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प्रसंग: लक्ष्मी से विवाहित होते हुए भगवान विष्णु ने क्‍यों किया तुलसी से विवाह

Tulsi Vivah 2017 Katha, Vidhi: भगवान विष्णु क्यों जाते हैं चार माह की नींद में, क्या कारण है कि उन्हें सहना पड़ा स्त्री वियोग।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि भगवान विष्णु की नींद अस्थिर थी। कई बार वो महीनों तक जागते थे और कई बार महीनों तक नींद की अवस्था में रहते थे। इसका फायदा असुर लोगों को परेशान करने में उठाते थे। इसी तरह एक बार जालंधर नामक राक्षस ने सभी को परेशान करा हुआ था। उसने धरती पर से सभी वेदों को चुरा लिया जिससे लोग अज्ञानी रहने लगे। इस बात से परेशान होकर सभी देव और श्रृषि भगवान विष्णु के पास गए और उसके बारे में बताया। जालंधर राक्षस बहुत ही वीर था और उसकी वीरता का रहस्य उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म था। उसी के कारण से वो इतना वीर था।

सभी देवों ने अपनी रक्षा की गुहार भगवान विष्णु से लगाई। ये सब बात सुनने के बाद भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म नष्ट करने का निश्चय किया। दूसरी तरफ राक्षस जालंधर जो देवताओं से युद्ध कर रहा था वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया। जब ये बात वृंदा को पता लगी तो उसने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को श्राप दिया और कहा कि जिस प्रकार तुमने मेरे साथ छल करके मेरे पति को मुझसे अलग किया उसी प्रकार तुम भी अपनी स्त्री का छलपूर्वक हरण होने पर स्त्री वियोग सहने के लिए मृत्यु लोक में जन्म लोगे। ये सब बात कहने के बाद वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई। जिस जगह पर वृंदा सती हुई उस जगह पर तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ।

इसके साथ ही एक ओर मान्यता प्रचलित है कि वृंदा ने विष्णु को ये श्राप भी दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है इसलिए तुम पत्थर के बनोगे। इसके बाद विष्णु ने कहा कि हे वृंदा ये तुम्हारे सतीत्व का ही फल है कि तुम तुलसी बनकर मेरे ही साथ हमेशा रहोगी। जो भी मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा वो परम् धाम को प्राप्त होगा। बिना तुलसी के शालीग्राम या विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाएगी। इसलिए ऐसी मान्यता है कि शालीग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के विवाह का प्रतीकात्मक विवाह है।

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