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जीवन जगत: जिंदगी को दोष न दें

जब हमें अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त नहीं होती तो जिंदगी अंधकारमय लगने लगती है

jivan हमें परिश्रम और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

दरअसल जिंदगी के सफर में ऐसे अनेक मौके आते हैं, जब हमें कई स्तरों पर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। मानसिक तनाव की इस स्थिति से उबरने पर हमें एक साथ कई रास्ते दिखाई देने लगते हैं। मानसिक तनाव कम होने पर ही हमारा विचार-विमर्श किसी उचित फैसले तक पहुंच पाता है। उचित फैसला लेने के बाद हमें दूसरे रास्ते पर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।

हमें ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएंगे जबकि लोग एक रास्ते पर चलकर सफल नहीं हो पाए लेकिन दूसरे रास्ते पर चलकर सफलता की एक नई कहानी लिख दी। हमें ऐसे भी अनेक उदाहरण मिलेंगे जबकि लोग ताउम्र रास्ते बदलते रहे और उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली।

इसलिए हमें किसी भी कीमत पर निराश नहीं होना है। सफर में हमें यह पता नहीं रहता कि इस रास्ते पर चलकर हम सफल होंगे या नहीं। जरूरत इस बात की है कि हम पूरी ईमानदारी के साथ अपने रास्ते पर आगे बढ़ें। आगे बढ़ने के जुनून और हौसले को हमें किसी भी हाल में कम नहीं होने देना है।

अगर आज का युवा लगातार सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है तो इसके पीछे उसकी इच्छाशक्ति ही है। जब हम अपनी इच्छा को पूर्ण करने के लिए जी-जान से जुटते हैं तो कब वह पूरी हो जाती है, पता भी नहीं चलता। लेकिन कभी-कभी हमारे जीवन की नैया एक ऐसे भंवर में फंस जाती है कि हम चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते।

कभी ऐसा भी होता है कि समय या फिर परिस्थितियों का एक तेज बहाव आता है और हमारे जीवन की नैया उस बहाव में बहने लगती है। यह सब इतनी तेजी से होता है कि हम कुछ सोच-समझ ही नहीं पाते है। ऐसे में हम अपनी जिंदगी को कोसने लगते हैं। ऐसे सफर के लिए अपनी जिंदगी को दोष देना उचित नहीं है? हां, कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें सामने भंवर दिखाई देता है और हम जानबूझकर अपने जीवन की नैया उस भंवर में फंसा देते हैं।

हालांकि उस समय हमारा मन उस भंवर की तरफ जाने की इजाजत नहीं देता लेकिन शायद किसी स्वार्थ के वशीभूत होकर ही ऐसा होता है। कई बार हम जल्दी और तेज चलने के चक्कर में अपने जीवन की नैया तेज बहाव की ओर ले जाते हैं लेकिन हमारी तैयारी उस तेज बहाव के अनुरूप नहीं होती है। ऐसे में हमारी नैया तेज बहाव में बह जाती है और हमारे हाथ कुछ नहीं लगता है।

इसलिए हमें कच्चे लालच के चक्कर में न फंसकर कुछ ठोस बिन्दुओं पर कार्य करने की कोशिश करनी होगी। अगर हमारे जीवन की नैया किसी कारणवश भंवर में फंस गई है तो अपनी जिंदगी को दोष देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। ऐसी परिस्थिति में समझदारी तो इसी में है कि हम भंवर से बाहर निकलने के उपायों पर विचार करें। लगातार अपनी जिंदगी को दोष देने का अर्थ है कि हम वास्तविकता से दूर भाग रहे हैं। अपनी जिंदगी को दोष देकर हम थोड़े समय के लिए तो अपने आपको संतुष्ट कर सकते हैं लेकिन लम्बे समय तक नहीं। वास्तविकता से दूर भागना किसी समस्या का समाधान भी नहीं है।

दरअसल जिंदगी अपने तरीके से चलती है। हमें परिश्रम और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। लगातार प्रयास करने से सफलता मिलने की सम्भावना बढ़ जाती है। यह जरूरी नहीं है कि हमें जिंदगी में सब कुछ हासिल हो जाए लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि हमें जिंदगी में कुछ हासिल नहीं होगा।

अगर हमें बहुत जल्दी सब कुछ हासिल हो जाएगा तो हम क्या पाने के लिए जिएंगे? इसलिए जिंदगी में हमेशा कुछ ऐसा होना चाहिए जिसे हम हासिल करने की कोशिश करते रहें। जब जिंदगी में संघर्ष नहीं होता तो जीवन में नीरसता आ जाती है। संघर्षपूर्ण जीवन का अर्थ दुखी जीवन नहीं है। संघर्ष तो हमें चुनौतियों से लड़ने का जज्बा प्रदान करता है। बैठे-बैठे दुखी होने से अच्छा है कि हम संघर्ष करते हुए सक्रिय रहें। तो आइए हम जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक ईमानदार कोशिश शुरू करें और जिंदगी को अपने तरीके से चलने दें।

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