Rudraksha Benefits: श्रीमद्-देवीभागवत में कहा गया है कि “रुद्राक्षधारणाद्य श्रेष्ठं न किञ्चिदपि विद्यते” यानी संसार में रुद्राक्ष धारण करने से बढ़कर श्रेष्ठ कोई दूसरा काम या फिर वस्तु नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष उत्पन्न हुआ था। रुद्राक्ष का उल्लेख शिव पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण सहित अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। सामान्यतः रुद्राक्ष एक मुखी से चौदह मुखी तक पाए जाते हैं और हर एक रुद्राक्ष का अपना एक अलग-अलग महत्व है। आइए जानते हैं किन राशियों को कौन सा रुद्राक्ष पहनना चाहिए और पहनने की विधि सहित अन्य जानकारी…

शिव पुराण की रुद्र संहिता में विभिन्न मुखों के रुद्राक्षों का वर्णन मिलता है। प्रत्येक मुख को किसी देवता या ग्रह से जोड़ा गया है। यह संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है।

रुद्राक्ष क्या है?

वैज्ञानिक तथ्यों की बात करें, तो  रुद्राक्ष वास्तव में Elaeocarpus ganitrus नामक वृक्ष का बीज है। यह वृक्ष मुख्य रूप से नेपाल, भारत (विशेषकर हिमालयी क्षेत्र, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड), इंडोनेशिया और कुछ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाया जाता है। नेपाली रुद्राक्ष प्रायः आकार में बड़े और स्पष्ट मुख (रेखाओं) वाले होते हैं। इंडोनेशिया रुद्राक्ष आकार में छोटे होते हैं और उनके मुख अपेक्षाकृत पतले दिखाई देते हैं।

रुद्राक्ष मुख (Faces) क्या होते हैं?

रुद्राक्ष के ऊपर प्राकृतिक रूप से बनी रेखाओं को ‘मुख’ कहा जाता है। जितनी स्पष्ट रेखाएं होंगी, उतने ही मुख माने जाते हैं। बाजार में सामान्यतः 1 मुखी से 14 मुखी रुद्राक्ष आसानी से उपलब्ध होते हैं।

शिव पुराण में रुद्राक्ष का महत्व

शिव पुराण के विद्येश्वर संहिता भाग के अध्याय 25 में रुद्राक्ष के महत्व में स्वयं भगवान शिव ने मां पार्वती विस्तार से बताया है। इसके अनुसार, भगवान शिव बोले कि हे देवी! कठोर तपस्या करने के लिए मैं हिमालय के रमणीय शिखरों की कंदराओं में गया। वहां एकांत स्थान पर मैंने अपने नेत्र बंद कर लिए और समाधि में लीन हो गया। बहुत वर्षों तक मैंने नेत्र नहीं खोले। जब तप पूर्ण हुआ और मैंने नेत्र खोले तो नेत्रों से आंसुओं की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। उन बूंदों से वृक्ष उत्पन्न हुए। उन्हीं वृक्षों को रुद्राक्ष कहा गया। ‘रुद्र’ मेरा नाम है और ‘अक्ष’ का अर्थ नेत्र है, इस प्रकार वे रुद्राक्ष कहलाए।

रुद्राक्ष धारण करने से मिलते हैं ये लाभ

भगवान शिव आगे कहते हैं कि इन रुद्राक्ष का महात्म्य इतना बड़ा है कि जो भी श्रद्धा से इन्हें धारण करता है, उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। रुद्राक्ष के दर्शन, स्पर्श, जप और धारण मात्र से ही मनुष्य को अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। जो मनुष्य गले में रुद्राक्ष धारण करता है, वह मृत्यु के पश्चात शिवलोक को प्राप्त होता है। जो हाथ में धारण करता है, वह विशेष पुण्य का भागी बनता है। जो मस्तक पर धारण करता है, उसे देवताओं के समान आदर मिलता है।

हे देवी! यदि कोई मनुष्य बिना श्रद्धा के भी रुद्राक्ष धारण कर ले, तो भी उसे उसका फल अवश्य मिलता है। रुद्राक्ष धारण करने से रोग, शोक, भय और क्लेश दूर होते हैं। रुद्राक्ष पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला है। इसके समान कोई दूसरा साधन नहीं है।

जानें किस रुद्राक्ष को धारण करने से क्या मिलता है लाभ?

