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Surya Grahan 2019: 26 दिसंबर को लगने वाले सूर्य ग्रहण से भूकंप और भारी बर्फबारी के मिल रहे संकेत

Surya Grahan (Solar Eclipse) 2019: 26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण सुबह 10:57 बजे तक रहेगा। 58 साल बाद ऐसा ग्रहण पड़ रहा है जो प्राकृतिक आपदाओं या अकाल मृत्यु का द्योतक है। इसमें ग्रहण के छह माह के अंदर किसी ​बड़ी हस्ती की मृत्यु का संकेत है।

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Solar Eclipse 2019: 3 दिन बाद यानी 26 दिसंबर को सूर्यग्रहण है। यह भारत के अधिकांश हिस्सों में प्रभावी तौर पर दिखाई देगा। इस बार का सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा यानी आप ग्रहण काल में सूर्य को एक चमकदार रिंग वलयाकार के तौर पर देख सकेंगे। ग्रहण को लेकर तमाम ज्योतिषीय भविष्यवाणी भी की जा रही है कि किन राशियों के लिए ये अच्छा प्रभाव लाएगी और किनके लिए इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा।

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इस बार खग्रास सूर्यग्रहण पड़ रहा है। 26 दिसंबर को प्रात: 8 बजे से ग्रहण काल शुरू हो जाएगा जोकि प्रात: 10:48 बजे तक रहेगा। वैसे तो संपूर्ण ग्रहण 1:36 बजे तक खत्म होगा यानी ग्रहण काल इस बार 5 घंटा 36 मिनट का है। दक्षिण भारत में इस ग्रहण को अच्छे से देखा जा सकेगा जोकि चमकदार अंगूठी की तरह दिखेगा। ग्रहण से पहले सूतक काल की जिज्ञासा सबसे ज्यादा होती ताकि गर्भवती महिलाओं और इस दौरान पूजा पाठ करने वाले लोग इसकी तैयारी कर सकें। तो सूतक काल 25 दिसंबर को ही रात रात 8 बजे लग जाएगा।

कन्या, तुला और कुंभ राशि को इस ग्रहण के प्रभाव से लाभ मिलेगा। उनकी पर्सनल लाइफ से लेकर प्रोफेशनल लाइफ में तरक्की होगी। इसके अलावा पदोन्नति के आसार भी दिख रहे हैं। जबकि कर्क, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के लिए कष्ट लेकर आएगा ये ग्रहण। स्वास्थ्य, आर्थिक हानि और तनाव जैसे संकट का कारक हो सकता है ये ग्रहण। इसके लिए अतिरिक्त अन्य राशियों को भी मध्यम स्तर का ग्रहण प्रभाव दिखाई देगा। अत्यधिक धन खर्च, संपन्न हो रहे कार्यों में बाधा आदि सूर्य ग्रहण के प्रभाव से हो सकता है।

कहां कहां होगा ग्रहण का प्रभाव
26 दिसंबर को होने वाला सूर्य ग्रहण भारत के साथ—साथ पूर्वी यूरोप, एशिया, उत्तरी/पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और पूर्वी अफ्रीका में प्रभावी दिखाई देगा। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन और पूर्वी एशिया के बड़े हिस्से में इस ग्रहण को अच्छे से देखा जा सकेगा।

भूकंप, सुनामी और बर्फबारी का खतरा
ज्योतिष गणना के अनुसार, ग्रहण से ठीक एक दिन पहले पौष माह में मंगल राशि परिवर्तन करके जल-तत्व की राशि वृश्चिक में प्रवेश करने वाला है। ऐसी स्थिति बड़े प्राकृतिक आपदा की ओर इशारा कर रही है। ग्रहण के 3 से 15 दिनों के भीतर भूकंप, सुनामी और अत्यधिक बर्फबारी का खतरा देश पर मंडरा रहा है।

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