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Basant Panchami 2020: पाकिस्तान में LOC के पास है मां शारदे का मंदिर, 5000 साल पुराना ये शक्तिपीठ क्यों है खंडहर…

Sharda Peeth Temple: शारदा पीठ पूर्व काल में अध्ययन का केंद्र हुआ करता था। कहा जाता है कि लगभग 237 ईस्वी पूर्व राजा अशोक के शासन काल में इसे स्थापित किया गया था। कुछ जानकार इस मंदिर को 5 हजार साल पुराना बताते हैं।

Vasant Panchami 2020: एलओसी से महज 10-12 किलोमीटर पर शारदा पीठ स्थित है।

Basant Panchami 2020, Sharda Peeth saraswati temple in Pakistan: हिंदू धर्म में माघ शुक्ल पंचमी को खास महत्व दिया गया है। इसे बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी सरस्वती का जन्म हुआ। इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा होती है। पूरे देश में देवी सरस्वती के ऐसे कई मंदिर हैं, जहां बसंत पंचमी के दिन भक्तों का सैलाब उमड़ता है। ऐसा ही एक शक्ति पीठ पाकिस्तान में है जो भारत के एलओसी से लगा हुआ है। सरस्वती का ये मंदिर बहुत सिद्ध माना जाता है क्योंकि मान्यतानुसार यहां सती का दाहिना हाथ गिरा था। इस मंदिर में 72 सालों में पहली बार साल 2019 में पूजा हुई थी। आइए जानते हैं पाकिस्तान में स्थित शारदा पीठ मंदिर के बारे में…

एलओसी के पास स्थित है मां शारदे का मंदिर

एलओसी से महज 10-12 किलोमीटर पर शारदा पीठ स्थित है। यह श्रीनगर से 130 किलोमीटर दूर किशनगंगा नदी के किनारे बना है। शारदा पीठ के बारे में पौराणिक मान्यता है कि इस स्थान पर सती का दाहिना हाथ गिरा था। इसलिए इस जगह जगह को शक्तिपीठों में गिना जाता है। इसके अलावा यह स्थान कश्मीरी पंडितों के प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है।

5000 साल पुराना है ये शारदा पीठ

शारदा पीठ पूर्व काल में अध्ययन का केंद्र हुआ करता था। कहा जाता है कि लगभग 237 ईस्वी पूर्व राजा अशोक के शासन काल में इसे स्थापित किया गया था। कुछ जानकार इस मंदिर को 5 हजार साल पुराना बताते हैं।

आजादी के बाद पहली बार हुई पूजा

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद शारदा पीठ में पहली बार साल 2019 में पूजा-अर्चना की गई थी। वर्तमान समय में यह मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुका है। पिछले कुछ समय से शारदा पीठ की यात्रा के लिए बातचीत की जा रही है ताकि भारत से जाने वाले श्रद्धालुओं को यहां जाने के लिए अधिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

अध्ययन का प्रमुख केंद्र था शारदा पीठ

शारदा पीठ को अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र भी कहा जाता है। मान्यता है कि व्याकरण के रचयिता पाणिनी और अन्य विद्वानों द्वारा लिखित ग्रंथ मौजूद थे। इसलिए शारदा पीठ प्राचीन काल में अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। इसके अलावा शारदा पीठ अपनी लिपि के लिए भी काफी प्रसिद्ध रहा है। क्योंकि यह पीठ देश के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय में से एक था। जिसमें तकरीबन 5 हजार विद्वान मौजूद थे। उस समय का सबसे बड़ा पुस्तकालय भी यहां मौजूद था।

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