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Sharad Purnima 2017: शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, जानिए क्या है महत्व

Sharad Purnima 2017, Kojagiri Purnima Puja: इस रात अगर आपको आपको धन का खजाना पाना है तो मां लक्ष्मी का पूजन अवश्य करें।

Author October 5, 2017 11:51 AM
Sharad Purnima 2017 Date: शरद पूर्णिमा को कोजागिरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो यह अवश्य सफल होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इस दिन चन्द्रमा कि किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी कारण इस दिन खीर बनाकर रात भर चांदनी में रखकर अगले दिन प्रात:काल में खाने का विधि-विधान है। शरद पूर्णिमा 2017 की रात चंद्रमा हमारी धरती के बहुत करीब होता है। इसलिए चंद्रमा के प्रकाश में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे-सीधे धरती पर गिरते हैं। खाने-पीने की चीजें खुले आसमान के नीचे रखने से चंद्रमा की किरणे सीधे उन पर पड़ती है। जिससे विशेष पोषक तत्व खाद्य पदार्थों में मिल जाते हैं जो हमारी सेहत के लिए अनुकूल होते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है की इस रात माता लक्ष्मी रात्रि में यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जाग रहा है महालक्ष्मी उसका कल्याण करती हैं। कहा जाता है इसी रात के बाद से मौसम बदलता है और सर्दी के मौसम का आगमन होता है। कहतें है की इसी रात में भगवान श्री कृष्ण भी गोपियों के साथ रासलीला रचातें हैं। इस रात अगर आपको आपको धन का खजाना पाना है तो मां लक्ष्मी का पूजन अवश्य करें। पूजन देवी लक्ष्मी का रात-भर किया जाना चाहिए तभी मां का आर्शिवाद मिलता है।

मान्यता है कि लक्ष्मी पूजा के दिन देवी लक्ष्मी यह देखने निकलती हैं कि उनके लिए कौन भक्‍त जाग रहा है। इसलिए कोजागरा की पूरी रात लोग जागरण करते हैं। वक्‍त काटने के लिए कौड़ी से पचीसी खेली जाती है। जुआ भी खेलने की परंपरा है ताकि नवविवाहितों को जीवन में हार-जीत का महत्व का पता चले।

इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे और जितेन्द्रिय भाव से रहे। धनवान व्यक्ति तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढंकी हुई स्वर्णमयी लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करके भिन्न-भिन्न उपचारों से उनकी पूजा करें, तदनंतर सायंकाल में चन्द्रोदय होने पर सोने, चांदी अथवा मिट्टी के घी से भरे हुए 100 दीपक जलाएं। इसके बाद घी मिश्रित खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चांदनी में रखें। जब एक प्रहर (6 घंटे) बीत जाएं, तब लक्ष्मीजी को सारी खीर अर्पण करें। तत्पश्चात भक्तिपूर्वक सात्विक ब्राह्मणों को इस प्रसाद रूपी खीर का भोजन कराएं और उनके साथ ही मांगलिक गीत गाकर तथा मंगलमय कार्य करते हुए रात्रि जागरण करें। तदनंतर अरुणोदय काल में स्नान करके लक्ष्मीजी की वह स्वर्णमयी प्रतिमा आचार्य को अर्पित करें।

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