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Somvati Amavasya 2019: सोमवती अमावस्या के लिए इस समय से शुरू हुआ शुभ मुहूर्त, जानिए कथा और महत्व

मौनी अमावस्या के दिन पड़ने के कारण इस अमावस्या का गुण कई बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या का हिन्दू धर्म में खास महत्व प्रदान किया गया है।

Author नई दिल्ली | February 4, 2019 12:58 PM
शिवलिंग पर अभिषेक करते श्रद्धालु।

Somvati Amavasya 2019 Auspicious Time Shubh Muhurat Story And Importance: सोमवती अमावस्या 4 फरवरी 2019, सोमवार को यानि आज है। लेकिन इसके लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत हो चुकी है। सोमवार को पड़ने के कारण यह अमावस्या सोमवती अमावस्या कही जाती है। मौनी अमावस्या के दिन पड़ने के कारण इस अमावस्या का गुण कई बढ़ गया है। सोमवती अमावस्या का हिन्दू धर्म में खास महत्व प्रदान किया गया है। चूंकि यह सोमवार के दिन होती है लिहाजा इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ का होता है। शायद यही कारण है कि सोमवती अमावस्या के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रतऔर विशेष पूजन-पाठ करती हैं। वहीं कुंवारी कन्या भी उत्तम पति की प्राप्ति के लिए व्रत और पूजन करती हैं। जानते हैं सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त, कथा और महत्व।

शुभ मुहूर्त: सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त रविवार की रात 12 बजकर 02 मिनट से शुरू हो चुकी है। साथ ही सोमवार को पूरे दिन रहने के बाद देर रात दो बजे अमावस्या तिथि समाप्त हो जाएगी। यानि सोमवार को पूरे दिन और रात अमावस्या तिथि रहेगी। सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में डुबकी लगाकर स्नान करना अत्यधिक पुण्यदायी माना जाएगा। इस दिन तीर्थ स्थल पर स्नान किया जाता है। गंगा, सिंधु, कावेरी, यमुना, नर्मदा या फिर कोई भी पवित्र नदी में स्नान करने का अनंत गुना फल सोमवती अमावस्या को मिलता है।

कथा: वैसे तो सोमवती अमावस्या की कई कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन जिसे प्रायः सोमवती अमावस्या के दिन व्रती महिलाएं सुनती हैं वह कथा कुछ इस प्रकार है। बहुत समय पहले किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। ब्राह्मण की एक कन्या भी थी। कन्या जवान होने लगी तो उसके माता-पिता को विवाह की चिंता होने लगी। घर की आर्थिक स्थिति खास नहीं थी फिर विवाह करना था। ब्राह्मण प्रभु का भक्त था लेकिन भगवान जाने किस जन्म के कर्मों की सजा दे रहे थे जो इतनी दरिद्रता और चिंता उसे थी। कहते हैं कि एक दिन एक साधु उनके यहां पंहुचे। अपनी क्षमता के अनुसार वह ब्राह्मण साधु का सत्कार किया। इसी बीच वह साधु भक्त की परेशानी को भी भांप लिया और चिंता का कारण पूछा।

ब्राह्मण ने अपनी समस्या बता दी। साधु ने पुत्री को पास बुलाया। लड़की को देखा और अपनी आंखे बंद कर ली कुछ देर बाद आंखे खोली तो बोले कि इसके भाग्य में तो विवाह के योग ही नहीं है। ब्राह्मण बोले हे साधु महाराज जब आपने समस्या बताई है तो कोई न कोई समाधान भी अवश्य होगा। साधु बोले समाधान तो है पर क्या आपकी पुत्री वह कर पायेगी इसमें मुझे संदेह है। ब्राह्मण बोले महाराज आप उपाय बतायें, मैं आपसे कहता हूं वह हर संभव प्रयास करेगी। वह बड़ी नेकदिल और धर्म परायण लड़की है। साधु महाराज बोले तो सुनो यहां से कुछ दूर सोना नाम की एक महिला अपने परिवार के साथ रहती है यदि यह लड़की उसे प्रसन्न कर आशीर्वाद स्वरूप उसकी मांग का सिंदूर उससे ले सके तो इसका भाग्य बदल सकता है। पिता ने लड़की को यह बात बता दी।

अब लड़की नित्य सोना के घर जाती और किसी के जागने से पहले ही घर का सारा कामकाज निपटा कर घर लौट आती। उधर सोना हैरान की बहु को अचानक क्या हुआ उठती हूं तो सारा काम किये मिलती है। बहु सोचती कि सास को क्या हो गया है हमारे उठने से पहले ही सारा काम निपटा देती है। एक दिन दोनों ने पूछ ही लिया तो पता चला कि कोई ओर ही है जो इसे अंजाम दे रहा है। फिर क्या था पहरा शुरु हो गया। ब्राह्मण की लड़की जैसे ही घर आई सोना ने उसे पकड़ लिया और पूछा कि माजरा क्या है। इतनी मेहनत कर रही हो कोई न कोई वजह तो जरुर होगी। तब लड़की ने अपनी पीड़ा उसे बता दी। सोना थी थोड़े कठोर स्वभाव की लेकिन अंदर से बिल्कुल कोमल, सच्ची भक्त, धर्म पर डटी रहने वाली, पतिव्रता स्त्री थी। उसने उसकी मदद के लिये आशीर्वाद स्वरूप अपना सिंदूर दे दिया।

वह दिन था सोमवती अमावस्या का। अब हुआ यूं कि सोना के सिंदूर देते ही उसके पति की तबीयत खराब हो गई। सोना निर्जला थी दौड़ी-दौड़ी पीपल के पेड़ के पास पंहुची और हाथ जोड़कर परिक्रमा करने लगी। अर्पित करने के लिये कुछ था नहीं तो कुछ कंकर जमा किये और उन्हें ही अर्पित करने लगी। जैसे ही सोना ने 108 परिक्रमा पूरी की, पति की चेतनता लौटने लगी। मान्यता है कि उस दिन से सोमवती अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ गया। सोना के आशीर्वाद से ब्राह्मण की लड़की का भाग्य भी बदल गया और उसे एक योग्य वर मिला जिसके साथ वह सुख पूर्वक रहने लगी। बेटी की चिंता से मुक्त होकर ब्राह्मण परिवार भी सुखमय जीवन व्यतीत करने लगा। इस प्रकार सोमवती अमावस्या का महत्व बहुत ही अधिक है।

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