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Solar Eclipse 2019 Date: दिसंबर में लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, वैज्ञानिक भाषा में ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा

Solar Eclipse 2019, Surya Grahan December Date and Time 2019 in India: यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। वैज्ञानिक भाषा में इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य से दूर होने के बावजूद भी उनके बीच में आ जाता है।

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Surya Grahan 2019, Solar Eclipse  December Date and Time 2019 in India: 26 दिसंबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse)लगेगा। इस ग्रहण को भारत समेत एशिया, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया में देखा जा सकेगा। यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। वैज्ञानिक भाषा में इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य से दूर होने के बावजूद भी उनके बीच में आ जाता है। आपको बता दें कि 2019 का पहला सूर्य ग्रहण 6 जनवरी को दूसरा 2 जुलाई को लगा था। दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिये थे। क्योंकि भारतीय समयानुसार ये ग्रहण रात के समय लगे थे।

सूर्य ग्रहण समय (Surya Grahan Date And Timing):

ग्रहण प्रारम्भ काल – 08:17 ए एम (26 दिसंबर 2019)
परमग्रास – 09:31 ए एम तक (26 दिसंबर 2019) ग्रहण समाप्ति काल – 10:57 ए एम तक (26 दिसंबर 2019)
खण्डग्रास की अवधि – 02 घण्टे 40 मिनट्स 22 सेकण्ड्स
अधिकतम परिमाण – 0.56
सूतक प्रारम्भ – 05:32 पी एम, दिसम्बर 25 से
सूतक समाप्त – 10:57 ए एम (26 दिसंबर) को

ग्रहण का सूतक: बता दें कि इस बार के सूर्य ग्रहण की खास बता यह है कि यह भारत में केरल के चेरुवथुर में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण के सूतक लगने के कारण सबरीमला में भगवान अयप्पा मंदिर का गर्भ गृह 26 दिसंबर को चार घंटे के लिये बंद रहेगा। सूतक काल 25 दिसंबर शाम 5.30 बजे से शुरू हो जायेगा और इसकी समाप्ति 26 दिसंबर सुबह 10.57 बजे पर होगी।

राशियों पर असर: मेष, वृष, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर राशि के जातकों के लिए ये सूर्य ग्रहण कुछ परेशानियां ला सकता है। तो वहीं कर्क, तुला, कुंभ और मीन राशि के लिए ग्रहण शुभ रहने वाला है।

ग्रहण के समय किन बातों का रखें ध्यान: ग्रहण के समय पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए। जिससे भोजन दूषित न हो। ग्रहण समाप्ति के बाद पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। घर में किसी भी तरह के पकवान आदि को ग्रहण के समय न खाएं न बनाएं। सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद गर्भवती महिलाओं को स्नान अवश्य करना चाहिए। सूतक काल शुरू होने से लेकर समाप्त होने तक भगवान की आराधना करें। सूतक काल समाप्त होने पर पीने के पानी को अवश्य बदल दें। सूतक काल के आरंभ होते ही मांस- मदिरा का सेवन ना करें, साथ ही ग्रहण के समय शारीरिक संबंध भी नहीं बनाने चाहिए।

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Highlights

    14:34 (IST)26 Nov 2019
    ग्रहण के समय इन बातों के रखें ध्यान:

    ग्रहण के वक्त किसी को भी पूजा पाठ नहीं करना चाहिए। आपके घर में जो भी खाने पीनें की चीजें हो उन सभी में तुलसी का पत्ता डालकर रख दें। जैसे ही ग्रहण खत्म हो जाए उसके बाद ही पूरे घर की सफाई करनी चाहिए। ग्रहण के वक्त ना तो पकवान बनाए और ना ही पकवान खाएं। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को अवश्य रुप से स्नान करना चाहिए। सूतक काल के शुरु होने से लेकर उसके खत्म होने तक भगवान की आराधना करें।

    14:04 (IST)26 Nov 2019
    कब होता है वलयाकार सूर्यग्रहण:

    वैज्ञानिक भाषा में सूर्यग्रहण को वलयाकार कहते हैं। वलयाकार सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य से दूर होने के बाद भी उनके बीच में आ जाता है। इस दौरान सूर्य का कुछ हिस्सा प्रकाशवान होता है।

    13:27 (IST)26 Nov 2019
    ग्रहण का दृश्य क्षेत्र:

