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रावण संहिता: श्रीराम ने युद्ध में जीतने के लिए मांगा था रावण से आशीर्वाद, जानिए क्यों?

राम जी को जब रावण को हारने के लिए लंका जाना था तो उन्होंने एक रात पहले यज्ञ की तैयारी की। फिर रामेश्वरम में भगवान शिव की आराधना करने का निश्चय किया।

Author नई दिल्ली | February 4, 2019 11:43 AM
फोटो क्रेडिट- यूट्यूब।

महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित रामायण महाकाव्य में रावण का सबसे प्रामाणिक इतिहास मिलता है। हिन्दू धर्म को मानने वाले प्रायः सभी लोग राम, सीता और रावण को अच्छी तरह से जानते होंगे। लेकिन रावण से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य हैं जिसे शायद बहुत लोग नहीं जानते होंगे। कहा जाता है कि श्रीराम ने युद्ध में जीतने के लिए रावण से आशीर्वाद मांगा था। हालांकि इस बात को सुनकर आपको भी कमोवेश आश्चर्य होगा। परंतु इस घटना का वर्णन रावण संहिता में मिलता है। जानते हैं कि आखिर क्या कारण था कि श्रीराम ने रावण से आशीर्वाद मांगा था?

रावण संहिता को एक महत्वपूर्ण पुस्तक माना जाता है। कहते हैं कि इसकी रचना खुद रावण ने की थी। रावण के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह तीनों लोकों का स्वामी था। उसने न केवल इंद्र पर बल्कि भू लोक के एक बड़े हिस्से पर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए कब्जा कर रखा था। रावण अपने समय का सबसे बड़ा विद्वान माना जाता है। रामायण में उल्लेख मिलता है कि जब वह मृत्यु शैय्या पर लेता हुआ था, तब राम जी ने लक्ष्मण को उसके पास जाकर बैठने के लिए कहा था। ताकि मारने से पहले उनको राजपाट चलाने और नियंत्रण करने के गुर सिखा सके।

रावण की कुछ तस्वीरों में आपने रावण को वीणा बजाते हुए देखा होगा। भारत का क्लासिकल वाद्य यंत्र रुद्रवीणा की खोज रावण ने ही की थी। एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण को संगीत का बहुत शौक था। साथ ही वह वीणा बजाने में बहुत माहिर था। ऐसा कहा जाता है कि रावण वीणा इतना मधुर बजाता था कि देवता भी उसकी संगीत सुनने के लिए धरती पर आ जाते थे। मान्यता यह भी है कि रावण इतना अधिक शक्तिशाली था कि उसने नौ ग्रहों को भी अपनी वश में कर लिया था।

राम जी को जब रावण को हारने के लिए लंका जाना था तो उन्होंने एक रात पहले यज्ञ की तैयारी की। फिर रामेश्वरम में भगवान शिव की आराधना करने का निश्चय किया। अब वे जब सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से युद्ध करने जा रहे थे तो उन्हें एक विद्वान पंडित की आवश्यकता थी। उन्हें जानकारी मिली कि रावण खुद एक बड़ा विद्वान है तब श्रीराम ने रावण को यज्ञ करने के लिए निमंत्रण भेजा। रावण शिव जी के यज्ञ के लिए माना नहीं कर सकता था। क्योंकि वह शिव का सबसे बड़ा भक्त था। इस प्रकार रावण रामेश्वरम पहुंचा और शिव जी का यज्ञ पूरा किया। इतना ही नहीं जब यज्ञ पूरा हुआ तब राम जी ने रावण को हराने के लिए आशीर्वाद भी मांगा। जिसके जवाब में रावण ने तथास्तु कहा था।

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