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Surya Grahan Solar Eclipse 2018: आज है साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, यहां पढ़ें हर जरूरी जानकारी

सूर्य ग्रहण २०१८, Surya Grahan 2018, Surya Grahan in August 2018 Today, Solar Eclipse 2018 11th August Today Time, Timings, Streaming: कई बार चंद्रमा घुमते-घुमते सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। ऐसी दशा में पृथ्वी से सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देता। इसी घटनाक्रम को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

Author नई दिल्ली | Aug 11, 2018 19:53 pm
Surya Grahan August 2018: यह सूर्य ग्रहण 11 अगस्त दिन शनिवार को लगा। (FILE PHOTO: REUTERS)

सूर्य ग्रहण २०१८, Surya Grahan 2018, Surya Grahan August 2018 Today, Solar Eclipse 2018 11th August Today Time, Timings, Streaming: साल 2018 का आखिरी सूर्य ग्रहण 11 अगस्त को लग रहा है। भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण शनिवार को दोपहर में लगने वाला है। यह 11 अगस्त दिन शनिवार को दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगा और शाम 5 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगा। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ग्रहण(सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण) का लगना अशुभ माना जाता है। कहते हैं कि ग्रहण के दौरान खुले आसमान के नीचे नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही मंदिर के दरवाजे बंद कर देने की बात भी कही गई है। इन सबके अलावा भी सूर्य ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं।

क्‍या है सूर्य ग्रहण: पृथ्वी अपनी धुरी पर निरंतर घूमते रहने के साथ-साथ सौरमंडल में सूर्य का चक्कर भी लगाती है। वहीं, चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है और वह पृथ्वी के चारों ओर घूमता रहता है। ऐसे में कई बार चंद्रमा घूमते-घूमते सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। ऐसी दशा में पृथ्वी से सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देता। इसी घटनाक्रम को सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

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Surya Grahan August 2018 Today, Solar Eclipse 2018 11th August Today Time, Timings

18:16 (IST) 11 Aug 2018
तीन प्रकार के होते हैं सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है। जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी को अपनी छाया में ले लेता तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। ऐसी स्थिति में सूर्य की किरणें धरती तक नहीं पहुंच पाती हैं और धरती पर अंधेरा छा जाता है। दूसरा ग्रहण है आंशिक सूर्य ग्रहण। इसमें चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ढक लेता है। इस दौरान धरती के कुछ हिस्सों पर सूर्य नजर नहीं आता। तीसरा है वलयाकार सूर्य ग्रहण। इसमें चंद्रमा, सूर्य को इस प्रकार से ढकता है कि सूरज का मध्य हिस्सा ही इससे कवर हो पाता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा दिख रहा होता है। ऐसी स्थिति में वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं।

17:47 (IST) 11 Aug 2018
सूर्य ग्रहण से है भगवान श्रीकृष्ण का संबंध

शास्त्रों में ऐसे तथ्य सामने आते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का संबंध भी सूर्य ग्रहण से रहा है। जिस दिन श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी डूबी, उस दिन सूर्य ग्रहण था। साथ ही जब यह नगरी कृष्ण के प्रपौत्र ने दोबारा बसाई थी, उस दिन भी सूर्य ग्रहण था।

16:45 (IST) 11 Aug 2018
पहली बार सूर्य ग्रहण की तस्वीर कब ली गई थी?

साल 1851 में पहली बार सूर्य ग्रहण की तस्वीर ली गई थी। उस वक्त फोटोग्राफी शुरुआती दौर में थी। तस्वीरें क्लिक करने के लिए उस वक्त देग्युरोटाइप नाम की तकनीक का इस्तेमाल होता था। इसी के जरिए तस्वीरें क्लिक की जाती थीं।

16:22 (IST) 11 Aug 2018
क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण?

वलयाकार सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।

15:43 (IST) 11 Aug 2018
कब होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले लेता है। इसके फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच नहीं पाता है और पृथ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।

15:19 (IST) 11 Aug 2018
ऐसे देखें सूर्यग्रहण

सूर्य ग्रहण को देखने के लिए वैज्ञानिक पिन होल का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। पिन होल को आसानी से ग्रामीण इलाकों में भी बनाया जा सकता है। इसके अलावा सूर्य ग्रहण देखने के लिए बाजार में कई सर्टिफाइड चश्में उपलब्ध हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान सर्टिफाइट चश्मों का इस्तेमाल भी खूब किया जाता है। इसके साथ ही सूर्य ग्रहण देखने के लिए पनहोल कैमरे भी बनाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि सूर्य ग्रहण के दौरान बाजार में इनकी मांग काफी बढ़ जाती है और खगोल विज्ञान में रुचि लेने वाले लोग ग्रहण को देखना मिस नहीं करते।

15:16 (IST) 11 Aug 2018
सूर्य ग्रहण के दौरान सोने से करें परहेज

सूर्य ग्रहण के दौरान सोने से भी मना किया जाता है। ऐसा कहते हैं कि ग्रहण के समय सोने से सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय मलमूत्र का त्याग भी नहीं करना चाहिए।

15:06 (IST) 11 Aug 2018
सूर्य ग्रहण के दौरान नहीं करना चाहिए भोजन?

