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Surya Grahan 2019 Today: जानें क्या होता है सूर्यग्रहण और कैसे लगता है यह

Surya Grahan In July 2019: What is it and how it occurs: विज्ञान कहता है कि सूर्यग्रहण एक प्रमुख खगोलीय घटना है। जिसमें कोई खगोलीय पिंड पूर्ण या आंशिक रूप से किसी दूसरे पिंड को ढक लेता है। इस खगोलीय घटनाक्रम को ग्रहण कहा जाता है।

Surya Grahan 2019 Today: जानिए, क्या होता है सूर्यग्रहण और कैसे लगता है ये।

Surya Grahan 2019: 02 जुलाई 2019, मंगलवार के दिन इस साल का दूसरा सूर्यग्रहण लगने वाला है। भारतीय समय के अनुसार यह सूर्यग्रहण रात के 11 बजकर 31 मिनट से शुरू होगा और 02 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस खग्रास सूर्यग्रहण को विशेष रूप से चिली, आर्जेंटीना और दक्षिण प्रशांत महासागर में दिखाई देगा। वहीं आंशिक तौर पर इस सूर्यग्रहण को दक्षिण प्रशांत महासागर और दक्षिण अमेरिका के अधिकांश भागों में देखा जा सकता है। इसके अलावा यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लगेगा और न ही इसे देखा जा सकेगा। आइए जानते हैं कि आखिर सूर्यग्रहण होता क्या है और कैसे लगता है।

विज्ञान कहता है कि सूर्यग्रहण एक प्रमुख खगोलीय घटना है। जिसमें कोई खगोलीय पिंड पूर्ण या आंशिक रूप से किसी दूसरे पिंड को ढक लेता है। इस खगोलीय घटनाक्रम को ग्रहण कहा जाता है। वहीं जब सूर्य और पृथ्वी के बीचोंबीच आ जाता है तो यही घटनाक्रम सूर्यग्रहण कहलाता है। भारतीय मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण अक्सर अमावस्या को लगता है।

इसके अलावा पुराणों में भी सूर्यग्रहण का वर्णन मिलता है। मत्स्य पुराण के अनुसार एक बार स्वरभानु नामक राक्षस समुद्र मंथन से निकले अमृत को पीना चाहता था। इसके लिए वह अपना रूप बदलकर सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ गया। परंतु भगवान विष्णु उस राक्षस के कुटिल चाल को समझ गए। भगवान विष्णु जब तक कुछ सोचते तब तक वह राक्षस अमृत को पी चुका था। इस तरह अमृत उसके गले तक पहुंच चुका था।

उसी वक्त भगवान श्रीहरि ने अपने सुदर्शन चक्र से उस राक्षस की गर्दन को उसके धड़ से अलग कर दिया। अमृत पीने के कारण वह मरकर भी जीवित रहा। कहते हैं कि उस राक्षस का सिर राहु और घड़ केतु कहलाया। यही कारण है कि उस दिन से जब भी सूर्य और चंद्रमा के पास आते हैं तो राहु और केतु उनके बीच में आ जाता है। जिस कारण राहु और केतु के प्रभाव से ग्रहण लगता है।

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