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Sharad Purnima 2020 Date, Puja Vidhi, Muhurat: शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के अमृत बरसाने की है मान्यता, जानिये दूसरी खास बातें

Sharad Purnima 2020 Date, Puja Vidhi, Muhurat, Timings, Samagri: कहते हैं कि इस दिन माता महालक्ष्मी की उपासना करने से धन वृद्धि होती है। मान्यता है कि सही विधि से देवी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा बरसती हैं।

Sharad Purnima 2020, Puja Vidhi, amrit wali kheerSharad Purnima 2020 Puja Vidhi: शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी माता की पूजा की जाती हैं।

Sharad Purnima 2020 Date, Puja Vidhi, Muhurat, Timings: इस साल शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों में इस दिन का महत्व बहुत अधिक बताया जाता है। कहते हैं कि इस दिन माता महालक्ष्मी की उपासना करने से धन वृद्धि होती है। मान्यता है कि सही विधि से देवी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा बरसती है।

शरद पूर्णिमा पूजा विधि (Sharad Purnima Puja Vidhi)
शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर साफ वस्त्र पहनें। एक चौकी लें। उस पर गंगाजल की छींटें मारकर स्थान पवित्र करें। इस पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर महालक्ष्मी सहित भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं। भगवान विष्णु और माता महालक्ष्मी को कुमकुम का तिलक लगाएं।

देवी लक्ष्मी को कमलगट्टे की माला अर्पित करें। अगर आप चाहें तो लाल पुष्पों की माला भी चढ़ा सकते हैं। साथ ही भगवान विष्णु को पीले रंग के फूलों की माला चढ़ाएंं। महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों – धन लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, ऐश्वर्य लक्ष्मी, आधी लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी और धान्य लक्ष्मी माता को प्रणाम करें। अब 4 कटोरियों में खीर का भोग रखें। महालक्ष्मी स्तोत्र, लक्ष्मी नारायण हृदय स्तोत्र, विष्णु स्तुति और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

पूरी रात खीर के कटोरे या कटोरियों को चंद्रमा की रोशनी में छलनी से ढककर रखा रहने दें। अगले दिन स्नान कर महालक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना कर घर के सभी सदस्यों में इसका भोग बांटें। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में रखी खीर खाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करने से घर में धन वर्षा के योग बनते हैं।

शरद पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त (Sharad Purnima Puja Ka Shubh Muhurat)
शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त –
30 अक्टूबर, शुक्रवार – शाम 05 बजकर 26 मिनट से शाम 06 बजकर 55 मिनट तक।
निशिता पूजा शुभ मुहूर्त – 30 अक्टूबर, शुक्रवार – रात 11 बजकर 42 मिनट से रात 12 बजकर 27 मिनट तक।
खीर का कटोरा चांद की रोशनी में निशिता मुहूर्त में माता मातालक्ष्मी का ध्यान कर रखें।

शरद पूर्णिमा मंत्र/ महालक्ष्मी मंत्र (Sharad Purnima Mantra/ Laxmi Puja Mantra)

ओम लक्ष्मी नम:।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।

पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।

ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:!

Live Blog

Highlights

    00:28 (IST)31 Oct 2020
    अमृत और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का अवसर है शरद पूर्णिमा

    अमृत और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शरद पूर्णिमा की रात भगवान की आराधना करें और महिलाओं के प्रति सम्मान दिखाएं। इससे घर में समृद्धि के साथ ही सुख और उल्लास का आशीर्वाद मिलता है।

    23:36 (IST)30 Oct 2020
    अमरत्व की प्राप्ति के लिए ग्रहण करें शरद पूर्णिमा की रात का अमृत युक्त खीर

    शरद पूर्णिमा की रात अमृत वर्षा वाली रात होती है। इस रात घरों में खुले आकाश के नीचे खीर और मीठे पकवान बनाकर रखने से उसमें अमृत की बूंदें गिरती हैं। सुबह इस खीर काे पूरे श्रद्धाभाव से ग्रहण करने से अमरत्व की प्राप्ति होती है। 

    23:32 (IST)30 Oct 2020
    उत्साह और ऊर्जा देने वाली रात होती है शरद पूर्णिमा की रात

    शरद पूर्णिमा की रात पूर्ण चंद्रमा की रात होती है। इस दिन रात में चंद्रमा की ओर देखना न केवल आंखों को अच्छा लगता है, बल्कि मन में शांति और भाव में सरलता और आंखों में प्रकाश और मस्तिष्क मे उत्साह और ऊर्जा का संचार करता है।

