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नए साल में इन राशियों पर चल रही है शनि साढ़ेसाती, जानिये- इससे बचने की क्या है मान्यता

शनि की इस स्थिति के कारण धनु, मकर और कुम्भ राशि पर साढ़ेसाती चल रही है। ये साढ़े साती तीनों राशियों में जनवरी 2020 से चल रही है जो 2021 में भी रहेगी।

Author Edited By यतेंद्र पूनिया January 8, 2021 4:16 PM
shani dev, shani sade sati, shani upayमकर, धनु और कुंभ राशि पर चल रही है शनि साढ़ेसाती

शनि इस समय मकर राशि में विराजमान हैं। शनि की इस स्थिति के कारण धनु, मकर और कुम्भ राशि पर साढ़ेसाती चल रही है। ये साढ़े साती तीनों राशियों में जनवरी 2020 से चल रही है जो 2021 में भी रहेगी। इन तीनों राशियों पर शनि की साढ़ेसाती की स्थिति अलग है और इसके प्रभाव भी है।

धनु राशि – ज्योतिष गणना के अनुसार इस समय धनु राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। ऐसे में धनु राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा। कई सालों से चली आ रही परेशानियों का अंत भी हो जाएगा। हालांकि मकर राशि वालों को स्वास्थ्य और चोट आदि का का ध्यान रखना होगा।

मकर राशि – मकर राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। ऐसे में मकर राशि वालों के लिए साल 2021 मिला जुला रहेगा। हालांकि करियर में बदलाव और नए कार्य की स्थितियां बन सकती हैं।

कुंभ राशि- कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहल चरण है। बीमारियां और कई तरह की परेशानियों से घिरे रह सकते हैं। इस समय कुंभ राशि पर जिम्मेदारियां और काम का बोझ भी बढ़ेगा।

शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता हैं। कहते हैं कि जिस व्यक्ति के कर्म जैसे होते हैं, शनिदेव उसे वैसा ही फल देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनिवार की शाम को उपाय करने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यता है कि शनिवार को सूर्यास्त होने के बाद शनिदेव की आराधना की जाए तो उसका फल अधिक मिलता है।

क्या हैं उपाय –

शनिवार की शाम हाथ-मुंह धोकर पवित्र हो जाएं। ध्यान रखें कि इस दिन काले, नीले और स्लेटी रंग के वस्त्र नहीं पहनें।
50 ग्राम उड़द की दाल, 50 ग्राम काले तिल, 50 ग्राम सरसों का तेल, ढाई मीटर काला कपड़ा, 5 लोहे की कील और कोई भी फल या मिठाई लेकर शनिदेव के मंदिर जाएं। शनिदेव के मंदिर में जाकर काले रंग के आसन पर बैठें।

फिर भगवान शनिदेव के रूप, गुण, स्वभाव और दयालुता का ध्यान करते हुए उन्हें नमन करें। इसके बाद शनिदेव का चालीसा और स्तोत्र का पाठ करें। पाठ पूरा हो जाने पर ‘ॐ प्रां प्रीं प्रों सः श्नैचराय नमः’ मंत्र का 11 माला जाप करें। आप चाहें तो -‘नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम छायामातण्ड संभूतम तम नमामि श्नेचरम।’ मंत्र का 5 माला जाप भी कर सकते हैं। जाप करने के दौरान यह ध्यान रखें कि मंत्रों की जाप संख्या सही हो और उनका उच्चारण भी ठीक तरह से किया जाए।

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