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शुक्रवार की शाम इस स्तोत्र के पाठ से धन आगमन के योग बनने की है मान्यता, जानिये महत्व

इस स्तोत्र का पाठ करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में वास करती हैं। यह प्रार्थना इन्द्र देव ने देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए गाई थी जिसके बाद स्वर्ग धन-धान्य और ऐश्वर्य से भर जाता है।

dhan prapti ke upay, dhan prapti ke achuk upay, dhan prapti ke totkeमान्यता है कि इस स्तोत्र के पाठ से घर में धन आगमन होता है।

Dhan Prapti ke Upay : शुक्रवार के दिन माता महालक्ष्मी की उपासना को बहुत अच्छा माना जाता है। कहते हैं कि शुक्रवार की शाम लाल कपड़े पर बैठकर लक्ष्मी माता के नाम का दीपक जलाकर महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना स्तोत्र का पाठ करने से घर में बरकत आती है। मान्यता है कि इस स्तोत्र के पाठ से घर में धन आगमन होता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में वास करती हैं। यह प्रार्थना इन्द्र देव ने देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए गाई थी जिसके बाद स्वर्ग धन-धान्य और ऐश्वर्य से भर जाता है।

महालक्ष्मी स्तोत्र का महत्व (Mahalaxmi Stotra Ka Mahatva)
महालक्ष्मी के स्तोत्र के पाठ से घर में बरकत आने की मान्यता है। कहते हैं कि जो व्यक्ति सच्चे मन से महालक्ष्मी के स्तोत्र के पाठ करता है उस पर हमेशा महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इस स्तोत्र को पढ़ने-सुनने से घर में धन-धान्य आने की मान्यता है। बताया जाता है कि महालक्ष्मी स्तोत्र के पाठ के बाद देवी लक्ष्मी हमेशा अंग-संग बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में कभी धन का अभाव नहीं होता है। बताया जाता है कि इसके पाठ के बाद कुंवारी कन्या को धन दान करने से इस पाठ का असर और भी जल्दी होती है।

महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना स्तोत्र (Mahalaxmi Kripa Prarthna Stotra/ Mahalaxmi Kripa Prarthna Stotram)

इन्द्र उवाच
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।1।।
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।2।।

सर्वज्ञे सर्ववरदे देवी सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदु:खहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।3।।
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।4।।

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।5।।
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।6।।

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणी।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।7।।
श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।8।।

स्तोत्र पाठ का फल

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर:।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा।।9।।
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।
द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन्यधान्यसमन्वित:।।10।।
त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा।।11।।

इस पाठ को पढ़ने के बाद हाथ जोड़कर लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए अपने घर में माता महालक्ष्मी के 11 नामों का जयकारा अपने घर में लगाएं।

पद्मा, पद्मालया, पद्मवनवासिनी, श्री, कमला, हरिप्रिया, इन्दिरा, रमा, समुद्रतनया, भार्गवी और जलधिजा।

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