    23:10 (IST)30 Oct 2020
    आज की रात पाएं अमृत और करें आराधना 

    शरद पूर्णिमा की रात में अमृत की बूंदों के गिरने से लोग खुले आकाश के नीचे बैठकर जागरण करते हैं। आज की रात जागरण से लक्ष्मी की कृपा बरसती है। घर में संपन्नता आती है और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।  

    22:41 (IST)30 Oct 2020
    अमृत की कामना से घरों में खीर बनाकर छतों पर रखा

    शरद पूर्णिमा की रात आकाश से अमृत वर्षा होती है। इस मौके पर घरों में खीर और अन्य मीठे पकवान बनाकर छतों पर रखने से उसमें अमृत की बूंदें गिरती है। लोगों ने अपने घरों पर खीर को रख दिया है।

    21:29 (IST)30 Oct 2020
    कर्ज से मुक्ति की है मान्यता...

    शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, इसलिए शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजन करने से सभी प्रकार के कर्जों से मुक्ति मिलती है.

    21:15 (IST)30 Oct 2020
    ये है इस दिन का महत्व...

    शास्त्रों में इस दिन का महत्व बहुत अधिक बताया जाता है। कहते हैं कि इस दिन माता महालक्ष्मी की उपासना करने से धन वृद्धि होती है। मान्यता है कि सही विधि से देवी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा बरसती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद देव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करते हैं। इस दिन चंद्र देव अमृत वर्षा के रूप मे आपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर रोशनी से करते हैं।

    20:36 (IST)30 Oct 2020
    ये हैं आज दिन भर के शुभ संयोग...

    शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का उदय पांच शुभ योगों में होगा. जिनके प्रभाव से अच्छी सेहत और धन लाभ होगा. पूर्णिमा पर तिथि, वार और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है. इस योग में किए गए सभी काम सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. साथ ही लक्ष्मी, शंख, महाभाग्य और शश नाम के 4 राजयोग योग बनने से ये दिन और भी खास रहेगा. इस पर्व पर बृहस्पति और शनि का अपनी-अपनी राशियों में होना भी शुभ संयोग है

    19:55 (IST)30 Oct 2020
    इन मंत्रों का करें जाप...

    ओम लक्ष्मी नम:।

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।

    पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।

    ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:!

    19:13 (IST)30 Oct 2020
    स्नान, दान आदि की पूर्णमासी...

    18:42 (IST)30 Oct 2020
    पान का है विशेष महत्व...

    सनातन धर्म में पूजा में पान के प्रयोग को बहुत महत्व दिया जाता है क्योंकि पान के पत्ते को बहुत पवित्र और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करें और उनको पान अर्पित करें

    18:16 (IST)30 Oct 2020
    ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

    शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 30 अक्टूबर को शाम 05:45 से हो रहा है. जो अगले दिन 31 अक्टूबर को 08:18 मिनट तक रहेगा

    17:30 (IST)30 Oct 2020
    जानिये पूजा विधि...

    शरद पूर्णिमा में माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. उनके आठ रूप हैं, जिनमें धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, राज लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, ऐश्वर्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, कमला लक्ष्मी एवं विजय लक्ष्मी है. सच्चे मन से मां की अराधना करने वाले भक्तों की सारी मुरादें पूरी होती हैं

    16:40 (IST)30 Oct 2020
    इस दिन जरूर करें ये काम...

    शरद पूर्णिमा के दिन सुबह उठ जाएं और स्नान आदि कर लें. घर के मंदिर को साफ करके माता लक्ष्मी और श्री हरि के पूजन की तैयारी कर लें. इसके लिए एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं. इस पर माता लक्ष्मी और विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें. प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं, गंगाजल छिड़कें और अक्षत, रोली का तिलक लगाएं. सफेद या पीले रंग की मिठाई से भोग लगाएं और पुष्प अर्पित करें. यदि गुलाब के फूल हैं तो और भी अच्छा है

    15:50 (IST)30 Oct 2020
    खीर बनाते समय इस बात का रखें ख्याल

    पूर्णिमा की रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर अगले दिन उसका सेवन करने का विधान है. खीर कम से कम चार घंटे चंद्रमा की रोशनी में रखना चाहिए. इससे उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं. खीर में कीड़े न पड़ें उसके लिए सफेद झीने वस्त्र से ढकना चाहिए. अगले दिन भगवान लक्ष्मीनारायण को भोग लगाने के बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करना चाहिए.

