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शास्त्रों में पैर छूने के बताए गए हैं ये लाभ, जानिए कब होगा और किसका करना चाहिए चरण स्पर्श

ऐसी मान्यता है कि पैर छूने से मन और मस्तिष्क की सारी नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाती हैं। इससे व्यक्ति के अंदर सकारात्मक विचारों का प्रवाह होता है।

Author नई दिल्ली | June 20, 2018 1:57 PM
सांकेतिक तस्वीर।

हम सबको बचपन से ही दूसरों का पैर छूना सिखाया जाने लगता है। ऐसा कहा जाता है कि पैर छूने से हमारी पुरानी गलतियां माफ हो जाती हैं और हमें आशीर्वाद मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में पैर छूने को लेकर क्या कुछ कहा गया है? और क्या आपको यह पता है कि हमें कब और किसका पैर छूना चाहिए? यदि नहीं तो आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति के शरीर के चारों ओर एक आभामंडल पाया जाता है। जब एक व्यक्ति का आभामंडल दूसरे व्यक्ति के आभामंडल से टकराता है तो ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। बताते हैं कि पैर छूने से काफी तेजी के साथ आभामंडल का स्थानांतरण होता है।

ऐसी मान्यता है कि पैर छूने से मन और मस्तिष्क की सारी नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त हो जाती हैं। इससे व्यक्ति के अंदर सकारात्मक विचारों का प्रवाह होता है। व्यक्ति खुद को प्रसन्न और ऊर्जावान महसूस करने लगता है। बताते हैं कि विशिष्ट व्यक्ति का पैर छूने से चेहरे पर लालिमा और आत्मविश्वास आता है। इससे व्यक्ति को जीवन में काम करने के लिए नई ऊर्जा मिलती है। व्यक्ति का आत्मविश्वास उसे अपने संघर्ष पथ पर टिके रहने की ताकत देता  है।

ऐसा भी बताया जाता है कि निम्न आभामंडल यानी खुद से नीचे वालों का पैर छूने से सकारात्मकता कम आती है। बता दें कि हमारे सिर को उत्तरी ध्रुव और पैर को दक्षिणी ध्रुव माना जाता है। कहा जाता है कि चरण स्पर्श हमेशा अपने दोनों हाथों को जोड़कर व्यक्ति के पैर के दोनों अंगूठों को छूना चाहिए। इससे काफी तेजी के साथ सकारात्मक ऊर्जा स्थानांतरित होती है। मालूम हो कि पैर छूने के लिए सबसे उचित सुबह का समय बताया गया है। इससे कुंडली में राहु, केतु और सूर्य के ग्रह दोष से बचने की मान्यता है।

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