शनि साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से बचने के लिए नहीं करने चाहिए ये काम, शनिदेव से दण्ड मिलने की है मान्यता

Shani Sade Sati: शनि साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को हिंसात्मक गतिविधियां करने से बचना चाहिए। कहते हैं कि इस दौरान हिंसात्मक गतिविधियां करने से दुष्प्रभावों की प्राप्ति हो सकती है।

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शनि साढ़ेसाती के दौरान कुछ कार्य करने के लिए मना किया जाता है।

Shani Sade Sati: ज्योतिष शास्त्र में शनि साढ़ेसाती को कर्मों का फल देने वाला माना जाता है। कहते हैं कि जिस प्रकार व्यक्ति कर्म करता है, ठीक उसी प्रकार के फलों की प्राप्ति उस व्यक्ति को होती है। ज्योतिष शास्त्र के विद्वान यह मानते हैं कि जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि साढ़ेसाती के योग बने रहते हैं, उस व्यक्ति को अपने कर्मों पर नजर बनाकर रखनी चाहिए।

शनि साढ़ेसाती की अवधि के दौरान गलत कार्य करने पर दुष्प्रभावों की प्राप्ति होने की मान्यता है। इसलिए इस दौरान व्यक्ति को अपने कर्मों को अच्छा रखना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दौरान कुछ कार्य नहीं करने चाहिए।

असहाय और लाचार लोगों को परेशान न करें। कोशिश करें कि आपकी वजह से उन्हें कोई समस्या न हो।

मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि मांस खाने से हत्या का पाप लगता है।

शनि साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को हिंसात्मक गतिविधियां करने से बचना चाहिए। कहते हैं कि इस दौरान हिंसात्मक गतिविधियां करने से दुष्प्रभावों की प्राप्ति हो सकती है।

महिलाओं के साथ असभ्य व्यवहार न करें। अभद्र शब्दों का प्रयोग करने बचें।

शनिदेव को पक्षी अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए शनि साढ़ेसाती की अवधि के दौरान किसी भी पक्षी को बंदी न बनाएं और न ही उन पर किसी भी प्रकार का अत्याचार न करें।

अपने से छोटी उम्र के लोगों के साथ दुर्व्यवहार न करें। संभव हो तो उनकी रक्षा करें।

इस दौरान जुआ और सट्टा आदि नहीं खेलना चाहिए। बताया जाता है कि ऐसे खेल खेलने से बुरे फलों की प्राप्ति हो सकती है।

ब्राह्मण, गुरुजन और माता-पिता आदि का अपमान न करें। संभव हो तो उनकी सेवा करें।

साढ़ेसाती की अवधि में किसी भी व्यक्ति को जानबूझ कर परेशानी में नहीं डालना चाहिए।

शनिदेव के दण्ड से बचने के लिए व्यक्ति को बेईमानी नहीं करनी चाहिए।

कुष्ठ रोगियों को अपमानित न करें।

कोशिश करें कि इस दौरान आप शराब, सिगरेट और तम्बाकू आदि का सेवन न करें। ऐसी मान्यता है कि यह कार्य महापापों में से एक हैं।

जो लोग ईश्वर में विश्वास रखते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उपाय करते हैं उनके साथ अभद्र व्यवहार न करें।

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