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तिरुपति बालाजी: ये है भारत का सबसे अमीर मंदिर, विराजते हैं भगवान विष्णु

दक्षिण भारत का प्रख्यात मंदिर तिरुपति बालाजी वास्तुकला और शिल्प कला का अद्भूत उदाहरण है।

भारत का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है तिरुपति बालाजी।

विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बाला जी का मंदिर, भारत में आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले तिरूमाला पहाड़ियों की सातवीं चोटी पर स्थापित है। इस चोटी को वेंकटाद्री के नाम से भी जाना जाता है। यह शेषचलम पहाड़ियों की एक किस्म है, यह 7 पहाड़ियों की एक श्रृंखला है जो अडिशैया के 7 प्रमुखों (भगवान विष्णु के नाग प्रकट) को दर्शाती है। यह मंदिर कई शताब्दी पहले बनाया गया था। मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला एवं शिल्पकला का अद्भूत उदाहरण है। कहते हैं कि यह मंदिर पांचवी शताब्दी से भी पहले का है। आज भी तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी दो कहानी सबसे ज्यादा प्रख्यात हैं, वेंकटचल महात्म्य और वरहा पुराण इन दो कहानियों से पता चलता है कि तिरुमला की भूमि भगवान विष्णु के अवतार द्वारा व्याप्त थी। दक्षिण भारत का प्रख्यात मंदिर वास्तुकला और शिल्प कला का अद्भूत उदाहरण है। इस मंदिर की स्थापना और इतिहास को लेकर कई मतभेद हैं लेकिन माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 5वीं शताब्दी में हुई थी।

इस मंदिर के लिए एक मान्यता प्रचलित है कि प्रभु वेंकटेश्वर को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। माना जाता है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक तलाब के किनारे निवास किया था। ये तलाब तिरुमाला के पास स्थित है। तिरुमाला- तिरुपति के मंदिर को चारो ओर से घेरे हुई चारों और पहाडियां हैं। ये सभी शेषनाग के आकार में हैं इस कारण से इन्हें सप्तगिरि भी कहा जाता है। इस मंदिर की स्थापना को लेकर हमेशा से मतभेद रहा है लेकिन 15 वीं शताब्दी के बाद से इसकी ख्याति दूर-दूर के स्थानों तक फैलने लगी। माना जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस मंदिर की प्रख्याति यहां आए भक्तों की लंबी लाइन देखकर लगाया जा सकता है। इसके साथ ही इस जगह का वातावरण भी लोगों के मन में भक्ति भाव पैदा कर देता है।

इस मंदिर में हर रोज लगभग 50 हजार भक्त भगवान तिरुपति के दर्शन करने आते हैं। किसी विशेष महोत्सव या ब्रह्मोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 5 लाख तक भी पहुंच जाती है। भारत में अनेको प्रसिद्ध मंदिर हैं लेकिन तिरुपति बालाजी भारत का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है। इस मंदिर में की कुलसंपत्ति लगभग 50 हजार करोड़ रुपए है। इस मंदिर में रोजाना लाखों रुपए का चढ़ावा आता है। इसके साथ ही यहां मन्नत पूरी होने पर लोग अपने बाल दान करने आते हैं, उसके कारण से एक बड़ी धनराशि इस मंदिर को प्राप्त होती है।

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