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शनि राशि परिवर्तन 2020: कौन है शनि देव? जानिए सौरमंडल के इस छठे ग्रह के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

Shani Change 2020: शनि को सूर्य-पुत्र, शनिश्चर, शनैश्चर, पिप्पलाश्रय, कृष्ण, कोणस्थ, बभ्रु, पिंगल, मन्दगामी, रोद्रान्तक, मंद, सौरि और छायापुत्र नामों से भी जाना जाता है।

शनि ग्रह सूर्य से छठा ग्रह है। वृहस्पति के बाद यह सौरमंडल में सबसे विशाल हैं, जो धरती से नौ गुना बड़ा है।

Shani Rashi Parivartan 2020: कौन हैं शनि? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि सूर्य और छाया के पुत्र हैं। जो वैचारिक रूप से अपने पिता के धुरविरोधी हैं। लेकिन उनके विरोध में घृणा नहीं , श्रद्धा है। वैमनस्य नहीं, अपितु प्रेम है। उनके भाई-बहनों में एक हैं भइया यम, जो मृत्यु के स्वामी हैं। एक बहन यमुना हैं जो पापनाशिनी है और दूसरी बहन हैं भद्रा, जो कालगणना यानी पंचांग के एक प्रमुख अंग में विष्टिकरण के रूप में में शुमार हैं। शनि के गुरु शिव हैं। बुध, राहु, शुक्र, भैरव व हनुमान उनके परम मित्रों की टोली में शामिल हैं और पिता सूर्य के साथ चन्द्र,मंगल महाविरोधी। वृहस्पति सम है।

शनि के नाम: शनि को सूर्य-पुत्र, शनिश्चर, शनैश्चर, पिप्पलाश्रय, कृष्ण, कोणस्थ, बभ्रु, पिंगल, मन्दगामी, रोद्रान्तक, मंद, सौरि और छायापुत्र नामों से भी जाना जाता है।

शनि क्रूर या मारक हैं? आख़िर सत्य क्या है? सच तो ये है कि शनि कर्म और न्याय के कारक हैं। अगर व्यक्ति के कर्मों की दिशा सही है तो शनि से बड़ा दाता भी कोई नहीं है। शुभ परिस्थितियों में जो ये कर सकते हैं वो कोई नहीं कर सकता। जो यह दे सकते हैं, दूसरे ग्रहों के लिए असंभव है। शनि दयालु भी हैं, कृपालु भी।

वैज्ञानिक तथ्य: शनि ग्रह सूर्य से छठा ग्रह है। वृहस्पति के बाद यह सौरमंडल में सबसे विशाल हैं, जो धरती से नौ गुना बड़ा है। यह सूरज से सर्वाधिक दूरी पर यानी अट्ठासी करोड, इकसठ लाख मील और पृथ्वी से इकहत्तर करोड, इकत्तीस लाख, तिरालिस हजार मील दूर है। शनि का व्यास पचत्तर हजार एक सौ मील है। शनि छ: मील प्रति सेकेण्ड की गति से 21.5 सालों में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है।शनि पर सामान्य तापमान 240 फ़ॉरेनहाइट है।शनि के चारो ओर सात वलय हैं, और बिना चाँदनी के कई चन्द्रमा है। यानी कवियों के भीतर का काव्य ही छू मंतर हो जाए। उसके हर चाँद का व्यास पृथ्वी से काफ़ी अधिक है।

शनि लोहा, निकल, सिलिकॉन और ऑक्सीजन से निर्मित है, जो ठोस हाइड्रोजन की एक मोटी परत से घिरा है। अमोनिया क्रिस्टल की वजह से इसका रंग पीलापन लिए हुए है। इस पर हवा की गति, 1800 किमी प्रति घंटा तक होती है। शनि के चारों ओर नौ छल्ले की वलय प्रणाली है जो उसे दिलकश बनाती है। ये छल्ले चट्टानी मलबों व बर्फ से निर्मित हैं। बासठ चन्द्रमा शनि के चारों ओर महबूब की तरह चक्कर लगाते हैं। इनमे छल्लों के भीतर के सैकड़ों छुटकू चंदामामा भी हैं जो बस दूर से बस आहें भर रहे हैं, शामिल नहीं है। शनि का सबसे बड़ा चाँद टाइटन है जो सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा है। यह बुध से भी विशाल है।

शनि के नक्षत्र और राशियाँ: पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद इन तीन नक्षत्रों के स्वामी शनि देव है। मकर व कुंभ राशि के भी यही मालिक हैं। शनि महाराज तुला राशि में 20 डिग्री पर शनि उच्च के हैं और मेष राशि में 20 अंश पर नीच के।

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