    14:57 (IST)30 Oct 2020
    चांदी के बर्तन में खीर

    शरद पूर्णिमा की खीर को चांदी के बर्तन में रखना ज्यादा उत्तम रहता है. चांदी का बर्तन न होने पर किसी भी पात्र में उसे रख सकते हैं

    14:09 (IST)30 Oct 2020
    इसलिए किया जाता है शरद पूर्णिमा व्रत

    मान्यता के अनुसार एक साहूकार की दो बेटियां थीं. दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं. साहूकार की एक बार बड़ी बेटी ने पूर्णिमा का विधिवत व्रत किया, लेकिन छोटी बेटी ने व्रत छोड़ दिया, जिससे छोटी लड़की के बच्चों की जन्म लेते ही मृत्यु हो जाती थी. एक बार साहूकार की बड़ी बेटी के पुण्य स्पर्श से छोटी लड़की का बालक जीवित हो गया. कहा जाता है कि उसी दिन से यह व्रत विधिपूर्वक मनाया जाने लगा.

    13:15 (IST)30 Oct 2020
    ऐसे करें देवी लक्ष्मी की पूजा..

    शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद एक साफ चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद अब लक्ष्मी जी विधि-विधान से पूजा करके लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन इस स्तोत्र का पाठ करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.

    12:27 (IST)30 Oct 2020
    पूजन में इन चीजों की भी होगी जरूरत...

    पूजा के समय दिया जलाने के लिये गाय का घी, मूंगफली या तिल्ली का तेल इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा पूजन में रोली, कुमकुम, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चौकी, कलश, मां लक्ष्मी व भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, मौली, नारियल, शहद, दही गंगाजल, गुड़, धनियां, जौ, गेंहू, दुर्वा, चंदन, सिंदूर, सुगंध के लिये केवड़ा, गुलाब अथवा चंदन के इत्र ले सकते हैं

    11:34 (IST)30 Oct 2020
    जान लीजिए पूजन सामाग्री...

    मां लक्ष्मी की पूजा के लिये सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार जुटा सकते हैं. मां लक्ष्मी को जो वस्तुएं प्रिय हैं उनमें लाल, गुलाबी या फिर पीले रंग का रेशमी वस्त्र लिया जा सकता है. वहीं, कमल और गुलाब के फूल भी मां को बहुत प्रिय हैं. फल के रुप में श्री फल, सीताफल, बेर, अनार और सिंघाड़े भी मां को पसंद हैं. मां लक्ष्मी पूजा में अनाज में चावल घर में बनी शुद्ध मिठाई, हलवा, शिरा का नैवेद्य उपयुक्त है

    10:52 (IST)30 Oct 2020
    खीर का है विशेष महत्व...

    आज का दिन बेहद खास है. आज की रात चंद्रमा की किरणें अमृत छोड़ती है. इसलिए आज चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का खास महत्व है. शरद पूर्णिमा की खीर को चांदी के बर्तन में रखना ज्यादा उत्तम रहता है. चांदी का बर्तन न होने पर किसी भी पात्र में उसे रख सकते हैं

    10:12 (IST)30 Oct 2020
    शरद पूर्णिमा पूजा मुहूर्त

    शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त - 30 अक्टूबर, शुक्रवार - शाम 05 बजकर 26 मिनट से शाम 06 बजकर 55 मिनट तक।निशिता पूजा शुभ मुहूर्त - 30 अक्टूबर, शुक्रवार - रात 11 बजकर 42 मिनट से रात 12 बजकर 27 मिनट तक।खीर का कटोरा चांद की रोशनी में निशिता मुहूर्त में माता मातालक्ष्मी का ध्यान कर रखें।

    09:35 (IST)30 Oct 2020
    कोजगरा पूजन विधि...

    सायंकाल में लक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय है। पूजन में गंगाजल, तिल, जौ, अक्षत, चंदन, रक्तचंदन, रौली, मौली, बिल्वपत्र, खीर आदि से पूजन करने से लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहती है।

    08:58 (IST)30 Oct 2020
    इस कारण कहते हैं रास पूर्णिमा...

