Tulsi Vivah 2017 Date, Devutthana Ekadashi 2017 Puja Vidhi and Significance in Hindi: Know why we celebrate the Ekadashi and story behind this Pooja - देवउठनी एकादशी 2017: जानिए क्या है पौराणिक कथानुसार देवों के उठने का महत्व और क्यों मनाई जाती है ये एकादशी - Jansatta
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देवउठनी एकादशी 2017: जानिए क्या है पौराणिक कथानुसार देवों के उठने का महत्व और क्यों मनाई जाती है ये एकादशी

Tulsi Vivah 2017 Date, Devutthana Ekadashi 2017: आषाढ़ एकादशी के बाद भगवान विष्णु समेत सभी देवता क्षीर सागर में जाकर सो जाते हैं और इसके बाद विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।

Devutthana Ekadashi 2017: क्या है इस एकादशी का महत्व, क्यों भगवान विष्णु चार माह के लिए सो जाते हैं।

देव उठनी एकादशी जिसे प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। इसे पापमुक्त करने वाली एकादशी भी माना जाता है। वैसे तो सभी एकादशी पापमुक्त करने वाली मानी जाती हैं, लेकिन इसका महत्व अधिक है। इसके लिए मान्यता है कि जितना पुण्य राजसूय यज्ञ करने से होता है उससे अधिक देवउठनी एकादशी के दिन होता है। इस दिन से चार माह पूर्व देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। इसके लिए माना जाता है कि भगवान विष्णु समेत सभी देवता क्षीर सागर में जाकर सो जाते हैं। इसलिए इन दिनों पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। किसी तरह का शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, नामकरण संस्कार आदि नहीं किए जाते हैं।

देवउठनी एकादशी को प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। ये कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन आती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस दिन के धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्री हरि राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ लौटे थे। इसके साथ इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है। इस वर्ष ये शुभ दिन 31 अक्टूबर 2017 यानि मंगलवार को है। इस दिन दिवाली की तरह लोग दीपक जलाते हैं और सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न करते हैं। जिससे उनके घर में हमेशा कृपा बनी रहे और उनके घर इसी तरह दीए की रौशनी से रौनक रहें।

एक पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान श्रीविष्णु ने भाद्रपद महीने की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को लम्बे युद्ध के बाद समाप्त किया था और थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गए थे और चार महीने बाद फिर जब वे उठे तो वह दिन देवोत्थनी एकादशी कहलाया। इस दिन व्रत करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और मृत्युोपरांत विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इसी के साथ इस एकादशी से पहले गंगास्नान करना शुभ माना जाता है।

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