गोपेश्वर महादेव में गोपी के रूप में विराजमान हैं भगवान शिव

वृंदावन का नाम सुनते ही लोगों के मन में भगवान कृष्ण और राधा रानी का खयाल आता है, लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है, जो भगवान श्रीकृष्ण का नहीं बल्कि भगवान शिव शंकर का है।

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गोपेश्वर महादेव।

वृंदावन का नाम सुनते ही लोगों के मन में भगवान कृष्ण और राधा रानी का खयाल आता है, लेकिन यहां एक ऐसा मंदिर भी है, जो भगवान श्रीकृष्ण का नहीं बल्कि भगवान शिव शंकर का है। इस मंदिर में महादेव कृष्ण की गोपी के रूप में विराजमान हैं और प्रतिदिन उनका महिलाओं की तरह सोलह शृंगार किया जाता है। बताया जाता है कि यह विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां महादेव महिला के रूप में विराजमान हैं। दूर-दूर से भक्त यहां महादेव के गोपी रूप के दर्शन करने आते हैं। इन्हें ‘गोपेश्वर महादेवह्ण के नाम से जाना जाता है। गोपेश्वर महादेव मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि यहां मौजूद शिवलिंग की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी।

इसकी स्थापना के पीछे प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज की गोपियों के साथ महारास किया। इस मनोहर दृश्य का साक्षी हर देवी और देवता बनना चाहता था। भगवान विष्णु को अपना आराध्य मानने वाले महादेव शिव भी उनके महारास को देखने के लिए पृथ्वी लोक में आए तो उन्हें गोपियों ने शामिल नहीं होने दिया क्योंकि इस महारास में केवल महिलाएं ही शामिल हो सकती थीं। यह जानकर मां पार्वती ने उन्हें गोपी के रूप में महारास में शामिल होने का सुझाव दिया।

इसके लिए भगवान शिव ने यमुना जी की मदद ली। यमुना जी ने उनका गोपी के रूप में शृंगार किया और महादेव महारास में शामिल हो सके। लेकिन, इस रूप में कृष्ण भगवान ने उन्हें पहचान लिया और महारास के बाद स्वयं अपने आराध्य महादेव शिव की पूजा की और उनसे इसी रूप में ब्रज में रह जाने का आग्रह किया। राधा रानी ने महादेव के गोपी रूप को ‘गोपेश्वर महादेव’ नाम दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने कालिंदी के निकट निकुंज के पास, वंशीवट के सम्मुख भगवान महादेव को श्रीगोपेश्वर महादेव के नाम से स्थापित कर विराजमान कर दिया। तब से लेकर आज तक गोपेश्वर महादेव के मंदिर में उनकी पूजा-अर्चना जारी है। महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भक्तों की खासी भीड़ जुटती है। इस मंदिर परिसर में एक पीपल का पेड़ है। कहा जाता है कि यह पेड़ सभी इच्छाएं पूरी करता है इसलिए इस पेड़ को ‘कल्पवृक्ष’ भी कहा जाता है। जब भी वृंदावन जाना हो तो श्री गोपेश्वर महादेव का जरूर दर्शन किया जाना चाहिए। श्री गोपेश्वर महादेव का दर्शन और उनकी कथा का चिंतन करने से श्रीकृष्ण की भक्ति में प्रगाढ़ता आती है।

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