इस रत्न को धारण करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होने की है मान्यता, जानिये धारण करने के नियम और फायदे

सुनहला रत्न को धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। इसलिए इस रत्न को गुरुवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है।

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वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार सुनहला स्‍टोन धारण करने से मान-सम्मान और धन-दौलत में वृद्धि होती है।

ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को बेहद ही महत्वपूर्ण बताया गया है। मान्यता है कि रत्नों का मनुष्य की जिंदगी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में जिंदगी से जुड़ी तमाम समस्याओं को लेकर रत्न सुझाए गए हैं। ज्योतिषाचार्य पैसों की किल्लत, करियर में आ रही परेशानियों और सुख-समृद्धि को लेकर रत्न धारण करने का सुझाव देते हैं। हर रत्न का अपना एक अलग प्रभाव होता है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे रत्नों के बारे में बताया गया है, जिन्हें धारण करने से जिंदगी के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इन्हीं रत्नों में से एक है सुनहला रत्न। सुनहला रत्न धारण करने से मनुष्य के धन-सपंदा में वृद्धि होती है।

सुनहला रत्न: सुनहला रत्न दिखने में पुखराज की तरह होता है। यह पुखराज का उपरत्न भी माना जाता है। इसे धारण करने से समाज में मनुष्य के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। साथ ही व्यक्ति की धन संबंधी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। अगर आपके व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है तो ज्योतिष की सलाह पर आप इस रत्न को धारण कर सकते हैं। पीले रंग का यह सुनहला रत्न करियर और व्यापार में लाभ देता है। जो लोग सुनहला रत्न धारण करते हैं, उन पर मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। साथ ही यह रत्न व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है।

जो लोग महंगा होने के कारण पुखराज को धारण नहीं कर सकते, उनके लिए सुनहला रत्न धारण करना एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इस रत्न को सोने या फिर पंचधातु की अंगूठी में पहनना चाहिए।

सुनहला रत्न धारण करने की विधि: सुनहला रत्न को धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। इसलिए इस रत्न को गुरुवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। गुरुवार को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत होकर भगवान बृहस्पति का ध्यान दें। फिर तांबे के एक पात्र या कटोरी में गाय का कच्चा दूध, शहद, घी, गंगाजल तुलसी की पत्तियां मिलाकर इसमें सुनहला रत्न डाल दें।

इसके बाद ‘ऊं ग्रां ग्रीं ग्रूं गुरुवे नम:’ मंत्र की एक माला का जाप करें। फिर इस रत्न को गंगाजल से निकालकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए रत्न को धारण करें।

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