ऐसी मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन पकाने के लिए भी मना किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे सच्चाई क्या है। यदि नहीं तो आज हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि ग्रहण के दौरान भोजन करने वाला व्यक्ति पाप का भागी होता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति ग्रहण के समय भोजन करता है, उसके 12 वर्षों के पुण्य कार्य समाप्त हो जाते हैं। इसलिए ग्रहण के दौरान भोजन करने व पकाने से मना किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान निकलने वाला विकिरण भोजन को दूषित कर देता है। कहा जाता है कि यह दूषित भोजन करने से सेहत खराब हो सकती है। इसके अलावा ग्रहण के दौरान किए गए भोजन से अपच होने की भी बात कही गई है।

14:51 (IST) 11 Aug 2018
जानिए ग्रहण के समय क्यों किया जाता है डाभ यानी कुशा का इस्तेमाल

हमारे देश में ग्रहण को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक है ग्रहण के दौरान डाभ(कुशा) का प्रयोग। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो राहु-केतु के सूर्य या चंद्रमा पर हावी होने की कोशिश के दौरान ग्रहण लगता है। राहु को तम के नाम से भी जाना जाता है और तम का मतलब अंधकार होता है। कहते हैं कि तमोगुण द्वारा सात्विक प्रकाश को दबाने से उसकी शक्ति अशुद्ध हो जाती है। बताते हैं कि इस अशुद्धता का सबसे ज्यादा प्रभाव खान-पान की वस्तुओं पर पड़ता है। मान्यता है कि जब इन खाद्य और पेय पदार्थों को कुशा पर रख दिया जाता है तो उनका दूषित तत्व समाप्त हो जाता है। माना जाता है कि कुशा तमोगुण के लिए कुचालक का काम करती है। ऐसे में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण से एक घंटे पहले कुशा को खान-पान की वस्तुओं के ऊपर रख देने की बात कही गई है। कहते हैं कि ग्रहण के दौरान बर्तनों को भी डाभ(कुशा) से ढ़क देना चाहिए। ऐसा करने से खाद्य और पेय पदार्थों समेत बर्तनों की भी शुद्धता बरकरार रहने की मान्यता है।

14:25 (IST) 11 Aug 2018
प्राचीन काल में महर्षियों ने की थी गणना

ग्रह नक्षत्रों की दुनिया की यह घटना भारतीय महर्षियों को अत्यन्त प्राचीन काल से ज्ञात रही है। चिर प्राचीन काल में महर्षियों ने गणना कर दी थी। इस पर धार्मिक, वैदिक, वैचारिक, वैज्ञानिक विवेचन धार्मिक एवं ज्योतिषीय ग्रन्थों में होता चला आया है। महर्षि अत्रिमुनि ग्रहण के ज्ञान को देने वाले प्रथम आचार्य थे। ऋग्वेदीय प्रकाश काल अर्थात वैदिक काल से ग्रहण पर अध्ययन, मनन और परीक्षण होते चले आए हैं।

14:11 (IST) 11 Aug 2018
कैसे लगता है पूर्ण सूर्य ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफी पास रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है और चन्द्रमा पूरी तरह से पृ्थ्वी को अपने छाया क्षेत्र में ले लेता है। इसके फलस्वरूप सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच नहीं पाता है और पृथ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति हो जाती है तब पृथ्वी पर पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार बनने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।

13:52 (IST) 11 Aug 2018
क्‍या है वलयाकार सूर्य ग्रहण?

जब चन्द्रमा पृथ्वी के काफी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात चन्द्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।

13:39 (IST) 11 Aug 2018
ग्रहण से पहले, ग्रहण के दौरान और ग्रहण के बाद करें ये काम

ग्रहण के दौरान इसके असर से बचने के लिए भगवान शिव के मंत्रों और नामों का जप करना चाहिए। 2. गरीबों को दान और तुलसी का पत्ता खाना चाहिए लेकिन तुलसी के पत्ते को ग्रहण के एक दिन पहले से तोड़कर रख लेना चाहिए। 3. ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल कर रखना चाहिए। 4. ग्रहण में गर्भवती महिला को खास ध्यान रखना चाहिए। ग्रहण में महिलाओं को बाहर नहीं निकालना चाहिए क्योंकि बच्चे पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। 5. ग्रहण में मंत्रों का जाप और ग्रहण के बाद पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करना चाहिए।

