हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। रामायण के अनुसार इस दिन प्रभु श्री राम का अयोध्या में दशरथ के घर पर राल लला का जन्म हुआ था। इसी के कारण हर साल इसदिन धूमधाम से राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल राम नवमी का पर्व आज और 27 मार्च को मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर आप चाहे, तो घर पर ही रहकर भगवान राम की विधिवत पूजा पाठ कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से श्री राम के साथ-साथ हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। राम नवमी पर प्रभु श्री राम की पूजा, मंत्र, कथा, चालीसा आदि का पाठ करने के साथ-साथ इस स्तुति का पाठ भी करना चाहिए। माना जाता है कि इस स्तुति का पाठ करने से भगवान राम के साथ श्री हनुमान की भी कृपा प्राप्त होती हैं और हर एक बाधा से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानते हैं श्री राम की संपूर्ण स्तुति।
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श्री राम स्तुति
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख
कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं ॥२॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥
शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥
इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं ॥५॥
मन जाहि राच्यो मिलहि सो
वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो ॥६॥
एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥
॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
