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Sheetla Mata Puja 2020: शीतला अष्टमी की कथा, आरती, मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र यहां देखें

Sheetla Ashtami Puja Vidhi, Katha, Story, Aarti, Mantra, Kahani: शीतला अष्टमी को बसौड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग बासी खाने का मां को भोग लगाते हैं और खुद भी उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इस दिन के बाद से गर्मी का आरंभ माना जाता है और गर्मियों में बासी भोजन नहीं खाया जाता।

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Sheetla Mata Ki Katha, Aarti, Puja Vidhi, Kahani, Story, Mantra, Mandir: आज शीतला अष्टमी (Sheetala Ashtami 2020) है। जिसे बसौड़ा पूजा (Basoda Puja) के नाम से भी जाना जाता है। शीतला पूजा हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ती है। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। अष्टमी तिथि ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है। इस बदलाव से बचने के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस दिन लोग बासी खाने का मां को भोग लगाते हैं और खुद भी उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इस दिन के बाद से गर्मी का आरंभ माना जाता है और गर्मियों में बासी भोजन नहीं खाया जाता।

शीतला अष्टमी का शुभ मुहूर्त (Shitla Ashtami Muhurat And Time):

शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त – 06:10 ए एम से 06:04 पी एम
अवधि – 11 घण्टे 54 मिनट्स
अष्टमी तिथि प्रारम्भ – मार्च 16, 2020 को 03:19 ए एम बजे
अष्टमी तिथि समाप्त – मार्च 17, 2020 को 02:59 ए एम बजे

शीतला माता की कथा (Sheetla Mata Ki Katha):

हिंदू धर्म में प्रसिद्ध कथा के अनुसार एक दिन बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा. मान्यता के मुताबिक इस व्रत में बासी चावल चढ़ाए और खाए जाते हैं. लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह ताज़ा खाना बना लिया. क्योंकि हाल ही में दोनों की संताने हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना पहुंचाए. सास को ताज़े खाने के बारे में पता चला तो वो बहुत नाराज़ हुई. कुछ क्षण ही गुज़रे थे, कि पता चला कि दोनों बहुओं की संतानों की अचानक मृत्यु हो गई. इस बात को जान सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया.

शवों को लेकर दोनों बहुएं घर से निकल गईं. बीच रास्ते वो विश्राम के लिए रूकीं. वहां उन दोनों को दो बहनें ओरी और शीतला मिली. दोनों ही अपने सिर में जूंओं से परेशान थी. उन बहुओं को दोनों बहनों को ऐसे देख दया आई और वो दोनों के सिर को साफ करने लगीं. कुछ देर बाद दोनों बहनों को आराम मिला, आराम मिलते ही दोनों ने उन्हें आशार्वाद दिया और कहा कि तुम्हारी गोद हरी हो जाए.

ये बात सुन दोनों बुरी तरह रोने लगीं और उन्होंने महिला को अपने बच्चों के शव दिखाए. ये सब देख शीतला ने दोनों से कहा कि उन्हें उनके कर्मों का फल मिला है. ये बात सुन वो समझ गईं कि शीतला अष्टमी के दिन ताज़ा खाना बनाने की वजह से ऐसा हुआ.

ये सब जान दोनों ने माता शीतला से माफी मांगी और आगे से ऐसा ना करने को कहा. इसके बाद माता ने दोनों बच्चों को फिर से जीवित कर दिया. इस दिन के बाद से पूरे गांव में शीतला माता का व्रत धूमधाम से मनाए जाने लगा.

शीतला अष्टमी की पूजा विधि, आरती, मंत्र और सभी जानाकारी जानने के लिए बने रहिए हमारे इस ब्लॉग पर…

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Highlights

    11:45 (IST)16 Mar 2020
    शीतला अष्टमी का महत्व...

    भगवती शीतला माता की पूजा-अर्चना का विधान भी अनोखा होता है। शीतलाष्टमी के एक दिन पहले उन्हें भोग लगाने के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए जाते हैं। अष्टमी के दिन ये बासी पकवान ही देवी को नैवेद्ध के रूप में समर्पित किए जाते हैं। लोकमान्यता के अनुसार आज भी अष्टमी के दिन कई घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और सभी भक्त ख़ुशी-ख़ुशी प्रसाद के रूप में बासी भोजन का ही आनंद लेते हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि इस समय से ही बसंत की विदाई होती है और ग्रीष्म का आगमन होता है, इसलिए अब यहां से आगे हमें बासी भोजन से परहेज करना चाहिए।

    11:32 (IST)16 Mar 2020
    शीतला माता मंदिर गुड़गाँव (Shitla Mata Mandir):-

    गुड़गाँव में स्थित है शीतला माता मंदिर, नवरात्रि के दिनों में माता के दर्शनों के लिए इस मंदिर में भक्तों की काफ़ी भीड एकत्रित होती है। मान्यता के अनुसार यहां पूजा करने से शरीर पर निकलने वाले दाने 'माता' या चेचक नहीं निकलते हैं। इसके अलावा नवजात शिशुओं के बालों का प्रथम मुंडन भी यहां पर कराया जाता है।

    11:16 (IST)16 Mar 2020
    शीतला माता की आरती (Shitla Mata Aarti):

    जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता...

    रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता...

    विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता । जय शीतला माता...

    इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता...

    घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता...

    ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता...

    जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता...

    रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता...

    बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता। जय शीतला माता...

    शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता...

    दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,भक्ति आपनी दीजे और न कुछ भाता।जय शीतला माता...।

    10:48 (IST)16 Mar 2020
    बासी भोजन का क्यों लगाया जाता है भोग?

    शीतला माता को मुख्‍य रूप से चावल और घी का भोग लगाया जाता है। मगर चावल शीतला अष्टमी से एक दिन पहले बना लिये जाते हैं। मान्‍यता है कि शीतला अष्‍टमी के दिन घर में चूल्‍हा नहीं जलाना चाहिए और न ही घर में खाना बनाना चाहिए। इसलिए एक दिन पहले ही यानी शीतला सप्‍तमी पर ही सारा खाना पका लिया जाता है। इस दिन के बाद से बासी खाना खाने की मनाही होती है, क्‍योंकि इस व्रत के बाद गर्मियां शुरू हो जाती हैं।

    10:34 (IST)16 Mar 2020
    शीतला मां की पूजा विधि (Sheetala Mata Puja Vidhi):

    पूजा की थाली तैयार करें। थाली में दही, पुआ, रोटी, बाजरा, सप्तमी को बने मीठे चावल, नमक पारे और मठरी रखें। दूसरी थाली में आटे से बना दीपक, रोली, वस्त्र, अक्षत, हल्दी, मोली, होली वाली बड़कुले की माला, सिक्के और मेहंदी रखें। दोनों थाली के साथ में लोटे में ठंडा पानी रखें। शीतला माता की पूजा करें और दीपक को बिना जलाए ही मंदिर में रखें। माता को सभी चीज़े चढ़ाने के बाद खुद और घर से सभी सदस्यों को हल्दी का टीका लगाएं। अब हाथ जोड़कर माता से प्रार्थना करें और 'हे माता, मान लेना और शीली ठंडी रहना' कहें। घर में पूजा करने के बाद अब मंदिर में पूजा करें। मंदिर में पहले माता को जल चढ़ाएं. रोली और हल्दी के टीका करें। मेहंदी, मोली और वस्त्र अर्पित करें। बड़कुले की माला व आटे के दीपक को बिना जलाए अर्पित करें। अंत में वापस जल चढ़ाएं और थोड़ा जल बचाएं। इसे घर के सभी सदस्य आंखों पर लगाएं और थोड़ा जल घर के हर हिस्से में छिड़कें। इसके बाद जहां होलिका दहन हुआ था वहां पूजा करें। थोड़ा जल चढ़ाएं और पूजन सामग्री चढ़ाएं। घर आने के बाद पानी रखने की जगह पर पूजा करें। अगर पूजन सामग्री बच जाए तो गाय या ब्राह्मण को दे दें।

    10:13 (IST)16 Mar 2020
    शीतला माता का रूप...

    शीतला माता को चेचक जैसे रोग की देवी माना जाता है. यह हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाड़ू) और नीम के पत्ते धारण किए होती हैं. गर्दभ की सवारी किए यह अभय मुद्रा में विराजमान हैं.

    10:01 (IST)16 Mar 2020
    शीतला अष्टमी को इन नामों से भी जाना जाता है...

    इस अष्टमी को अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों से जाना जाता है. गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में इसे शीतला अष्टमी कहा जाता है। तो कई जगहों पर इसे बसौड़ा, बसोरा और शीतलाष्टमी के नाम से जाना जाता है।

    09:54 (IST)16 Mar 2020
    शीतला माता भोग...

    शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा के समय उन्हें खास मीठे चावलों का भोग चढ़ाया जाता है. ये चावल गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं. इन्हें सप्तमी की रात को बनाया जाता है. इसी प्रसाद को घर में सभी सदस्यों को खिलाया जाता है. शीतला अष्टमी के दिन घर में ताज़ा खाना नहीं बनता.

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