    साल का अंतिम सूर्य ग्रहण सम्पूर्ण भारत के साथ ही नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्यांमार, अफग़ानिस्तान सहित एशिया महाद्वीप के अन्य देशों, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के देशों में देखा जा सकेगा। 

    12:45 (IST)26 Nov 2019
    सूर्य ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं:

    पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकले अमृत की प्राप्ति के लिए देवताओं और दानवों के बीच विवाद शुरू हो गया, तो इसे सुलझाने के लिए और अमृत देवताओं को पिलाने के उद्देश्य से भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी के रूप से सभी देवता और दानव उन पर मोहित हो उठे तब भगवान विष्णु ने देवताओं और दानवों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन तभी एक असुर को भगवान विष्णु की इस चाल पर शक पैदा हुआ। जिससे वह असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान करने लगा।  देवताओं की पंक्ति में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने इस दानव को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, लेकिन अमृत राक्षस के मुंह में चला गया था जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से दानव का सिर धड़ से अलग कर दिया। अमृत पीने के कारण उस राक्षस की मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहू और धड़ वाला भाग केतू के नाम से जाना गया। इसी वजह से राहू और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। पूर्णिमा और अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। इसे ही सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।

    12:12 (IST)26 Nov 2019
    विज्ञान अनुसार ऐसे लगता है सूर्य ग्रहण:

    पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की। कभी-कभार इस प्रक्रिया में चाँद, सूरज और धरती के बीच में आ जाता है। जिससे सूरज की कुछ या फिर सारी रोशनी धरती पर आने से रूक जाती है। जिससे धरती पर अंधेरा फैल जाता है। इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। यह घटना अमावस्या के दिन होती है। ज्यादातर चाँद, सूरज के कुछ ही हिस्से को ढ़कता है। जिसे खण्ड-ग्रहण कहा जाता है। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है जब चाँद सूरज को पूरी तरह से ढँक लेता है। इसे पूर्ण-ग्रहण कहते हैं। पूर्ण-ग्रहण का नजारा धरती के बहुत ही कम क्षेत्रों में देखने को मिलता है।

    11:50 (IST)26 Nov 2019
    ये कौन सा सूर्यग्रहण है?

    दिसंबर में खंडग्रास सूर्य ग्रहण लगेगा। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो इस बार पड़ने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण है। वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य से दूर होने के बावजूद भी पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। लेकिन यह पृथ्वी को पूरी तरह से अपनी छाया में नहीं ले पाता है। इस ग्रहण में सूर्य के बाहर का कुछ हिस्सा ही प्रकाशित होता है। आपको बता दें कि 2019 का पहला सूर्य ग्रहण 6 जनवरी को लगा था। दूसरा 2 जुलाई को लगा था। दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिये थे। क्योंकि भारतीय समयानुसार ये ग्रहण रात के समय लगे थे।

    11:32 (IST)26 Nov 2019
    ग्रहण के समय मंदिर में दर्शन नहीं किये जाते:

    25 दिसंबर की शाम साढ़े पांच बजे के बाद मंदिर में दर्शन नहीं होंगे. मंदिर के द्वारा 25 तारीख को शाम 5 बजकर 30 मिनट से लेकर 26 दिसंबर सुबह 11 बजे तक बंद रहेंगे. सूर्यग्रहण का समय सुबह 8.16 से लेकर सुबह10.57 बजे तक है.

    11:13 (IST)26 Nov 2019
    सूर्य ग्रहण से पहले लग जाता है सूतक:

    इस साल के आखिरी सूर्य ग्रहण को सिर्फ एक महीना बाकी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से पहले सूतक लग जाते हैं और इस दौरान सभी मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। सूर्य ग्रहण के सूतक लगने के कारण सबरीमला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर का गर्भ गृह 26 दिसंबर को सूर्यग्रहण के चलते चार घंटे के लिये बंद रहेगा। आपको बता दें कि इस बार के सूर्य ग्रहण की खास बता यह है कि यह भारत में भी दिखाई देगा। भारत में यह केरल के चेरुवथुर में दिखाई देगा।

    10:46 (IST)26 Nov 2019
    एक महीने बाद लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण:

    आपको बता दें कि ग्रहण के सूतक का प्रभाव उसी जगह होता है जहां पर ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्रमा की किरणें पड़ती हैं। चूंकि इस साल ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा इसलिए इस बार के ग्रहण में सूतक काल होगा। इसलिए इस दौरान गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतनी चाहिए।

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