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देवी दुर्गा ने क्यों लिया ब्रह्मचारिणी माता का स्वरूप, जानें कथा, आरती और उनके प्रिय भोग

Shardiya Navratri 2020: नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। नवरात्र में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से माता से तपस्या का वरदान मिलता है।

maa brahmcharini vrat, maa brahmcharini vrat katha, maa brahmcharini vrat aartiब्रह्मचारिणी माता तपस्या का वरदान देती हैं।

Shardiya Navratri 2020: नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। नवरात्र में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से माता से तपस्या का वरदान मिलता है। 18 अक्तूबर, रविवार को मां ब्रह्मचारिणी व्रत किया जाएगा।

मां ब्रह्मचारिणी की कथा (Maa Brahmcharini Ki Katha)
मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर जन्म लिया था। देवऋषि नारद जी की सलाह पर उन्होंने कठोर तप किया ताकि वह भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें। कठोर तप की वजह से उनका नाम ब्रह्मचारिणी या तपश्चारिणी पड़ा। भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने हजार सालों तक केवल फल-फूल खाएं और सौ वर्ष तक साग खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर कमजोर हो गया। मां ब्रह्मचारिणी का तप देखकर सभी देवता, ऋषि-मुनि अत्यंत प्रभावित हुए और उन्होंने वरदान किया कि देवी आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। आपकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होगी और भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे और ऐसा ही हुआ।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती (Maa Brahmcharini Ki Aarti)
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।।
जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।
कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।।
उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने।।
रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।
आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।।

मां ब्रह्मचारिणी के प्रिय भोग (Maa Brahmcharini Ke Priye Bhog)
देवी मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल और कमल का फूल पसंद हैं। इसलिए उनकी पूजा में इन्हीं फूलों को देवी मां के चरणों में अर्पित किया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को मीठे में चीनी और मिश्री काफी पसंद है इसलिए मां को भोग में चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्‍यंजन अति प्रिय होते हैं। इसलिए मां ब्रह्मचारिणी को दूध से बने व्‍यंजनों का भोग लगा सकते हैं।मान्यता है कि इस भोग से देवी देवी ब्रह्मचारिणी प्रसन्न हो जाती हैं। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी व्रत के दिन इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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