Sharadh: People Worship For Their Dead Ancestors And Get Rid From Bad Souls Around Them - जानिए क्या है पिशाचमोचिनि तिथि, इस दिन पितरों का श्राद्ध करना माता जाता है शुभ - Jansatta
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जानिए क्या है पिशाचमोचिनि तिथि, इस दिन पितरों का श्राद्ध करना माता जाता है शुभ

इस दिन हाथ में जल लेकर पितरों का तर्पण किया जाता है।

इस दिन भूत-पिशाच से पीड़ित लोगों को पितरों का श्राद्ध करना चाहिए।

मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी जो इस वर्ष 02 दिसम्बर 2017 शनिवार को है, इस दिन प्रेत योनि को प्राप्त जीवों (पूर्वजों) के निमित्त तर्पण आदि करने से उनकी सदगति होती है। जिनके घर-परिवार, आस-पडोस या परिचय में किसी की अकाल मृत्यु हुई हो या कोई भूत-प्रेत अथवा पितृबाधा से पीड़ित हो, वे पिशाच मोचिनी तिथि को उनकी सदगति, आत्मशांति और मुक्ति के लिए संकल्प करके श्राद्ध – तर्पण अवश्य करें। भूत-प्रेतादिक से ग्रस्त व्यक्ति इसे अवश्य करें।

विधिः-
प्रातः स्नान के बाद दक्षिणमुख होकर बैठें। तिलक, आचमन आदि के बाद पीतल या ताँबे के थाल अथवा तपेली आदि मे पानी लें। उसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, कुम -कुम, अक्षत, तिल, कुश मिलाकर रखें। हाथ में शुद्ध जल लेकर संकल्प करें कि ʹअमुक व्यक्ति (नाम) के प्रेतत्व निवारण हेतु हम आज पिशाचमोचन श्राद्ध तिथि को यह पिशाचमोचन श्राद्ध कर रहे हैं।ʹ हाथ का जल जमीन पर छोड़ दें। फिर थोड़े काले तिल अपने चारों ओर जमीन पर छिड़क दें कि भगवान विष्णु हमारे श्राद्ध की असुरों से रक्षा करें। अब अनामिका उंगली में कुश की अंगूठी पहनकर (ʹૐ अर्यमायै नमःʹ) मंत्र बोलते हुए पितृतीर्थ से 108 तर्पण करें अर्थात् थाल में से दोनों हाथों की अंजली भर-भर के पानी लें एवं दायें हाथ की तर्जनी उँगली व अँगूठे के बीच से गिरे, इस प्रकार उसी पात्र में डालते रहें। तर्पण पीतल या ताँबे के थाल अथवा तपेली में बनाकर रखे जल से करना है।

108 तर्पण हो जाने के बाद दायें हाथ में शुद्ध जल लेकर संकल्प करें कि सर्व प्रेतात्माओं की सदगति के निमित्त किया गया, यह तर्पण कार्य भगवान नारायण के श्रीचरणों में समर्पित है। फिर तनिक शांत होकर भगवद्-शांति में बैठें। बाद में तर्पण के जल को पीपल में चढ़ा दें।

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