scorecardresearch

Premium

वो तांत्रिक जिससे तमाम प्रधानमंत्री कराते थे पूजा, जानिये ब्रिटिश PM को क्यों दिया था ताबीज

चंद्रास्वामी एक तांत्रिक थे और भारतीय राजनीति के सबसे विवादास्पद किरदारों में से एक थे। आइए जानते हैं कैसे दुनियाभर में उन्होंने अपनी पैठ बनाई-

Tantrik Chandraswami | Chandraswami Death | Chandraswami International relation
चंद्रास्वामी की कहानी गुमनामी से निकलकर भारतीय राजनीति के केंद्र में कई सालों तक रही। (Image: Indian Express)

भारत के सबसे विवादास्पद तांत्रिकों में शुमार चंद्रास्वामी का जन्म राजस्थान के एक सामान्य से घर में हुआ था। राजस्थान से हैदराबाद जाने और वहां से 10 जनपथ की राजनीति में अपना मुकाम बनाने की चंद्रास्वामी की कहानी किसी कल्पना या चमत्कार से कम नहीं लगती है।

Continue reading this story with Jansatta premium subscription
Already a subscriber? Sign in

आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके पास भारत से लेकर ब्रिटेन तक के प्रधानमंत्री का आना जाना था। कुल मिलाकर वह जितने मशहूर थे, उतने ही विवादास्पद भी थे। विवादों से उनका पुराना नाता था और कहते हैं कि इस वजह से उन्हें एक मामले में जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।

अब आइए जानते हैं चंद्रास्वामी के बारे में- 80 के दशक में चर्चिल के बाद ब्रिटेन की सबसे काबिल प्रधानमंत्री रहीं मार्गरेट थैचर जो कभी इंदिरा गांधी के सामने भी संभलकर बोलती थीं, एक वाकये के बाद वह भी चंद्रास्वामी की फैन हो गईं थीं। कई लोग दावा करते हैं कि चंद्रास्वामी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव के सबसे नजदीकी सलाहकारों में से एक थे। हालांकि राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने में उनका भी नाम सामने आया था।

कौन थे चंद्रास्वामी: चंद्रास्वामी का असली नाम नेमिचंद जैन था। राजस्थान में बचपन बीताने के कुछ वर्षों बाद अपने पिता के साथ रहने के लिए नेमिचंद हैदराबाद चले गए। बताया जाता है कि हैदराबाद में भी रहकर चंद्रास्वामी ने कोई शिक्षा हासिल नहीं की थी, बल्कि बचपन से ही तंत्र विद्या साधना करने में उनकी दिलचस्पी हो गई थी और 16 साल की उम्र में वे तांत्रिक भी कहलाने लगे थे।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री को दिया ताबीज: 80 के दशक में जब थैचर कंजर्वेटिव पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनी थीं, तो उस समय नटवर भारतीय उप-उच्चायुक्त थे। साल 1975 में नटवर के पद पर रहते हुए चंद्रास्वामी उनसे मिलने इंडिया हाउस पहुंचे। सवाल-जवाब के दौरान चंद्रा ने थैचर को अपना मुरीद बना लिया और बाद में चंद्रा ने थैचर को एक ताबीज दिया था। जिसे पहनकर ही उन्हें नटवर के घर आना था। वह चंद्रा के बताए वक्त पर नटवर के घर पहुंच गईं। दरअसल थैचर ने चंद्रा से मिलने की इच्छा जाहिर की तो चंद्रा ने कहा नटवर के घर पर मुलाकात होगी। जब थैचर, नटवर के घर पहुंची तो गहरे लाल रंग की ड्रेस पर थैचर की बांह पर ताबीज था और वह लगातार अपने प्रधानमंत्री बनने को लेकर सवाल दागे जा रही थीं। सम्मोहित हो चुकीं थैचर का आखिरी सवाल था, ‘मैं प्रधानमंत्री कब बनूंगी?’

सच हुई थी भविष्यवाणी: पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह अपनी पुस्तक ‘वॉकिंग विद लायंस’ में लिखते हैं कि चंद्रास्वामी ने मार्गरेट थैचर के ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी, जो बाद में सच भी साबित हुई थी। इसके पीछे का किस्सा बड़ा दिलचस्प है। जब थैचर ने पूछा था कि मैं प्रधानमंत्री कब बनूंगी, इस दौरान चंद्रास्वामी ने भविष्यवाणी की थी कि मार्गरेट थैचर 9, 11 या 13 साल के लिए ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनेंगी। उनकी यह बात सच साबित हुई और थैचर साल 1979 में प्रधानमंत्री बन गईं और साल 1990 तक 11 साल के लिए प्रधानमंत्री के पद पर रहीं।

यूगोस्लाविया से फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलने आए: नटवर सिंह ने ‘वॉकिंग विद लायंस’ में लिखा है कि 1979-80 में वह एक बार पेरिस में बीमार पड़ गए थे। उस समय चंद्रास्वामी फ्रांसीसी राष्ट्रपति के निजी फिजिशयन के साथ उनसे मिलने आए थे। यह देखकर नटवर सिंह तो पहले से ही सकते में थे, लेकिन सबसे ज्यादा उन्हें हैरानी तब हुई जब चंद्रास्वामी ने कहा कि वह फ्रांस के राष्ट्रपति से सीधे यूगोस्लाविया से मिलने आए हैं। उस दौरान उन्होंने उन्हें लेने के लिए अपना निजी विमान भेजा था।

मिस इंडिया पामेला बोर्डेस के संग संबंध: साल 1982 की मिस इंडिया पामेला बोर्डेस ने ‘डेली मेल’ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि अदनान ख़शोगी और चंद्रास्वामी के लिए वो सेक्सुअल प्रेज़ेंट के तौर पर काम करती रहीं। अदनान ख़शोगी सऊदी अरब के हथियार कारोबारियों में से एक थे। चंद्रास्वामी का अदनान से कारोबारी संबंधों की अहम भूमिका रही। बता दें कि वर्ष 1989 में ही पामेला बोर्डेस की कहानी सामने आ चुकी थी। पामेला, चंद्रास्वामी की संग पैसे और सेक्स की दुनिया में डूबती चली गईं थीं।

1996 में शुरू हुआ बुरा दौर: चंद्रास्वामी ने पावर, सेक्स, हथियार, मनी और पॉवर ब्रोकिंग को वो काकटेल बना लिया था जिसमें वो फ़िक्सिंग के किंग बनकर उभर चुके थे। 1996 के बाद चंद्रास्वामी का बुरा दौर शुरू हुआ और एक के बाद एक उन पर मुकदमे चलने शुरू हो गए तो उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ गया और 23 मई 2017 को 66 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई थी।

चंद्रास्वामी की पहुंच सिर्फ भारत, ब्रिटेन और फ्रांस तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि जानकार बताते हैं कि ब्रूनेई के सुल्तान, बहरीन के शासक, जायर के राष्ट्राध्यक्ष से उनके काफी गहरे संबंध थे। इसके अलावा कहा जाता है कि हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिजाबेथ टेलर भी उनकी बहुत बड़ी फैन थीं।

पढें Religion (Religion News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट