ताज़ा खबर
 

सावन में इन मंदिरों में दर्शन करने से निश्चित मिलेगा लाभ

भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के उज्जैन में सलिला शिप्रा नदी के पास स्थित है भगवान शिव का 'महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग'। कहा जाता है कि महाकालेश्वर में दर्शन करने वाले भक्तों का काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसे पृथ्वी का एकमात्र मान्य शिवलिंग भी माना जाता है।

Author नई दिल्ली | July 17, 2019 9:54 AM
सावन में इन मंदिरों में दर्शन करने से निश्चित मिलेगा लाभ

हिंदू पंचांग की शुरुआत होती है चैत्र के महीने से जिसमें पाँचवा महीना सावन का महीना होता है। ज्योतिषियों के अनुसार इस महीने की पूर्णिमा को आसमान में श्रवण नक्षत्र का योग बनता है। यही कारण है कि इस महीने को श्रावण भी कहा जाता है। सावन को शिव जी का पसंदीदा महीना कहा जाता है और इस महीने में महिलाएं व युवतियां शिव जी की अराधना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि सावन में व्रत रखने से खुश होकर भोलेनाथ लड़कियों को मनचाहा वर प्रदान करते हैं। वैसे तो हर गली में ही लोगों मंदिर मिल जाते हैं पर आज हम आपको बताएंगे देश के उन शिव मंदिरों के बारे में जो अपनी पौराणिक वजहों से खास हैं।

1. केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड: उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के समीप स्थित केदारनाथ धाम तीनों तरफ से बड़े-बड़े पहाड़ों से घिरा हुआ है और श्रद्धालुओं की आस्था का चिन्ह है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में जीतने के बाद पांडव भाइयों की हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए वे भगवान शिव का आशीर्वाद लेने गए। पर भगवान क्रोधित हो केदार में छुपकर बैल का रूप में अन्य पशुओं संग जा मिले। भनक लगने पर पांडवों ने कोशिश कर भोलेनाथ को मना लिया। तभी से भगवान शिव बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते हैं।

2. सोमनाथ मंदिर, गुजरात: लूट और दोबारा निर्माण के वजह से गुजरात का सोमनाथ मंदिर हमेशा से विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस विशाल मंदिर को भगवान शिव के बारहवें ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। यहां तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध, नारायण बलि आदि कर्म भी किए जाते हैं। इसके अलावा यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है और यहां पर त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है।

3. अमरनाथ धाम, जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर से करीब 145 किलोमीटर दूर स्थित अमरनाथ धाम के बारे में कहा जाता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव स्वयं अमरनाथ गुफा में विराजमान हैं। मरनाथ गुफा के अंदर हिम शिवलिंग के दर्शन मात्र से ऐसी मान्यता है कि लोगों को 23 पवित्र तीर्थस्थानों के दर्शन जितना पुण्य मिलता है। यहीं पर स्थित पार्वती पीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है जहां भगवती सती का कंठ भाग गिरा था।

4. महाकालेश्वर, मध्यप्रदेश: भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश के उज्जैन में सलिला शिप्रा नदी के पास स्थित है भगवान शिव का ‘महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग’। कहा जाता है कि महाकालेश्वर में दर्शन करने वाले भक्तों का काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसे पृथ्वी का एकमात्र मान्य शिवलिंग भी माना जाता है। यह मंदिर एक बड़े परिसर में स्थित है, जहां अन्य देवी-देवताओं के भी छोटे-बड़े मंदिर हैं। यहां भगवान महाकाल की भस्म आरती, नागचंद्रेश्वर मंदिर, भगवान महाकाल की शाही सवारी मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

5. भीमाशंकर मंदिर, महाराष्ट्र: 12 ज्योतिर्लिंगों में से छठे नंबर पर है महाराष्ट्र का भीमाशंकर मंदिर। यह मंदिर पुणे से लगभग 110 किमी दूर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। इसके दर्शन से व्यक्ति को सारे दुख से समाप्त हो जाते हैं। इस मंदिर के पास कमलजा मंदिर है जहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। मंदिर के पीछे दो कुंड भी हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस मंदिर में पर रोज प्रातः काल में सूर्योदय के बाद दर्शन करता है, उसके पिछले जन्मों के पाप तक दूर हो जाते हैं और स्वर्ग के रास्ते खुल जाते हैं।

6. काशी विश्वनाथ, उत्तर प्रदेश: उत्तरप्रदेश की प्राचीन धार्मिक नगरी वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर विश्वप्रसिद्ध है। भगवान शिव को यहां बाबा विश्वनाथ के नाम से पुकारा जाता है। ऐसी मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार खुल जाता है और भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। यहां आने मात्र से ही भक्तों की हर तकलीफ दूर हो जाती है और मन-मस्तिष्क को असीम शांति मिलती है।

7. वैद्यनाथ धाम, झारखंड: झारखंड के देवघर में स्थित बैद्यनाथ धाम (बाबाधाम) बहुत महत्त्वपूर्ण है और यहां के कामना लिंग को सर्वाधिक महिमामंडित कहा जाता है। इसके शिखर पर त्रिशूल के बजाय ‘पंचशूल’ होता है जिसे सुरक्षा कवच माना जाता है और यही बात इस मंदिर को खास बनाती है। वैसे तो साल भर यहां भक्तों की भीड़ रहती है लेकिन सावन के दौरान पूरा मंदिर केसरिया पहने शिवभक्तों से रंग जाता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App