दिव्य धाम की सीरीज में आज हम बात करने जा रहे हैं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित तुंगनाथ मंदिर के बारे में, जो भगवान शिव के सबसे पवित्र धामों में से एक माना जाता है। यह मंदिर पंच केदार में तीसरे स्थान पर आता है और समुद्र तल से लगभग 12,073 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और ट्रैकिंग का अद्भुत संगम होने के कारण हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। खासकर गर्मियों और मानसून के दौरान तुंगनाथ की वादियां स्वर्ग जैसी प्रतीत होती हैं।

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तुंगनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में निकले थे। भगवान शिव उनसे नाराज होकर विभिन्न स्थानों पर छिप गए। माना जाता है कि तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजाएं प्रकट हुई थीं। यही कारण है कि यह स्थान पंच केदार में विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहां दर्शन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

तुंगनाथ मंदिर का इतिहास

तुंगनाथ मंदिर का निर्माण लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था। यह मंदिर पत्थरों से बना हुआ है। साथ ही सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की पूजा मक्कूमठ में की जाती है।

तुंगनाथ मंदिर की खासियत

तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर माना जाता है। यहां से चौखंबा, नंदा देवी और केदारनाथ पर्वत श्रृंखलाओं दिखाई देती हैं। मंदिर के पास स्थित चंद्रशिला चोटी ट्रैकर्स के बीच काफी लोकप्रिय है। सूर्योदय के समय यहां का नजारा बेहद मनमोहक होता है।

तुंगनाथ मंदिर कैसे पहुंचे?

तुंगनाथ पहुंचने के लिए सबसे पहले उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के चोपता पहुंचना होता है। चोपता से तुंगनाथ मंदिर तक लगभग 3.5 किलोमीटर का ट्रेक है, जो आसान और बेहद सुंदर माना जाता है। साथ ही दिल्ली, ऋषिकेश और हरिद्वार से चोपता के लिए बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। वहीं सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा चोपता पहुंचा जा सकता है। वहीं सबसे पास एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से टैक्सी के जरिए चोपता और फिर ट्रेक करके तुंगनाथ पहुंच सकते हैं।

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डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।