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जानिए, पूजा-पाठ में क्या है श्रीयंत्र का महत्व और पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए स्फटिक का श्रीयंत्र उत्तम होता है। श्री का अर्थ होता है धन और यंत्र का मतलब होता है साधन, यानि धन प्राप्त करने का साधन यह यंत्र माना गया है।

Author नई दिल्ली | February 14, 2019 6:22 PM
श्रीयंत्र और मां लक्ष्मी।

श्रीयंत्र को माता लक्ष्मी का यंत्र माना जाता है। देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस यंत्र की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए स्फटिक का श्रीयंत्र उत्तम होता है। श्री का अर्थ होता है धन और यंत्र का मतलब होता है साधन, यानि धन प्राप्त करने का साधन यह यंत्र माना गया है। कहते हैं कि इसका विधि पूर्वक पूजन कर घर, ऑफिस या पूजा स्थल पर रखने से वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। क्या आप जानते हैं कि श्रीयंत्र का पूजा-पाठ में क्या महत्व है? साथ ही इसकी पूजा-विधि क्या है? यदि नहीं तो आगे हम इसे जानते हैं।

श्रीयंत्र को शुक्रवार के दिन स्थापित करना शुभ माना गया है। इसे शुक्रवार के दिन शुभ मुहूर्त में साफ पानी में धोकर पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराकर पूजा स्थान पर पीले कपड़े में रखना चाहिए। इसके बाद कच्ची हल्दी और फूल श्रीयंत्र के ऊपर चढ़ाएं। इसके बाद अष्टगंध की टीका लगाएं और शुद्ध घी का दीपक सामने जलाकर श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए। श्री यंत्र की पूजा प्रत्येक शुक्रवार को करनी चाहिए। कहते हैं कि श्रीयंत्र ऐसा माध्यम है जिससे मनुष्य के जीवन में समस्त नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। श्री यंत्र को बनवाने के बाद शुभ समय में इसका पूजन आरंभ करना चाहिए और उसके बाद नियमित रुप से इसकी पूजा करनी चाहिए।

सबसे पहले व्यक्ति को स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके स्वच्छ आसन पर बैठना चाहिए। अब श्री यंत्र को पंचामृ्त अर्थात कच्चा दूध, दही, शहद, शुद्ध घी तथा गंगाजल से स्नान कराना चाहिए.  इसके बाद ईशान कोण में एक आसन पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर श्री यंत्र को स्थापित करना चाहिए. अब यंत्र की पूजा करनी चाहिए. श्रीसूक्त, कनकधारा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा सकता है. श्रीयंत्र की प्राण प्रतिष्ठा के लिए निम्नलिखित मंत्र का 21 माला जप करना चाहिए. मंत्र है:- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नम्:”, “ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महा लक्ष्म्यै नम्:” यह श्रीयंत्र का मूलमंत्र है। अपनी किसी भी अभीष्ट सिधि के लिए इस मंत्र की एक माला का जाप प्रतिदिन करना चाहिए। श्री यंत्र के सामने शुद्ध घी का दीया जलाकर लक्ष्मी जी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इसे कोई भी मनुष्य अपने आफिस अथवा घर में विधिपूर्वक स्थापित कर सकता है।

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