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श्रीकृष्ण को आया जब तेज बुखार, फेल हुए सारे इलाज; तब राधा लाईं 100 छेद वाले घड़े का पानी, जानिए पूरी कहानी

एक बार जब श्रीकृष्ण को तेज बुखार आया तो सब परेशान हो गए थे। इलाज कराया लेकिन उन्हें आराम नहीं मिला तब उन्होंने ही खुद के ठीक होने का एक अचूक उपाया बताया।

Author Edited By मोहनी गिरी नई दिल्ली | Updated: June 26, 2020 12:05 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर

सदियां बीत गईं लेकिन जब भी प्यार की बात आती है तो राधा और कृष्ण के प्रेम की मिसाल दी जाती है। इनके प्रेम की डोर इतनी विशाल है कि जितनी बार समझी जाए उतने ही नए रहस्य आपको जानने को मिलेंगे। भले ही श्रीकृष्ण ने देवी लक्ष्मी की अवतार रुक्मिणी से शादी की हो लेकिन राधा की जगह उनकी तीनों पटरानियों में से कोई नहीं ले सका। यहां हम राधा के सच्चे प्रेम का एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं जिसे आपने पहले शायद कभी नहीं सुना होगा। यह कहानी आपको धार्मिक ग्रंथों में भी पढ़ने को मिलेगी।

शास्त्रों का वर्णन करते हुए HG मधुमंगल प्रभु कहते हैं एक बार जब श्रीकृष्ण को तेज बुखार आया तो सब परेशान हो गए थे। इलाज कराया लेकिन उन्हें आराम नहीं मिला तब उन्होंने ही खुद के ठीक होने का एक अचूक उपाया बताया। कृष्ण ने कहा, अगर कोई स्त्री मेरे लिए 100 छेद वाले मिट्टी के घड़े में पानी भरकर लाती है तो मेरा बुखार ठीक हो जाएगा।

तब सब सोच में पड़ गए भला ऐसी कौन सी स्त्री होगी जो 100 छेद वाले घड़े में पानी भरकर ला सके। फिर श्रीकृष्ण ने बताया जो स्त्री पूर्ण शुद्ध हो, जो असली सती हो, जिसके मन में अपने प्रेमी के अलावा किसी पराए व्यक्ति के बारे में सपने में भी कोई ख्याल न आया हो, जो सिर्फ अपने पुरुष की सेवा में लीन हो और उसी का चिंतन करती हो। वो स्त्री ऐसे घड़े में पानी भरकर ला सकती है।

कृष्ण की ये बातें सुनकर किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि ऐसी भी कोई स्त्री होगी लेकिन राधा रानी असली प्रेमिका थीं। जो 100 छेद वाले घड़े में पानी लाईं और शीतल जल पिलाकर कृष्ण का बुखार ठीक किया। ऐसा निर्मल है कृष्ण के प्रति राधा का प्रेम। राधा कहती हैं कि काम अंधकार है और प्रेम निर्मल सूर्य है जो हर जगह अपना प्रकाश फैलाता है।

सूर्य कभी ये नहीं सोचता कि कौन उसका शत्रु और कौन मित्र है। वह हर स्थान पर अपनी किरणों का उजाला फैलाता है। ठीक वैसे ही कृष्ण के लिए राधा का प्रेम है। भले ही कृष्ण ने उन्हें छोड़कर रुक्मणि, सत्यभामा और जामवंती से शादी रचा ली हो लेकिन राधा का प्रेम अपने प्रीतम के लिए कभी कम नहीं हुआ। क्योंकि वो सिर्फ कृष्ण की खुशी चाहती थीं, इसलिए उन्होंने विरह में भी उनसे प्रेम किया।

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