13:22 (IST) 11 Aug 2018
ये थे सूर्य ग्रहण के ज्ञानी

वैदिक काल से पूर्व भी खगोलीय संरचना पर आधारित कलैन्डर बनाने की जरूरत महसूस की गई। सूर्य ग्रहण चन्द्र ग्रहण तथा उनकी पुनरावृत्ति की पूर्व सूचना ईसा से चार हजार पूर्व ही उपलब्ध थी। ऋग्वेद के अनुसार अत्रिमुनि के परिवार के पास यह ज्ञान उपलब्ध था। वेदांग ज्योतिष का महत्त्व हमारे वैदिक पूर्वजों के इस महान ज्ञान को प्रतिविम्बित करता है।

13:04 (IST) 11 Aug 2018
जान‍िए सूर्य ग्रहण की पहली तस्‍वीर क‍िसने ली थी?

साल 1851 में पहली बार सूर्य ग्रहण की तस्वीर ली गई थी। उस वक्त फोटोग्राफी शुरुआती दौर में थी। तस्वीरें क्लिक करने के लिए उस वक्त देग्युरोटाइप नाम की तकनीक का इस्तेमाल होता था। इसी के जरिए तस्वीरें क्लिक की जाती थीं। खगोल शास्त्री उस वक्त चाहते थे कि वे पूरे सूर्य ग्रहण को अपने कैमरे में कैद कर लें, जिससे वे सूर्य के बारे में अध्ययन कर सकें। लेकिन देग्युरोटाइप तकनीक से सूर्य ग्रहण को कैमरे में कैद करना थोड़ा मुश्किल काम था।

12:18 (IST) 11 Aug 2018
फोन की स्क्रीन पर लगाएं सोलर फिल्टर

विशेषज्ञों के मुताबिक फोन और टैब से सूर्य ग्रहण की तस्वीर लेते वक्त आपकी स्क्रीन को नुकसान हो सकता है। इस दौरान सूर्य से निकलने वाली किरणों की वजह से फोन या टैब की स्क्रीन के पिक्सल खत्म हो सकते हैं। अगर आप ज्यादा देर तक सूर्य पर फोकस करते हैं तो यह बहुत ज्यादा संभव है। अगर आप अपने फोन की स्क्रीन को बचाना चाहते हैं तो उस पर एक सोलर फिल्टर लगा लें। इससे सूर्य की किरणों की रोशनी कम हो जाएगी।

11:58 (IST) 11 Aug 2018
ग्रहण को लेकर हैं कई मान्‍यताएं

माना जाता है कि हर सूर्य ग्रहण लोगों के जीवन पर असर डालता है। इसलिए इस मौके पर पवित्र नदियों में स्नान कर दान-दक्षिणा देने की परंपरा है, ताकि बुरे ग्रहों का प्रभाव नहीं पड़े सके। ऐसी मान्यता है कि राहु और केतु नाम के दो असुर सूर्य और चंद्रमा को अपना ग्रास बना लेते हैं और इसका असर अच्छा नहीं होता। इसलिए ग्रहण के समय कुछ भी नहीं खाना-पीना चाहिए और न ही मल-मूत्र का विसर्जन करना चाहिए।

11:35 (IST) 11 Aug 2018
क्‍या है आंशिक सूर्यग्रहण

ग्रहण के मौके पर दुनिया भर के खगोलविद जहां तरह-तरह के प्रयोग करते हैं, वहीं आम लोग भी इसे लेकर बहुत उत्सुकता से भरे होते हैं। साथ ही, इसका धार्मिक महत्व भी है। सूर्य ग्रहण हो परिभ्रमण के चक्र में आने वाला व्यवधान ही ग्रहण का कारण बनता है। जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य की चमकती सतह चंद्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ती है। सूर्य ग्रहण आंशिक और पूर्ण होता है। चंद्रमा के सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाने के कारण जब सूर्य का एक हिस्सा छिप जाता है तो उसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है। लेकिन जब सूर्य पूरी तरह से चंद्रमा के पीछे छिप जाता है तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

11:20 (IST) 11 Aug 2018
ग्रहण को लेकर पहले फैला था अंधविश्‍वास

शुरुआती काल में जब खगोल विज्ञान का विकास नहीं हुआ था तो माना जाता था कि ये ऐसी शक्तियों के चलते होता है जो अशुभ परिणाम देने वाली होती हैं। मध्य युग तक इसे यूरोप में अंधकार का काल कहा जाता है, ग्रहण को लेकर यही धारणा प्रचलित रही। आगे चल कर जब ब्रूनो और गैलीलियो जैसे खगोलविदों ने ग्रहों की गति को समझने की कोशिश की तो इसके वैज्ञानिक कारण सामने आए। बावजूद, सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में ग्रहण को लेकर लोगों में एक विशेष उत्सुकता का भाव रहता है। प्रकृति में होने वाली यह परिघटना आम नहीं, विशिष्ट होती है, क्योंकि इसका संयोग हमेशा नहीं बनता।

