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Krishna Janmashtami 2018 Puja Vidhi, Samagri, Muhurat: यहां पढ़ें जन्माष्टमी व्रत विधि, इस विधि से करें पूजा, होगी मनोकामना पूरी

Shri Krishna Janmashtami 2018 Puja Vidhi, Puja Muhurat, Puja Samagri List, Vrat Katha, Timings, Time, Process and Method: जन्माष्टमी के दिन कई लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं। जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं उन्हें सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और मन में भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जाप करना चाहिए।

Author नई दिल्ली | September 4, 2018 6:10 AM
Shri Krishna Janmashtami 2018 Puja Vidhi, Muhurat: भगवान श्री कृष्ण की पूजा में कई चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।

Shri Krishna Janmashtami 2018 Puja Vidhi, Puja Muhurat, Puja Samagri List, Vrat Katha, Timings, Process: हिंदू मान्यता के अनुसार भादो माह की अष्टमी को भगवान कृष्ण का जन्म माना जाता है। इस दिन को जन्माष्टमी के रूप में दुनिया भर में मनाया जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार कृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार हैं। इन्होंने धरती को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए धरती पर जन्म लिया था। अपने बालपन में ही उन्होंने अनेक राक्षसों का संहार कर दिया था। किशोरावस्था में भगवान ने अपने मामा कंस का वध कर धरती को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथि बने थे। उन्होंने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। जो हिंदुओं का पवित्र ग्रंथ भी है।

देशभर में जन्माष्टमी के दिन सभी मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है। रात में 12 बजे जन्माष्टमी का व्रत खोलना शुभ माना जाता है। इस साल 3 सिंतबर, दिन सोमवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। इसके लिए मंदिरों को अच्छी तरह से साफ किया गया है और मंदिरों को बहुत ही भव्य रूप से सजाया गया है। घरों में भी पूजा के स्थान की अच्छे से सफाई कर उसे सजाया गया है। अर्धरात्रि को पूजा-पाठ के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। जिसके बाद भक्त प्रसाद खाकर व्रत तोड़ते हैं।

जन्माष्टमी की एक और खास बात यह है कि यह केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में मनाई जाती है। भारत के अलावा दुनिया के अन्य कोनों में रह रहे हिंदू धर्म के लोग बड़ी ही श्रद्धाभाव के साथ इसे सेलिब्रेट करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में हर साल, इसी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र योग की अवधि श्री कृष्णाष्टमी अर्थात श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्त व्रत भी रखते हैं। जन्माष्टमी व्रत के कुछ खास विधान होते हैं। इनका पालन करके ही सही फल प्राप्त किया जा सकता है। आइए, जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी व्रत की सही विधि क्या है –

यह है व्रत विधि: व्रत की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करना चाहिए और इस दिन शारीरिक संबंध भी नहीं बनाने चाहिए। व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद जल, फल, कुश लेकर व्रत का संकल्प करें। संकल्प करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और पूजन करें। पूजा में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंदू, यशोदा, लक्ष्मी का नाम लेना ना भूलें।

पूजा सामग्री: भगवान श्री कृष्ण की पूजा में कई चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। भगवान कृष्ण की मूर्ति, उनका सिंहासन, पीपल, केले और आम के पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। दीपक के लिए तेल। पूजा में धूप बत्ती या अगरबत्ती का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। चावल, हल्दी, आभूषण, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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जन्माष्टमी के दिन कई लोग निर्जल व्रत भी रखते हैं। जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं उन्हें सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और मन में भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जाप करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में ”ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥” मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान फल, जल और फूल लेकर इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

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