    आश्विन शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा को ही भगवान श्रीकृष्ण ने महारास करके समस्त प्राणियों को आध्यात्मिकता का संदेश दिया था। तभी से यह महोत्सव के रूप में मनाए जाने लगा।

    08:20 (IST)30 Oct 2020
    कोजगरा को लेकर ये है मान्यता...

    पौराणिक कथा के अनुसार इस पर्व को सबसे पहले भगवान राम के वनवास से लौटने के बाद कोजगरा के रूप में मनाया गया था। तब से मिथिलांचल में इस पर्व को मनाने की परंपरा कायम है। वैसे कोजगरा शब्द का अर्थ होता है जागते रहो। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि समुंद्र मंथन से निकली अमृत की वर्षा कोजागरा की रात ही हुई थी। इसलिए इस रात खुले आसमान के नीचे जागते रहने से आसमान से होने वाली अमृत की वर्षा शरीर पर पड़ती है, जिससे सभी रोगों का नाश होता है।

    07:51 (IST)30 Oct 2020
    मिथिलांचल में आज कोजगरा

    आश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को कोजागरा पर्व लक्ष्मी पूजन के नाम से मनाया जाता है। इसको शरद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन प्रदोषकाल में लक्ष्मीजी का पूजन किया जाता है। इस दिन घर की पूरी तरह साफ-सफाई कर पूजन किया जाना चाहिए। सायंकाल में घर के द्वार पर हव्यवाहन, पूणेन्दु, सभार्यरूद्र, स्कन्द, नंदीश्वरमुनि, सुरभि, निकुंभ, लक्ष्मी, कुबेर, इंद्र का पूजन करें।

    07:15 (IST)30 Oct 2020
    इन मंत्रों से करें देवी लक्ष्मी की उपासना...

    ओम लक्ष्मी नम:।

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।

    पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।

    ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:!

    06:25 (IST)30 Oct 2020
    शुभ शरद पूर्णिमा

    शरद पूर्णिमा का चंद्रमा होता है लुभावनापूरी करें आपकी सभी मनोकामनामां लक्ष्मी का भरपूर आशीर्वाद बरसेशरद पूर्णिमा की हार्दिक बधाइयांशुभ शरद पूर्णिमा

    05:45 (IST)30 Oct 2020
    शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं…

    चांद सी शीतलता, शुभ्रता, कोमलता, उदारता, प्रेमलताआपको और आपके परिवार को प्रदान होशरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं…

    05:08 (IST)30 Oct 2020
    आशा है ये त्योहार आपके जीवन में नई उमंग लेकर आए

    शरद पूर्णिमा की रात लेकर आती है अपने साथ अमृत वर्षाजो भर देती है हमारे जीवन को सुख और समृद्धि सेआशा है ये त्योहार आपके जीवन में नई उमंग लेकर आएआप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं…

    04:29 (IST)30 Oct 2020
    चंद्रमा का भरपूर आशीर्वाद बरसे

    शरद पूर्णिमा का चांद सबसे सुंदर होता हैऔर सबसे ज्यादा आशीर्वाद देता हैआशा है इस रात आप सभी परचंद्रमा का भरपूर आशीर्वाद बरसे.

    02:56 (IST)30 Oct 2020
    घर में धन की बरसात हो

    घर में धन की बरसात हो, लक्ष्मी का वास होसभी संकटों का नाश हो, मन में सदा शांति का वास होशरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

    02:37 (IST)30 Oct 2020
    देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमल गट्टे की माला से इस मंत्र का जाप करें

    मंत्र- ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नम:।

    02:07 (IST)30 Oct 2020
    शरद पूर्णिमा मंत्र/ महालक्ष्मी मंत्र

    ओम लक्ष्मी नम:।

    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।

    पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।

    ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:!

    20:55 (IST)29 Oct 2020
    शरद पूर्णिमा के दिन श्रीकृष्ण ने रचाई महारास...

    20:25 (IST)29 Oct 2020
    धन प्राप्ति की है मान्यता...

    कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन माता महालक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होने के साथ ही धन प्राप्ति के भी योग बनते हैं।

    19:52 (IST)29 Oct 2020
    श्रीकृष्ण मंत्र...

    'ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।।'

    'ॐ नमः भगवते वासुदेवाय कृष्णाय क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः।'

    'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे।'

    19:22 (IST)29 Oct 2020
    हिंदू पंचांग में शुभ मानी जाती है यह तिथि...