1 मुखी – इस रुद्राक्ष को शिव का स्वरूप माना जाता है। इसका संबंध सूर्य से है। इसे धारण करने से आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है।

2 मुखी – इसे अर्धनारीश्वर स्वरूप माना जाता है। इसका चंद्र से संबंध है। इसे धारण करने से हर किसी से संबंध अच्छे होते हैं और मानसिक संतुलन सही रहता है।

3 मुखी – इसे अग्नि देव और मंगल ग्रह से संबंधित माना जाता है। इसे नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।

4 मुखी – इसे भगवान ब्रह्मा और बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है। इसे बुद्धि और वाणी से जुड़ा होता है।

5 मुखी – सबसे सामान्य बृहस्पति से संबंधित है। इसे आध्यात्मिक उपयोग के लिए अच्छा माना जाता है।

6 मुखी – इस रुद्राक्ष को कार्तिकेय और शुक्र से संबंधित माना जाता है। इसे धारण करने से आत्मविश्वास और आकर्षण पर बल मिलता है।

7 मुखी – इसे मां लक्ष्मी और शनि ग्रह से संबंधित माना जाता है। इसे धारण करने से आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है।

8 मुखी – इस रुद्राक्ष को भगवान गणेश और राहु से संबंधित माना जाता है। इसे बाधा निवारण का प्रतीक माना जाता है।

9 मुखी – 9 मुखी रुद्राक्ष को नवदुर्गा और केतु से संबंधित माना जाता है। इसे धारण करने से साहस और शक्ति में बढ़ोतरी होती है।

10 मुखी – इसे विष्णु स्वरूप माना जाता है। इसे शांति और सुरक्षा का प्रतीक कहते हैं।

11 मुखी – इसे रुद्र स्वरूप और हनुमान जी से संबंधित माना जाता है। इसे धारण करने से साहस और संरक्षण में बढ़ोतरी होती है।

12 मुखी – इसे सूर्य से संबंधित माना माना जाता है। ये स्वरूप तेज और नेतृत्व का प्रतीक है।

13 मुखी – कामदेव और इंद्र देव से संबंधित है, जो आकर्षण से जुड़ा है।

14 मुखी – शिव के तृतीय नेत्र से संबंधित है। इसे उच्च आध्यात्मिकता का प्रतीक के रूप में माना जाता है।

रुद्राक्ष धारण करने का समय

शास्त्रों के अनुसार, रुद्राक्ष को महाशिवरात्रि, सावन मास या शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण करना शुभ माना जाता है। धारण से पहले स्नान करें और रुद्राक्ष की विधिवत पूजा करने के साथ ऊं नमः शिवाय मंत्र का जप करें।

रुद्राक्ष के प्रकार, स्वामी ग्रह और उनके लाभ

रुद्राक्षस्वरूप/देवतासंबंधित ग्रहप्रमुख लाभ
1 मुखीभगवान शिवसूर्यआत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि।
2 मुखीअर्धनारीश्वरचंद्रमासंबंधों में सुधार और मानसिक संतुलन।
3 मुखीअग्नि देवमंगलनकारात्मकता से मुक्ति और ऊर्जा का संचार।
4 मुखीभगवान ब्रह्माबुधबुद्धि, एकाग्रता और वाणी में सुधार।
5 मुखीकालाग्नि रुद्रबृहस्पतिआध्यात्मिक विकास और मानसिक शांति।
6 मुखीभगवान कार्तिकेयशुक्रआकर्षण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि।
7 मुखीमाता लक्ष्मीशनिआर्थिक समृद्धि और शनि दोषों से राहत।
8 मुखीभगवान गणेशराहुकार्यों में आने वाली बाधाओं का निवारण।
9 मुखीमाँ नवदुर्गाकेतुसाहस, शक्ति और निडरता का संचार।
10 मुखीभगवान विष्णुमानसिक शांति और चारों ओर से सुरक्षा।
11 मुखीहनुमान जी / रुद्रसाहस और सुरक्षात्मक शक्ति में वृद्धि।
12 मुखीभगवान सूर्यसूर्यचेहरे का तेज, ओज और मान-सम्मान।
13 मुखीकामदेव / इंद्रआकर्षण और सांसारिक सुखों की प्राप्ति।
14 मुखीशिव का तृतीय नेत्रउच्च आध्यात्मिकता और अंतर्ज्ञान।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर काफी शुभ राजयोगों का निर्माण होने वाला है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण, शुक्रादित्य से लेकर नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा, जिससे 12 में से इन तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। जानें इन लकी राशियों के बारे में

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डिस्क्लेमर (Disclaimer)- इस लेख में दी गई रुद्राक्ष से संबंधित जानकारी शिव पुराण, अन्य धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। रुद्राक्ष के प्रभाव व्यक्ति की श्रद्धा, शारीरिक प्रकृति और ग्रह स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण कराएं और किसी योग्य ज्योतिषी या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। यह वेबसाइट/लेखक लेख में दी गई जानकारी की पूर्ण सटीकता या इसके परिणामों की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं लेता है।