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Guruwar Vrat Vidhi: जानिए कब और कैसे शुरू करें गुरुवार व्रत, क्या हैं इसके फायदे

Thursday Vrat Vidhi, Katha, Niyma, Aarti: पूष या पौष के महीने को छोड़कर आप कभी भी ये व्रत शुरू कर सकते हैं। पौष का महीना अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार दिसम्बर या जनवरी में आता है। बाकी इस व्रत को किसी भी माह के शुक्लपक्ष के पहले गुरुवार से शुरू कर सकते हैं।

Thursday Vrat: गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा की जाती है।

Thursday Vrat Method: हिंदू धर्म में व्रत रखने का एक खास महत्व माना जाता है। वैसे तो कहा जाता है कि उपवास रखना शरीर के लिए भी काफी लाभकारी होता है। लेकिन आम तौर पर लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं। हफ्ते में आने वाले हर एक व्रत का अपना अलग महत्व माना जाता है। जिसमें बृहस्पतिवार के व्रत की काफी मान्यता है। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि गुरुवार के व्रत करने से विवाह में आ रही अड़चन दूर हो जाती हैं और घर में सुख समृद्धि भी बनी रहती है।

कितने गुरुवार रखें व्रत? 16 गुरुवार तक लगातार व्रत करने चाहिए और 17वें गुरुवार को उद्यापन करना चाहिए। पुरुष यह व्रत लगातार 16 गुरुवार कर सकते हैं परन्तु महिलाओं या लड़कियों को यह व्रत तभी करना चाहिए जब वो पूजा कर सकती हैं, मुश्किल दिनों में यह व्रत नही करना चाहिए।

कब से करें शुरू? पूष या पौष के महीने को छोड़कर आप कभी भी ये व्रत शुरू कर सकते हैं। पौष का महीना अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार दिसम्बर या जनवरी में आता है। बाकी इस व्रत को किसी भी माह के शुक्लपक्ष के पहले गुरुवार से शुरू कर सकते हैं। किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए शुक्ल पक्ष काफी शुभ माना जाता है।

Thursday Fast Katha: बृहस्पतिवार व्रत की कथा

बृहस्पतिवार व्रत की विधि (Thursday Vrat Vidhi):

इस व्रत को रखने के लिए चने की दाल, गुड़, हल्दी, थोड़े से केले, एक उपला हवन इत्यादि सामग्रियों की जरूरत पड़ती है। इसी के साथ भगवान विष्णु की फोटो भी होनी चाहिए। व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नान कर घर के मंदिर में जाएं और भगवान को साफ कर उन्हें चावल एवं पीले फूल अर्पित करें। अब 16 गुरुवार व्रत करने का संकल्प करिए और भगवान को छोटा पीला वस्त्र भी अर्पण करिए। आप इस व्रत की विधि केले के पेड़ के सामने भी कर सकते हैं। एक लोटे में जल रख लीजिये उसमे थोड़ी हल्दी डालकर विष्णु भगवान या केले के पेड़ की जड़ को स्नान कराइए। अब उस लोटे में गुड़ एवं चने की दाल डाल के रख लीजिये।

अगर आप केले के पेड़ की पूजा कर रहें हैं तो उसी पे जल का ये मिश्रण चढ़ा दीजिये और अगर विष्णु जी की पूजा कर रहे हैं तो इस जल को पूजा के बाद पौधों में डाल दीजिए। अब भगवान को हल्दी या चंदन से तिलक करिए। पीला चावल जरुर चढ़ाएं, घी का दीपक जलाकर कथा पढ़िए। कथा के बाद हवन की तैयारी करें। इसके लिए एक उपला लें उसे गर्म करके उस पर घी डालें और जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हो जाये उसमे हवन सामग्री की आहुति दें। साथ में गुड़ एवं चने भी डालें। 5, 7 या 11 बार ॐ गुं गुरुवे नमः मन्त्र का जाप करें और हवन पूरा करने के बाद भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की आरती उतारें। अंत में क्षमा प्रार्थना करना न भूलें।

बृहस्पति देव की आरती पढ़ें यहां

विष्णु जी की आरती पढें यहां

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