11:05 (IST) 11 Aug 2018
जानें गर्भवती महिलाओं पर क्‍या हो सकते हैं ग्रहण के नकरात्‍मक प्रभाव

ग्रहण के समय सुई का प्रयोग करने के लिए मना किया जाता है, मान्यता के अनुसार इससे बच्चे के ह्रदय में छेद हो सकता है। ग्रहण के दौरान पानी पीने से गर्भ में पल रहे शिशु की त्वचा सूख जाती है। गर्भवती स्त्री को ग्रहण काल के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए, अन्यथा शिशु को त्वचा की बीमारी लग सकती है। यदि महिला ग्रहण को देख लेती है तो शिशु की आंखों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को तुलसी का पत्ता जीभ पर रख मंत्रों का जाप करना चाहिए और हनुमान चालीसा या दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए।

10:54 (IST) 11 Aug 2018
ग्रहण के समय गर्भवती महिलाएं बरतें सावधानी

मान्यता है कि यदि कोई महिला ग्रहण के समय चाकू आदि नुकीली चीज का इस्तेमाल फल या सब्जियां काटने के लिए करती है तो इससे शिशु के अंगों को हानि हो सकती है। ग्रहण के समय कैंची का प्रयोग करने की मनाही होती है, मान्यता है कि इससे शिशु के होठ कट जाते हैं। कई स्थानों पर मान्यता है कि ग्रहण के समय गर्भवती महिला का सोना अशुभ होता है, बैठकर अन्य काम किए जा सकते हैं।

10:43 (IST) 11 Aug 2018
गर्भवती महिलाएं ऐसे कम करें ग्रहण का प्रभाव

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, किसी ग्रहण को विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता के अनुसार किसी भी ग्रहण का प्रभाव 108 दिनों तक रहता है जिससे गर्भवती महिला और शिशु को हानि हो सकती है। गर्भवती महिला को इस दिन घर में रहकर 'ऊं क्षीरपुत्राय विह्ममहे अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्र प्रचोदयात्' मंत्र का जाप करना चाहिए। इस ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव महिला और शिशु पर नहीं पड़ता है या इसका प्रभाव कम हो जाता है।

10:32 (IST) 11 Aug 2018
यहां देख सकते हैं लाइव टेलिकास्‍ट

15 फरवरी को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ा था। वहीं, साल 2018 का दूसरा सूर्य ग्रहण 13 जुलाई को लगा था। बता दें कि 13 जुलाई को सूर्य ग्रहण सुबह 7 बजकर 18 मिनट 23 सेकंड से शुरू हुआ था, जो कि 8 बजकर 13 मिनट 5 सेकंड तक रहा। कई एजेंसियां लाइव टेलिकास्ट करेंगी। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा पर ग्रहण का लाइव टेलीकास्ट होगा। नासा 12 जगहों से सूर्य ग्रहण की कवरेज करेगा।

10:14 (IST) 11 Aug 2018
यहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

11 अगस्त को लगने वाला साल 2018 का अंतिम सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। हालांकि इसे उत्तर-पूर्वी यूरोप, रूस, कजाकिस्तान, तिब्बत को छोड़कर समूचे चीन, मंगोलिया, उत्तर और दक्षिण कोरिया तथा कनाडा के उत्तरी भागों में देखा जा सकता है। ऐसे में एक बार फिर से दुनियाभर में इस अहम खगोलीय घटना को लेकर उत्सुकता पैदा हो गई है।

10:02 (IST) 11 Aug 2018
आखिरी सूर्य ग्रहण है बेहद खास, जानिए क्‍यों

साल के आखिरी सूर्य ग्रहण की एक और खास बात यह है कि इसी दिन शनि अमावस्या भी पड़ रही है। ऐसे में यह ग्रहण और भी खास हो जाता है। जानकारों का कहना है कि शनि अमावस्या होने के कारण इस दिन शनिदेव की पूजा और मंत्रों का जाप करना शुभ होगा।

09:50 (IST) 11 Aug 2018
आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है ग्रहण

विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान खतरनाक सोलर रेडिएशन निकलता है। कहते हैं कि यह सोलर रेडिएशन आंखों के नाजुक टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे आंखों में विजन-इशू आ सकता है। इससे देखने में दिक्कत आने लगती है। यह समस्या कुछ समय के लिए या फिर हमेशा के लिए भी हो सकती है।