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स्वामी अमोघ लीला प्रभु के इस प्रवचन से ऐसे पा सकते हैं तनाव से मुक्ति

तीसरी बात जो प्रभु स्वामी अमोघलीला जी ने बताई वह यह है कि हमें यह सोचना चाहिए कि कहीं न कहीं हम भगवत गीता की बातों को भूल रहे हैं। भगवान ने भागवत गीता में कहा यह जीवन की निर्देशिका है।

Author नई दिल्ली | March 12, 2019 1:11 PM
सांकेतिक तस्वीर।

आज हर व्यक्ति तनाव के बीच अपना जीवन जी रहा है। एक छोटी सी जिंदगी व्यक्ति सुख चैन से जी सकता है लेकिन फिर भी हर दूसरा व्यक्ति तनाव ग्रस्त दिखाई दे रहा है। तनाव एक बहुत भयंकर बीमारी है ये समय के साथ बढती चली जाती है और अंत में एक भयानक पागलपन या मौत का कारण बन मनुष्य को खा जाती है। इसकी कोई दवा नहीं न ही कोई इलाज है। इन बस के बीच आज हम आपको इस्कॉन मंदिर के प्रभु स्वामी अमोघलीला जी द्वारा जीवन में तनाव से मुक्ति पाने के लिए कुछ उपाय बताए हैं। उनका कहना है यदि मनुष्य अपने जीवन से तनाव हटाना चाहता है तो वह इन उपायों को अपनाएं। आगे जानते हैं स्वामी अमोघलीला ने तनाव से मुक्ति पाने के लिए क्या कहा है।

स्वामी अमोघलीला प्रभु कहते हैं कि अगर तनाव हो भी जाए तो क्या करना चाहिए। वे आगे कहते हैं कि इसके लिए पहला तरीका तो ये है कि हमें एक धार्मिक मनुष्य के पास जाना चाहिए। एक कृष्ण चेतन भक्त के पास जाकर अपना दिल खोलना चाहिए और अपने दिल का हाल बताना चाहिए कि प्रभु जी आजकल न ये चल रहा है। कृपया मार्गदर्शन करें। एक एक कृष्ण चेतन भक्त के पास जाकर के अपना हृदय शेयर करना अच्छा है। दूसरी चीज ये है कि हमें खुद को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि मैं कहीं न कहीं मानसिक रूप से फंस रहा हूं। क्योंकि दिक्कतें बाहर नहीं हैं ये तो मेरे मन के अंदर है।

अब बात है कि हमारा मन कहां फंस रहा है शायद मुझे सम्मान नहीं मिला इस वजह से आज हम बहुत दुखी हैं या किसी दूसरे की सफलता देखकर जो मेरे मन में जो ईर्ष्या चल रही है उस ईर्ष्या से आज हम दुखी हैं। ये मेरा मन कहां फंस रहा इसे आत्मनिरक्षण करना हर मनुष्य के लिए बहुत अनिवार्य है। साथ ही तीसरी बात जो प्रभु स्वामी अमोघलीला जी ने बताई वह यह है कि हमें यह सोचना चाहिए कि कहीं न कहीं हम भगवत गीता की बातों को भूल रहे हैं। भगवान ने भागवत गीता में कहा यह जीवन की निर्देशिका है। कहीं न कहीं हम इस भगवत गीता के निर्देश को भूल रहे हैं। इसके लिए जरूरी है भगवत गीता के पढ़ना और देखना कि शास्त्रों को कहां नकार रहे हैं, इस वजह से मैं तनाव में हूं। भगवान ने गीता बोली ताकि हम लोग खुश रहें। अगर दुख आया है तो कहीं न कहीं भगवत गीता की बातों को नकारा गया है।

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