचन सुनकर सभी देवता क्षीरसागर में पहुंचे और कहा कि हे! मधुसूदन आप हमारी रक्षा करें। कहा कि हे भगवन, दैत्यों ने हमको जीतकर स्वर्ग से निकाल दिया है, आप उन दैत्यों से हम सबकी रक्षा करें। इंद्र के ऐसे वचन सुनकर भगवान विष्णु कहने लगे कि हे इंद्र, ऐसा मायावी दैत्य कौन है जिसने सब देवताओं को जीत लिया है, उसका नाम क्या है, उसमें कितना बल है और किसके आश्रय में है तथा उसका स्थान कहां है? यह सब मुझसे कहो। यह सुनकर इंद्र बोले, भगवन!

प्राचीन समय में एक नाड़ीजंघ नामक राक्षस था उसके महापराक्रमी और लोकविख्यात मुर नाम का एक पुत्र हुआ। उसकी चंद्रावती नाम की नगरी है। उसी ने सब देवताओं को स्वर्ग से निकालकर वहां अपना अधिकार जमा लिया है। उसने इंद्र, अग्नि, वरुण, यम, वायु, ईश, चंद्रमा, नैऋत आदि सबके स्थान पर अधिकार कर लिया है। सूर्य बनकर स्वयं ही प्रकाश करता है। स्वयं ही मेघ बन बैठा है और सबसे अजेय है। हे असुर निकंदन! उस दुष्ट को मारकर देवताओं को अजेय बनाइए।

यह वचन सुनकर भगवान ने कहा- हे देवताओं, मैं शीघ्र ही उसका संहार करूंगा। तुम चंद्रावती नगरी जाओ। इस प्रकार कहकर भगवान सहित सभी देवताओं ने चंद्रावती नगरी की ओर प्रस्थान किया। उस समय दैत्य मुर सेना सहित युद्ध भूमि में गरज रहा था। जब स्वयं भगवान रणभूमि में आए तो दैत्य उन पर भी अस्त्र, शस्त्र, आयुध लेकर दौड़े तो विष्णु ने उन्हें सर्प के समान अपने बाणों से बींध डाला। बहुत-से दैत्य मारे गए। केवल मुर बचा रहा। वह अविचल भाव से भगवान के साथ युद्ध करता रहा। भगवान जो-जो भी तीक्ष्ण बाण चलाते वह उसके लिए पुष्प सिद्ध होता। उसका शरीर छिन्न-भिन्न हो गर्या किंतु वह लगातार युद्ध करता रहा। दोनों के बीच मल्लयुद्ध भी हुआ। 10 हजार वर्ष तक उनका युद्ध चलता रहा लेकिन मुर नहीं हारा। थककर भगवान बद्रिकाश्रम चले गए। वहां हेमवती नामक सुंदर गुफा थी, उसमें विश्राम करने के लिए भगवान उसके अंदर प्रवेश कर गए। यह गुफा 12 योजन लंबी थी और उसका एक ही द्वार था। विष्णु भगवान वहां योगनिद्रा की गोद में सो गए।

मुर भी पीछे-पीछे आ गया और भगवान को सोया देखकर मारने को उद्यत हुआ, तभी भगवान के शरीर से उज्ज्वल, कांतिमय रूप वाली देवी प्रकट हुई। देवी ने राक्षस मुर को ललकारा, युद्ध किया और उसे तत्काल मौत के घाट उतार दिया। श्री हरि जब योगनिद्रा की गोद से उठे, तो सब बातों को जानकर उस देवी से कहा कि आपका जन्म एकादशी के दिन हुआ है, अत: आप उत्पन्ना एकादशी के नाम से पूजित होंगी। आपके भक्त वही होंगे, जो मेरे भक्त हैं।

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Highlights

    16:20 (IST)22 Nov 2019
    उत्‍पन्ना एकादशी तिथि: 

    एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 नवंबर 2019 को सुबह 09 बजकर 01 मिनट सेएकादशी तिथि समाप्‍त: 23 नवंबर 2019 को सुबह 06 बजकर 24 मिनट तकपारण का समय: 23 नवंबर 2019 को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट से दोपहर 03 बजकर 15 मिनट तक 