    हिंदू पंचांग में शरद पूर्णिमा की तिथि को बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं कि शुभ कार्यों को करने के लिए यह दिन अच्छा साबित होता है। इस दिन माता महालक्ष्मी, श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की कृपा रहती है।

    18:15 (IST)29 Oct 2020
    चंद्र पूजन मंत्र

    दधि शंख तुषारामं क्षीरोदार्णव सम्भवम्।

    नमामि शशिनं भक्तया शम्भोर्मकुट भूषणम्।।

    17:49 (IST)29 Oct 2020
    शुभ महूर्त में करें पूजा

    शरद पूर्णिमा की पूजा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 26 मिनट से शाम 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।

    17:15 (IST)29 Oct 2020
    श्री विष्णु मंत्र...

    शांताकारम् भुजंगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्।विश्वाद्धारम् गगनसदृष्यम् मेघवर्णम् शुभांगम्।।

    लक्ष्मीकांतम् कमलनयनम् योगभिर्ध्यान गम्यम्यम्।वंदे विष्णु भव भय हरणम् सर्वलोकैकनाथम्।।

    16:48 (IST)29 Oct 2020
    जय मां लक्ष्मी

    16:15 (IST)29 Oct 2020
    महालक्ष्मी का मंत्र

    या देवी सर्वभूतेषू लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    16:00 (IST)29 Oct 2020
    ऐसे करें पूजा

    शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर माता महालक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा को चौकी पर विराजमान करें। फिर दीपक जलाकर पाठ पढ़ें और उन्हें खीर का भोग लगाकर खीर को चांद की रोशनी में रखें।

    15:46 (IST)29 Oct 2020
    आसमान से बरसता है अमृत

    मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात आसमान से अमृत बरसता है। कहते हैं कि इस दिन चंद्रमा धरती के पास होता है। इसलिए बहुत-सी सकारात्मक ऊर्जाएं भूमंडल में रहती हैं और सफेद रंग के भोजन पर उतर आती हैं। इसी मान्यता पर विश्वास करते हुए लोग चंद्रमा की रोशनी में खीर का कटोरा रखते हैं।

    15:30 (IST)29 Oct 2020
    माता महालक्ष्मी के मंत्रों का करें जाप...

    शरद पूर्णिमा के दिन माता महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। देवी के जिस भी मंत्र का जाप करने में आपको आसानी हो, उसका जाप कर सकते हैं।

    15:15 (IST)29 Oct 2020
    करनी चाहिए श्रीकृष्ण की अर्चना

    वैष्णव शरद पूर्णिमा के दिन को बहुत खास मानते हैं। बताया जाता है कि उनके मन का भाव यह रहता है कि वह भी ब्रज की गोपियों की तरह ही श्रीकृष्ण की महारास में शामिल हों। कहते हैं कि यह दिन भक्त और भगवान के मिलन का होता है।

    15:03 (IST)29 Oct 2020
    लक्ष्मी माता के साथ भगवान विष्णु की अर्चना का है विशेष महत्व

    शरद पूर्णिमा पूजन में लक्ष्मी माता के साथ ही भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। कहते हैं कि भगवान विष्णु लक्ष्मीपति हैं। इसलिए देवी लक्ष्मी ऐसी जगह नहीं जाती हैं जहां उनके साथ भगवान विष्णु की उपासना न की जाए। शरद पूर्णिमा के दिन दोनों की ही पूजा करनी चाहिए।

    14:45 (IST)29 Oct 2020
    खीर का कटोरा है आरोग्य देने वाला...

    बताया जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से अमृत बरसता है। इसलिए इस रात चांद की रोशनी में खीर रखकर उसमें अमृत प्रवेश की मान्यता है। कहते हैं कि इस रात चांद की रोशनी में रखी खीर खाने से रोगों से मुक्ति मिलती हैं।

    14:30 (IST)29 Oct 2020
    श्रीकृष्ण ने रचाई थीं महारास...

    बताया जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज की गोपियों और श्री राधा रानी के साथ महारास रचाई थीं। बताया जाता है कि ब्रज की गोपियों को श्रीकृष्ण के दर्शन पाने की बहुत इच्छा थीं इसलिए उन्होंने उनसे प्रार्थना की कि वह वहां प्रकट हो उनके मन को तृप्त करें और श्रीकृष्ण उनकी पुकार सुनकर वहां प्रकट हुए।

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