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संकष्टी चतुर्थी 2018 पूजा मुहूर्त: जानिए किस मुहूर्त में संकष्टी की पूजा करना रहेगा शुभ

Sankashti Chaturthi 2018 Puja Muhurat, Pooja Vidhanam: दक्षिण भारत में इस पर्व को अधिक महत्वता के साथ मनाया जाता है।
Sankashti Chaturthi 2018 Puja Vidhi, Muhurat: संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चांद देखने के बाद ही खोला जाता है।

भगवान गणेश की पूजा के लिए हर माह संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। हिंदू पंचाग के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्थ को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह 13 संकष्टी आती हैं जिसमें से साल में दो बार संकष्टी मंगलवार के दिन होती है। मंगलवार को होने वाली चतुर्थी को अंगाकारी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। दक्षिण भारत में इस पर्व को अधिक महत्वता के साथ मनाया जाता है। संकष्टी चतुर्थी को संकट हारा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। अंगारकी चतुर्थी छः माह में एक बार आती है और इस दिन व्रत करने पर पूरे वर्ष की संकष्टी का लाभ मिलता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा वैदिक मंत्रों द्वारा की जाती है। संकष्टी के दिन चांद की रौशनी पड़ने पर गणपति के अथर्वाशेष पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है।

संकष्टी चतुर्थी का व्रत रात में चांद देखने के बाद ही खोला जाता है। इस दिन के लिए मान्यता है कि ऋषि भारद्वाज और माता पार्वती का पुत्र अंगारक एक महान ऋषि और भगवान गणेश के भक्त थे। उन्होनें भगवान गणेश की पूजा करके उनसे आशीर्वाद मांगा। माघ कृष्ण चतुर्थी के दिन भगवान गणेश ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उनसे वरदान मांगने के लिए कहा। उन्होनें अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि उनका नाम हमेशा के लिए भगवान गणेश से जुड़ जाए। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करता है और उनका व्रत करता है उसके सभी संकट खत्म हो जाते हैं।

इस दिन व्रत रखने वाले लोग सूर्योदय से लेकर रात को चांद के निकलने तक भोजन नहीं ग्रहण करते हैं। इस दिन चांद निकलने के बाद ही रात्रि में ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद ही व्रत खोला जाता है। 5 जनवरी को संकष्टी की पूजा को विधि के साथ करने पर ही वो लाभदायक होती है। साथ ही इस पूजा को शुभ मुहूर्त में करें। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 22 मिनट के बाद शुरु होगा। पूजा के समय ध्यान रखें कि इस दिन की कथा का पाठ अवश्य करें।

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