मार्गी शनि बजाएगा धर्म गुरुओं के लिए खतरे की घंटी 

शनि के मार्गी होने के बाद न्याय प्रणाली से जुड़े विवाद अब शनै: शनै: खत्म हो जाएंगे। न्याय व्यवस्था को शक्ति प्राप्त होगी।

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सांकेतिक फोटो।

सदगुरु स्वामी आनन्द जी

142 दिन की उल्टी चाल के बाद 6 सितम्बर, 2018 की शाम 4 बजकर 36मिनट पर पुष्य नक्षत्र, वरियान योग, तैतूल करण और कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि में शनिदेव देव मार्गी हो रहे हैं। आकाश मंडल में घटित होने वाली ये महत्वपूर्ण घटना है। 18 अप्रेल, 2018 से शनि वक्री हो गए थे। वक्री यानी उल्टा। वक्र गति के बावजूद शनिदेव अपने विरोधी देवगुरु वृहस्पति की राशि धनु में ही चलायमान रहे। वक्री होने पर ग्रह अपने स्वभाव के विपरीत आचरण करता है। शनि न्यायप्रिय ग्रह है। लिहाजा वक्री होने पर उसका व्यवहार उल्टा हो जाता है। जगत शनिदेव की इसी टेढ़ी चाल को पिछले लगभग साढ़े चार महीने दिन तक भुक्तभोगी रहा।

शनि के मार्गी होने के बाद न्याय प्रणाली से जुड़े विवाद अब शनै: शनै: खत्म हो जाएंगे। न्याय व्यवस्था को शक्ति प्राप्त होगी। न्यायालय दोषियों के प्रति अचानक धारदार व आक्रामक हो जाएगा। वृष, कन्या, वृश्चिक, धनु और मकर राशियों के कष्टों में सहसा कमी होगी और उनके अंतर्द्वंद व बेचैनी से राहत मिलेगी। शेयर बाजार को लाभ होगा। धर्म गुरुओं के लिए नयी आफत का मार्ग प्रशस्त होगा। आने वाला काल किसी बड़े धार्मिक नेता का बाजा बजाएगा। जनता के विघ्नों का नाश होगा। अर्थव्यवस्था में सुधार के मामूली संकेत मिलेंगे। ये अलग बात है कि वो ऊँट के मुँह में जीरा सिद्ध होगा।

अग्निकाण्ड जारी रहेंगे। मॉबलिंचिंग में कमी आएगी। किसी के यौन कृत्य की खबर विचलित करेगी। लोगों की राजनैतिक विचारधारा में परिवर्तन होगा। छोटे बच्चे और बच्चियों से जुड़ी नकारात्मक खबरें विचलित करेगी। नैतिक मूल्यों का ह्रास होगा। कोई बड़ा धार्मिक और राजनैतिक एलान भी होने की पूर्ण संभावना है। नेताओं की जुबान फिसलेगी। वो मर्यादा के प्रतिकूल आचरण करते दिखाई देंगे। लोगों के धैर्य में कमी आएगी। शिक्षा और उसके  संस्थानों को लेकर कोई विवाद सर उठाएगा।

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