    16:01 (IST)22 Nov 2019
    ऐसे करें पूजा (Ekadashi Vrat Puja Vidhi) :

    दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का अभिषेक करें। दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करना होगा। इसके बाद उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं। पूजा में लाल गुलाब के फूल अर्पित करें। दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के समय देवी लक्ष्मी के चरणों में श्रीयंत्र रखें। इसके बाद 108 बार ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम: का जप करें। यह लक्ष्मी मंत्र है। पूजा के बाद श्रीयंत्र को तिजोरी में रख दें। शाम को समय पीपल के पेड़ के नीचे पंचमुखी दीया जलाएं। पूजा करते समय विष्णु भगवान और मां लक्ष्मी आर्थिक सम्पन्नता की प्रार्थना करें। अगर शुक्रवार के दिन यह व्रत पड़ रहा है तो मां लक्ष्मी के पास सात कौड़ियां रख दें। पूजन के बाद इन्हें उठाकर तिजोरी में रखें।

    15:00 (IST)22 Nov 2019
    संतान की कामना के लिए क्या करें?

    - इस दिन पति पत्नी संयुक्त रूप से श्री कृष्ण की उपासना करें।- उन्हें पीले फल, पीले फूल, तुलसी और पंचामृत चढाएं।- इसके बाद संतान गोपाल मन्त्र का जाप करें। "ॐ क्लीं देवकी सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणम गता"- पति पत्नी एक साथ फल और पंचामृत ग्रहण करें।

    14:41 (IST)22 Nov 2019
    उत्पन्ना एकादशी मुहूर्त और व्रत तोड़ने का समय (Utpanna Ekadashi Muhurat):

    23 नवम्बर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 01:12 पी एम से 03:19 पी एमपारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 11:44 ए एमएकादशी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 22, 2019 को 09:01 ए एम बजे सेएकादशी तिथि समाप्त - नवम्बर 23, 2019 को 06:24 ए एम बजे तक

    14:12 (IST)22 Nov 2019
    उत्पन्ना एकादशी पर बन रहा है ये संयोग:

    उत्पन्ना एकादशी में भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है और उनकी विशेष पूजा की जाती है. शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को पूजा जाता है. उत्पन्ना एकादशी शुक्रवार के दिन पड़ने से इस एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है. आज के दिन विष्णुजी के साथ ही देवी लक्ष्मी की पूजा करने से धन संबंधी कामों में आ रही परेशानियां खत्म हो जाती हैं.

    12:12 (IST)22 Nov 2019
    भगवान विष्णु की आरती (Vishnu Aarti, Om Jai Jagdish Hare)...

    ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

    09:54 (IST)22 Nov 2019
    उत्‍पन्ना एकादशी का महत्‍व :

    हिन्‍दू धर्म को मानने वालों में उत्‍पन्ना एकादशी का खास महत्‍व है. मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्‍य के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं. यही नहीं जो लोग एकादशी का व्रत करने के इच्‍छुक हैं उन्‍हें उत्‍पन्ना एकादशी से ही व्रत की शुरुआत करनी चाहिए. कहा जाता है कि उत्‍पन्ना एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु ने मुरमुरा नाम के असुर का वध किया था. श्री हरि विष्‍णु की जीत की खुशी में भी इस एकादशी को मनाया जाता है. इस एकादशी में भगवान विष्‍णु और माता एकादशी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है.

    09:32 (IST)22 Nov 2019
    गौण उत्पन्ना एकादशी मुहूर्त:

    गौण उत्पन्ना एकादशी शनिवार, नवम्बर 23, 2019 को24वाँ नवम्बर को, गौण एकादशी के लिए पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 06:51 ए एम से 08:58 ए एमपारण के दिन द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।एकादशी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 22, 2019 को 09:01 ए एम बजेएकादशी तिथि समाप्त - नवम्बर 23, 2019 को 06:24 ए एम बजे

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