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Ramadan 2019 Fourth Roza: आज रमज़ान का पहला ज़ुमा, अपने दोस्तों को इन शानदार मैसेज से दें मुबारकबाद

Ramadan Mubarak 2019 Fourth Roza: माह-ए-मुकद्दस रमज़ान का आज चौथा रोज़ा होने के साथ-साथ पहला ज़ुमा भी है। इस्लामिक जानकार कहते हैं कि रमज़ान-उल-मुबारक इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है।

Ramadan Mubarak 2019

आजाद खान

Ramadan 2019 Fourth Roza: माह-ए-मुकद्दस रमज़ान का आज चौथा रोज़ा होने के साथ-साथ पहला ज़ुमा भी है। इस दौरान मस्जिदों में रोजेदारों का हुजूम उमड़ेगा, जिसके लिए खासी तैयारियां की गई हैं। इस्लामिक जानकार कहते हैं कि रमज़ान-उल-मुबारक इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना है। यह रहमतों और बरकतों वाला महीना है, जिसमें अल्लाह शैतान को कैद कर देता है, जिससे वह लोगों की इबादत में खलल न डाल सके। इस माह-ए-मुबारक में अल्लाह की रहमत खुलकर अपने बंदों पर बरसती है। रमज़ान-उल-मुबारक में हर नेकी का सवाब 70 गुना हो जाता है। हर नवाफिल का सवाब सुन्नतों के बराबर और हर सुन्नत का सवाब फर्ज के बराबर हो जाता है। इस तरह सभी फर्ज का सवाब भी 70 गुना हो जाता है।

रसूल सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम ने फरमाया है कि अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरों में बांटा है। पहला अशरा खुदा की रहमत वाला है, जो एक से 10 रमज़ान में आता है। यानी पहले अशरे में खुदा की रहमत अपने बंदों पर नाजिल होती है।

आप भी इन तस्वीरों और शायरी से अपने चाहने वालों को रमज़ान के पहले जुमे की मुबारकबाद दे सकते हैं।

यूं बरसे आज तुझ पर लुत्फ-ओ-करम की बारिश,
कि बरगाह-ए-इलाही से तेरी कोई दुआ रद न हो।
किसी से नेकी करते वक्त बदले की उम्मीद न रखो,
क्योंकि नेकी का सिला अल्लाह देते हैं, इंसान नहीं।
ज़ुमा मुबारक

किसी का ईमान कभी रोशन ना होता,
आगोश में मुसलमान के अगर कुरआन ना होता,
दुनिया ना समझ पाती कभी भूख और प्यास की कीमत,
अगर 12 महीनों मे 1 रमजान ना होता।
ज़ुमा मुबारक

तू अगर मुझे नवाजता है तो यह तेरा करम है,
या रब वरना तेरी रहमतों के काबिल मेरी बंदगी नहीं।
ज़ुमा मुबारक

हम चांद पर कदम रखने वालों को क्यों मानें
हम तो उनकी उम्मत में से हैं,
जिन्होंने जमीं पर रखकर,
चांद के 2 टुकड़े कर दिए।
ज़ुमा मुबारक

फिर नया दिन प्यारी सुबह बहुत सी उम्मीदें अल्लाह,
खैर की खबर और मुहब्बत का उजाला रखना।
ज़ुमा मुबारक

रमजान की आमद है रहमतें बरसाने वाला महीना
आओ आज सब खताओं की माफ़ी मांग लें
दर-ए-तौबा खुला है इस महीने में…
ज़ुमा मुबारक

तुम इबादत के लम्हों में मेरा एक काम करना,
हर सहरी से पहले हर नमाज़ के बाद हर इफ्तार से पहले,
हर रोज़े के बाद सिर्फ अपनी दुआ के कुछ अलफ़ाज मेरे नाम करना।
ज़ुमा मुबारक

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